पुनारख-किऊल के बीच तीसरी और चौथी लाइन बिहार के पटना-किऊल रूट पर दो अतिरिक्त लाइनें बिछाई जा रही हैं। यह व्यस्त रूट पहले से ही क्षमता से ज्यादा लोडेड है। नई लाइनों से यात्री ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बढ़ेगी, देरी कम होगी और कोयला-सीमेंट जैसा माल ढुलाई सुचारू होगी।2. गम्हरिया-चांडिल के बीच तीसरी-चौथी रेल लाइन झारखंड के औद्योगिक क्षेत्र (चांडिल डैम, दलमा वन्यजीव अभयारण्य के पास) में दो अतिरिक्त लाइनें। इससे इस्पात, कोयला और खनिजों की ढुलाई तेज होगी। पर्यटकों को चांडिल डैम, हेसाकोचा वाटरफॉल, रायजामा घाटी पहुंचने में आसानी होगी।3. सोन नगर-मोहम्मद गंज के बीच तीसरी रेल लाइन औरंगाबाद (बिहार) से पलामू (झारखंड) तक 65 किमी लंबी थर्ड लाइन। लागत करीब 1338 करोड़ रुपये। कोयला-खनिज ढुलाई और पावर प्लांट्स को सप्लाई आसान होगी। यात्री ट्रेनों की स्पीड और संख्या दोनों बढ़ेगी।4. कोडरमा-बरकाकाना डबलिंग व कोडरमा-पटना रूट कोडरमा-हजारीबाग-बरकाकाना लाइन की डबलिंग और कोडरमा से पटना तक नया रूट। रांची-जसीडीह का सफर 310 किमी से घटकर 255 किमी हो जाएगा। हजारीबाग, कोडरमा और बिहार के यात्रियों को देवघर जाने में बड़ी सुविधा।क्या कहते हैं विशेषज्ञ? रेलवे अधिकारियों के अनुसार इन ट्रैकों के बनने से रूटों की क्षमता 30-40% बढ़ जाएगी। यात्री ट्रेनों की पंकचुअलिटी बढ़ेगी, भीड़ कम होगी और मालगाड़ियों को प्राथमिकता मिलेगी। पर्यावरणीय लाभ भी बड़ा—सड़क परिवहन कम होने से करीब 6 करोड़ लीटर तेल बचेगा और 30 करोड़ किलो कार्बन उत्सर्जन घटेगा (एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर)।
Source: Dainik Jagran April 10, 2026 19:27 UTC