तुलना के मूल मंत्र होते हैं - सेफ्टी, लिक्विडिटी और रिटर्न्स जब आप निवेश का कोई भी ऑप्शन (Options of Investment) चुनते हैं तो आप हिसाब लगाते हैं। निवेश के किसी भी विकल्प में पैसा लगाने से पहले आप ज़रूर सुनश्चित करते होंगे की यह विकल्प सुरक्षित हैं या नहीं। आप लिक्विडिटी का स्तर भी जांचते हैं। लिक्विडिटी यानि निवेश की निकासी जो कि किसी भी निवेश में एक एहम भूमिका निभाता है। ब्याज दर यानि की रिटर्न किसी भी निवेश की प्राथमिकता रहती है। सरल शब्दों में जान लें कि रियल रेट ऑफ़ रिटर्न्स आपको यह बताता है की आपके चुने गए विकल्प में आपको असली ब्याज कितना हासिल हुआ।जानने का क्या है फार्मूला रियल रेट ऑफ़ रिटर्न्स निकालने का फार्मूला बहुत ही आसान है। रियल रेट ऑफ़ रिटर्न्स = नॉमिनल ब्याज दर (इंटरेस्ट रेट) - इन्फ्लेशन रेट उदहारण: अगर आप किसी स्कीम में निवेश करते है जहां आपको 5% तक की रिटर्न मिलता है जोकि टैक्सेबल भी है। तो आपको रियल रेट ऑफ़ रिटर्न्स आया: नॉमिनल ब्याज दर (5%) - इन्फ्लेशन रेट एवरेज (6% ) = यानी आपकी रियल रेट ऑफ़ रिटर्न्स -1% (माइनस एक) यह एक चौंकाने वाली बात है और इसका अर्थ है की आपको वह निवेश विकल्प चुनने में फायदा होगा जहां आपको एवरेज इन्फ्लेशन रेट से 1 % से 2 % ज्यादा ब्याज मिले ताकि रियल रेट ऑफ़ रिटर्न्स पॉजिटिव आ सके। आप अपने समग्र निवेश पोर्टफोलियो में कौन से विकल्प जोड़ सकते हैं जो कि आपको पॉजिटिव रियल रेट ऑफ़ रिटर्न्स दे आईये जानते हैं।कौन से विकल्प जोड़ सकते हैं? जो भी निवेश योजनाए आपको औसत इन्फ्लेशन रेट (Average Inflation Rate) से अधिक ब्याज दर देती हैं चाहे वह 1% - 2% ज्यादा ही क्यों न हो तो वह योजना आपके लिए लाभदायक है। लेकिन जैसे-जैसे किसी भी निवेश विकल्प में ब्याज दर बढ़ता है, उसके साथ जुड़ा हुआ रिस्क भी बढ़ता है। आम नागरिकों के लिए हमेशा से बीच का रास्ता ही सुरक्षित माना गया है। यानि बेहतर रिटर्न और थोड़ी सुरक्षा और लिक्विडिटी। कुछ निवेशकों के लिए स्टॉक मार्केट बेहतर रिटर्न्स पाने का एक अच्छा विकल्प है। लेकिन, यह विकल्प उतना ही जोखिम भरा भी है। अगर आप विशेषज्ञ नहीं हैं और मार्केट को नहीं समझते हैं, तो आप के लिए यह एक परेशानी भी बन सकता है। अब ऐसे में म्यूचुअल फड बीच का रास्ता है। यह बेहतर रिटर्न भी देते हैं और जोखिम भी कम है।क्या होता है म्यूचुअल फंड म्यूचुअल फंड (Mutual Fund), जैसा कि नाम से ही झलकता है 'म्यूचुअल' यानि 'आपसी सहमति' से किया गया निवेश। इसमें अलग अलग निवेशकों द्वारा एक म्यूचुअल फंड स्कीम में लगाया गया पैसा। यह म्यूचुअल फंड स्कीम बाजार में एसेट मैनेजमेंट कम्पनीज लाती हैं। यह बहुत ही नामी-गिरामी फंड मैनेजर्स (Fund Managers) से निवेशकों के जमा पैसों को आगे स्टॉक मार्केट में लगवाती हैं। यह एसेट मैनेजमेंट कम्पनीज (SEBI) द्वारा विनियमित है।
Source: Navbharat Times November 16, 2020 05:48 UTC