नई दिल्ली, जेएनएन। जापान की राजधानी टोक्यो में ड्राइवर रहित ट्रेन के गलत दिशा में चले जाने और उससे 14 यात्रियों के घायल होने पर एक बार फिर तकनीकी की निर्भरता पर सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका और जापान जैसे देश तकनीकी के मामले में दिनोंदिन आगे बढ़ते जा रहे हैं, इन देशों में अधिकतर चीजें अब मशीन से ही हो रही है। यहां ड्राइवर रहित ट्रेन के बाद अब ड्राइवर रहित टैक्सी जैसी चीजों पर काम किया जा रहा है।मगर शनिवार को टोक्यो के उपनगरीय इलाके में हुई दुर्घटना के बाद इस तरह की तकनीकी पर फिर से सवाल उठने लगे हैं। जापान ने अपने को हाइटेक बनाते हुए अपने शहर में एक लाइन का पूरी तरह से ड्राइवर रहित बनाया है। इस लाइन पर 5 बोगियों वाली ट्रेन चलती है। लाइन का नाम शिन-सुगिता बंदरगाह योकोहोमा की कनाजावा सोसाइड लाइन है। इस लाइन पर बीते 30 साल से ड्राइवर रहित ट्रेन का संचालन हो रहा है मगर शनिवार को ये दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इसमें बैठे यात्रियों में से 14 घायल हो गए।ये दुर्घटना होने के बाद लाइन का संचालन कर रही कंपनी के अध्यक्ष अकिहिको ने बताया कि ये दुर्घटना एक लोकल रूट पर हुई है। वैसे इसकी उम्मीद कभी नहीं की गई थी मगर हादसा हो गया। ड्राइवररहित ट्रेन स्टेशन से निकलने के बाद आगे जाकर ट्रैक को बंद करने वाले बफर स्टाप से टकरा गई और दुर्घटनाग्रस्त हो गई।जानकारों का कहना है कि हम तकनीकी की तरफ तो बढ़ रहे हैं मगर इसमें मानवीय हस्तक्षेप को दरकिनार नहीं किया जा सकता है। यदि इसको दरकिनार किया गया तो उसके नतीजे इसी तरह से समय-समय पर सामने आते रहेंगे। यदि जापान जैसे देश में ड्राइवर रहित ट्रेन इस तरह से हादसे का शिकार हो सकती है तो इससे बाकी देशों के लोगों को भी सबक ले लेना चाहिए। जिससे इस तरह की दुर्घटनाएं रिपीट न हों।लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एपPosted By: Vinay Tiwari
Source: Dainik Jagran June 03, 2019 08:28 UTC