जयपुर में जेएलएफ में अल्वा बोलीं- न्याय व्यवस्था को संविधान और अधिकारों का रक्षक होना चाहिए, उसने हमें विफल कियाउन्होंने कहा- गवर्नर को निष्पक्ष होना चाहिए, पार्टी के एजेंट के रूप में काम नहीं करना चाहिएDainik Bhaskar Jan 25, 2020, 05:03 PM ISTजयपुर. जेएलएफ (जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल) में शनिवार की सुबह राजस्थान की पूर्व राज्यपाल मार्गरेट अल्वा ने कहा- संविधान और लोकतंत्र दोनों साथ में आए। मैं ब्रिटिश इंडिया में पैदा हुई थी। संविधान ने मुझे एक भारतीय में बदला। ये एक बहुत बड़ा ट्रांसफॉरमेशन था, बिना किसी बहस, झगड़े के हम भारतीय नागरिक बने। जिसमें न जाति देखी गई, न रंग देखा गया, न ही राज्य देखा गया। आज 70 साल बाद मुझसे मेरी नागरिकता के बारे में पूछा जा रहा है।'मैं न्याय व्यवस्था से बहुत ही निराश हूं'उन्होंने कहा- 'मैं न्याय व्यवस्था से बहुत ही निराश हूं। जिसे हमारी सुरक्षा करनी चाहिए। संविधान और अधिकारों का रक्षक होना चाहिए, उसने हमें विफल कर दिया। कोर्ट को ज्यादा एक्टिव होकर बोलना पड़ेगा।' अल्वा ने कहा कि जब हम बड़े हो रहे थे तब किसी को फर्क नहीं पड़ता था कि मैं क्रिश्चियन हूं या मुस्लिम हूं। हम ऐसे समाज में बड़े हुए जो सबको समान मानता था। कुछ समय बाद हमारी पहचान धर्म से जोड़ी जाने लगी। हमें बताया जाने लगा इन लोगों से बात कर सकते हो। इनसे नहीं, किसी को अपने आप नागरिकता मिलने लगी, दूसरों को नहीं। मेरे हिसाब से ये उस संविधान के खिलाफ है, जिसने माइनॉरिटी समेत हर भारतीय को बराबर अधिकार दिए हैं।'राज्यपाल की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए'अल्वा ने कहा कि यहां कई तरह के राज्यपाल हैं। सभी को एक तरह से नहीं देखा जा सकता। मैं खुद गवर्नर रही। मोदी जी ने मुझे गुजरात एडिशनल चार्ज के रूप में दिया था। गवर्नर को अपना काम करना होता है, जिसे राष्ट्रपति द्वारा चुना जाता है। ये निर्णय आपको करना है कि आप लक्ष्मण रेखा कहां खींचते हैं। जब मैं गवर्नर बनी तो मैंने जनता के लिए अपने दरवाजे हमेशा खुले रखे। मैंने कांग्रेस की सरकार के वक्त भी कई बार सवाल खड़े किए। गवर्नर को निष्पक्ष होना चाहिए। न की किसी पॉलिटिकल पार्टी के एजेंट के रूप में काम करना चाहिए। मणिपुर और गोवा में क्या हुआ। बहुमत किसी पार्टी को मिला और गवर्नर ने दूसरी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 2 हफ्ते का वक्त दे दिया। इसलिए गवर्नर के रोल की भी समीक्षा होनी चाहिए। संसद और राष्ट्रपति भवन को समीक्षा करनी चाहिए।
Source: Dainik Bhaskar January 25, 2020 08:14 UTC