डार्क ट्रांजिट में एआईएस बंद कर देते हैं, जहाज का नेविगेशन लाइट बंद कर देते हैं,एलआरआईटी डिऐक्टिवेट कर देते हैं। बाकी रेडियो उपकरण भी बंद कर देते हैं। मतलब, जहाज कहीं रहा नहीं...बस रडार पर वह जहाज दिखेगा। जब रडार का उतना रेंज होगा तब, नहीं तो उतना समझ में नहीं आ पाता बेसिकली। डार्क ट्रांजिट में यही होता है।लेखक के बारे में अंजन कुमार अंजन कुमार, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में असिस्टेंट एडिटर हैं। इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 23 साल से अधिक का अनुभव है। राजनीति, करेंट अफेयर्स,जुडिशरी,डिफेंस, विदेश और बिजनेस से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि रखते हैं। सेंट कोलंबस कॉलेज, हजारीबाग से ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से टीवी जर्नलिज्म करने के बाद कई प्रतिष्ठित टीवी चैनलों में योगदान दे चुके हैं। देश की एक टॉप लीडरशिप के लिए कंटेंट प्रोवाइडर और स्पीच राइटर का काम करते हुए छह वर्षों से अधिक समय से डिजिटल पत्रकारिता में भागीदारी कर रहे हैं।... और पढ़ें
Source: Navbharat Times March 12, 2026 10:42 UTC