पंजाब में पाकिस्तान की ओर से नया हमला, अब खेती को चौपट करने की रची साजिशचंडीगढ़, [इन्द्रप्रीत सिंह]। पंजाब पर पाकिस्तान से नया खतरा पैदा हो गया है। पाकिस्तान ने अब पंजाब की खेती को चौपट करने की साजिश रची है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान के रास्ते भारत में घुसे टिडडी दल का खतरा पंजाब पर बढ़ रहा है। पाकिस्तान इन टिड्डी दलों पर नियंत्रण की कोई कोशिश नहीं कर रहा है और इनको पंजाब की ओर भेजने में लगा है।पंजाब के कृषि विभाग को दो तीन गांवों में टिडडी दल के कुछ हिस्से मिले हैं जिसके चलते विभाग ने कई टीमें राजस्थान और पाकिस्तान के साथ लगती सीमा के गांव में भिजवा दी हैं। आज भी टीम अबोहर उपमंडल के गांव शेरगढ़ पहुंची हैं जबकि एक और गांव लालगढ़ में भी टिड्डियों का दल दिखाई दिया है जिससे खेती विभाग के अफसर चिंता में हैं। दरअसल इस चिंता का कारण पश्चिम से पूर्व की ओर हवा का चलना है।टिड्डी दल का हमला, पाकिस्तान की ओर से कंट्रोल करने का नहीं हो रहा प्रयासकृषि विभाग के संयुक्त निदेशक सुखदेव सिंह बताते हैं कि टिडडी दल हवा के रूख पर ट्रैवल करता है और इन दिनों हवा पश्चिम की ओर से चल रही है जो हमारे लिए चिंता का कारण है। उन्होंने बताया कि हमारी टीमें पाकिस्तान और राजस्थान की सीमा के साथ लगते गांवों के एक एक गांव में निरीक्षण कर रही हैं।दस किलोमीटर लंबे और पांच किलोमीटर चौड़े एरिया में फैला हुआ है दलपंजाब सरकार ने टिडडी दल को कंट्रोल करने के लिए मार्कफैड को दस हजार लीटर दवा खरीदने को कहा है साथ ही एक प्राइवेट फर्म को भी 40 हजार लीटर दवा अपने स्टॉक में रखने को कहा है ताकि जरूरत पडऩे पर इसका उपयोग किया जा सके।विभागीय सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान में इसे कंट्रोल करने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है जिसके चलते यह आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि मरूस्थली व रेतीली मिट्टी वाला इलाका इनके प्रजनन के लिए उपयुक्त जगह होती है। इसलिए जितना हम लोग इसे कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं उतना ही यह बढ़ रहा है। दूसरा, चूंकि अभी तापमान काफी कम है लेकिन जैसे ही बढ़ेगा , टिडडी दल का खतरा और बढ़ जाएगा।इसलिए बढ़ रहा है खतराकृषि विभाग के संयुक्त निेदेशक सुखदेव सिंह ने बताया कि टिड्डियों का काफी बड़ा दल देखा गया है। इसका दायरा दस किलोमीटर लंबा और पांच किलोमीटर चौड़ा है। यानी यह एक साथ 12 से 15 हजार एकड़ रकबे को कवर कर लेता है। इसके अलावा किसी भी हरी फसल को यह चट कर जाता है। उड़ते हुए इसे रासायनिक दवाओं से भी कंट्रोल करना मुश्किल है। इसे रात में पेड़ों पर बैठने पर ही मारा जा सकता है। इसलिए खेती विभाग की टीमें रात में इसके पेड़ों पर बैठने का इंतजार करती हैंं।Posted By: Sunil Kumar Jhaडाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विसਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!
Source: Dainik Jagran January 25, 2020 03:33 UTC