जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान लोकसभा में सोमवार को तीखी नोक-झोंक हुई। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चीन सीमा विवाद के संदर्भ में पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक और एक पत्रिका की रिपोर्ट का हवाला देने पर सत्तापक्ष ने सख्त आपत्ति जताई।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह के हस्तक्षेप के बीच स्पीकर ओम बिरला ने सदन के नियमों का हवाला देते हुए ऐसे उद्धरणों की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद विपक्ष ने हंगामा किया। समाजवादी पार्टी, तृणमूल और राजद समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी कांग्रेस का साथ दिया। दोनों पक्षों के अड़े रहने से सदन में 50 मिनट तक तीखी नोक-झोंक चलती रही। लिहाजा कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी और अंतत: दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।हंगामे के दौरान सदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मौजूद थे। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में 18 घंटे और राज्यसभा में 16 घंटे चर्चा तय है। पहले ही दिन संवेदनशील मुद्दे पर हुआ यह विवाद बताता है कि आगे भी हंगामा जारी रह सकता है। इसके पहले केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया। लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी खड़े हुए और उनसे पहले बोल चुके भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या द्वारा कांग्रेस के राष्ट्रवाद पर उठाई गई आपत्तियों का जवाब देने लगे।इसी क्रम में उन्होंने 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वे पूर्व थलसेनाध्यक्ष की अप्रकाशित पुस्तक के हवाले से चीन से संघर्ष के बारे में बताना चाहते हैं। यहीं से विवाद शुरू हो गया। दरअसल यह पुस्तक प्रकाशित ही नहीं हुई क्योंकि इसके तथ्यों पर सवाल है। राजनाथ ने तुरंत पूछा कि क्या यह पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। जब राहुल स्पष्ट नहीं कर पाए कि पुस्तक प्रकाशित है तो सिंह ने आरोप लगाया कि वे सदन को गुमराह कर रहे हैं।रक्षा मंत्री ने साफ कहा कि अप्रकाशित किताब या अप्रमाणित सामग्री का हवाला संसद में नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस तरह के उद्धरण से सदन में भ्रम फैलता है और देश की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर गलत संदेश जाता है। अमित शाह ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि राहुल किसी मैगजीन की रिपोर्ट के आधार पर गलत तथ्य पेश कर रहे हैं। उन्होंने सदन से आग्रह किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर सरकार एवं रक्षा मंत्री पर भरोसा किया जाना चाहिए। अप्रमाणित रिपोर्टों पर नहीं।राहुल को भाजपा सदस्य तेजस्वी सूर्या के उस बयान पर भी आपत्ति थी, जिसमें सूर्या ने दावा किया कि यूपीए कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण में देश की सांस्कृतिक चेतना और विरासत का उल्लेख नहीं होता था। इस पर कुछ कांग्रेस सदस्यों ने विरोध किया, जिस पर अमित शाह ने बचाव करते हुए कहा कि सूर्या अभिभाषण की सामग्री की बात कर रहे हैं, किसी विशेष नेता की नहीं। स्पीकर बार-बार हस्तक्षेप और नियम कायदों का हवाला देने के बावजूद राहुल बार बार उन्हीं मुद्दों पर लौटते दिखे जिसके कारण कार्यवाही बाधित रही।
Source: Dainik Jagran February 02, 2026 14:34 UTC