दैनिक भास्कर इंपैक्ट: कांग्रेस विधायक पटोले ने दैनिक भास्कर की खबरों के हवाले से उठाया मुद्दा, विधानसभा में गूंजा पोषण आहार घोटाले का मामला - News Summed Up

दैनिक भास्कर इंपैक्ट: कांग्रेस विधायक पटोले ने दैनिक भास्कर की खबरों के हवाले से उठाया मुद्दा, विधानसभा में गूंजा पोषण आहार घोटाले का मामला


Mumbai News. कुपोषण दूर करने के लिए राज्य की आंगनबाड़ियों में वितरित किए जाने वाले पोषण आहार को लेकर "दैनिक भास्कर' में प्रकाशित खबरों की गूंज बुधवार को विधानसभा में सुनाई दी। कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने दैनिक भास्कर की खबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में कुपोषण से 34 हजार 325 बच्चों की मौत हो चुकी है। जबकि 1 लाख 14 हजार बच्चे कुपोषित हैं। विधानमंडल बजट सत्र अधिवेशन के दौरान उन्होंने सदन में कहा कि ये पोषण आहार जानवर खा रहे हैं। इस पर रोक लगनी चाहिए।गौरतलब है कि दैनिक भास्कर ने बीते 10, 11 व 12 मार्च को "कुपोषण से 34,325 बच्चों की मौत, 1.14 लाख बच्चे कुपोषित, इधर जानवर खा रहे हैं पोषण आहार' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने दैनिक भास्कर की खबरों का संज्ञान लेते हुए यह मामला सदन के सामने रखा। बाद में विधान भवन परिसर में श्री पटोले ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि पिछले दिनों लगातार दैनिक भास्कर ने कुपोषण और पोषण आहार में हो रही हेराफेरी की खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। मैंने खबर में प्रकाशित जानकारी विधानसभा सदन के सामने रखते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग की है।यह भी पढ़े -मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत ने पुणे के कारोबारी को जमानत देने से किया इनकारदैनिक भास्कर के ग्राउंड रिपोर्ट में ये बाते आई थी सामनेदैनिक भास्कर ने कुपोषण दूर करने के लिए बांटे जा रहे आहार पर बड़ा खुलासा किया था। बच्चों को दिए जाने वाले पैकेज्ड फूड में बदबू और बेस्वाद होने के कारण कहीं उसे जानवरों को खिलाया जा रहा है तो कहीं कचरे में फेंका जा रहा है। भोजन के पैकेट खोलते ही इतनी बदबू आती है कि बच्चे उसे खाने से मना कर देते हैं। इस पूरे मामले का खुलासा दैनिक भास्कर ने प्रदेश की कई आंगनवाड़ियों की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान किया था। महिला एवं बाल विकास विभाग के सर्वे में भी सामने आया है कि 80 प्रतिशत बच्चे यह पोषण आहार नहीं खा रहे हैं।(फाईल फोटो)भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में दैनिक भास्कर ने कई आंगनबाड़ियों का दौरा किया था। इसमें से कुछ स्थानों पर पाया गया कि बच्चों के अभिभावकों से किसी तरह साइन करवाकर पैकेज्ड फूड दिया जा रहा है, जिसे वे जानवरों को खिला रहे हैं, क्योंकि उसे बच्चों के खाने लायक नहीं माना जा रहा है। वहीं अभिभावकों ने बताया कि वे ऐसा पोषण आहार लेने से मना कर चुके हैं, मगर खानापूर्ति के लिए उन्हें जबरदस्ती दिया जाता है। आंगनबाड़ी सेविकाओं का कहना था कि भले ही इसे फेंक दें, लेकिन हमसे ले लें, क्योंकि हमें रिकॉर्ड में पूरा पोषण आहार बांटने के टारगेट दिए गए हैं।


Source: Dainik Bhaskar March 25, 2026 16:24 UTC



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