किसी एक की मदद से मिली सीख ने मदद का कारवां शुरू कर दिया।- झार्थक बदलाव ७४ नितिन तिवारीत्योहारों के दौर में समाज के सहकारी बैंक में मेरे अग्रज और मैं संस्था अध्यक्ष के साथ मीटिंग कर रहे थे। तभी एक ख़राब खाताधारक (डिफॉल्टर) आया, अर्थात वह व्यक्ति जो कर्ज़ की क़िस्तें नहीं चुका पा रहा था, उसने अपनी नौकरी से जुड़ी समस्या बताई और लोन चुकाने के लिए अधिक मियाद मांगी।
Source: Dainik Bhaskar January 21, 2026 13:20 UTC