जीवन में कभी साइकिल नहीं चलाई, अब आत्मनिर्भर बनने के लिए सीख रहीं कार ड्राइविंगरायपुर। वास्तविकता में सीखने की कोई उम्र नहीं होती है, बल्कि सब कुछ निर्भर करता है कि आप कितनी जीवटता के साथ सीखने की चाहत रखते हैं। उसके बाद सारी दिक्कतें आपको बेहतर मंजिल तक पहुंचाने में लग जाती हैं। कुछ इसी तरह का प्रयास रायपुर जिला पंचायत के माध्यम से शुरू किया गया है।ऐसी महिलाएं जो जीवन में कभी साइकिल तक नहीं चलाईं, उन्हें अब जिला पंचायत के माध्यम से ड्राइविंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। योजना का एकमात्र उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर गांव की महिलाओं को व्यवसायिक रूप से जोड़ते हुए सशक्त बनाना है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ट्रेनिंग पूरी होने के बाद महिलाओं को सर्टिफिकेट दिया जाएगा। प्रथम चरण के अंतर्गत अभनपुर पंचायत में महिलाओं को प्रशिक्षित दिया जा रहा है।तीन जगह बनाया गया ट्रेनिंग सेंटरप्रदेश में पहली बार शुरू किए जा रहे इस प्रयास को तीन चरणों में रखा गया है। जिसमें अभनपुर, आरंग, चंद्रखुरी को ट्रेनिंग सेंटर बनाया गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत शुरू हुई इस योजना में 21 से 40 वर्ष की महिलाओं को प्रशिक्षिण दिया जा रहा है। विभाग से जुड़े अधिकारी तीरथ सिंह की मानें तो प्रशिक्षण के बाद पंचायत के सहयोग से महिलाओं को स्कूल, शासकीय विभाग, निगम सहित ओला के तर्ज पर टूर एंड ट्रेवल्स जैसे कार्य से जोड़ने की पहल होगी। इससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।पुरषों की अपेक्षा सुरक्षित ड्राइविंग करती हैं महिलाएंअक्सर प्राइवेट सेक्टर के साथ ही शासकीय विभागों में खासकर महिला अधिकारियों के लिए पुरुष ड्राइवर के बजाय महिला ड्राइवर की मांग बढ़ रही है। इसके अलावा स्कूलों में भी सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल बसों में महिला परिचालकों का होना अनिवार्य कर दिया है।वहीं योजना में ड्राइविंग प्रशिक्षण दे रहे ट्रेनर एसके साहू की मानें तो महिला ड्राइवर की मांग पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ गई। इसके पीछे वजह यही है कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित तरीके से ड्राइव करती हैं। साथ ही उनमें नशे की प्रवृत्ति भी नहीं होती इस वजह से उनकी ड्राइव पर ज्यादा भरोसा किया जा सकता है।सिर्फ गृहस्थी संभालने से नहीं होगा विकासअभनपुर जिला पंचायत में प्रशिक्षण ले रहीं छछानपैरी रहवासी मिथलेस धु्रव महिला काफी उत्सुक है। नईदुनिया से बातचीत में उनका कहना है कि कुछ वर्ष पहले पति की मृत्यु हो गई। इसके बाद घर खर्च चलाने के लिए भाई लोग का सहयोग लेना पड़ता है। ऐसे में कब तक गृहस्थी चलाने के लिए सहयोग लें।इसलिए जीवन में कभी साइकिल तक नहीं चलाई थी, लेकिन अब गृहस्थी संभालने के साथ आर्थिक मजबूती के लिए घर से बाहर से निकलना होगा। इसलिए बहुत ही अच्छा लग रहा है कि इसके माध्यम से आत्मबल बनने की ताकत मिलेगी। महिला मिथलेस की तरह दूसरी महिलाओं की भी कहानी है। जो योजना से जुड़कर खुद को मजबूत करने में जुटी हैं।- इस प्रोजेक्ट के तहत दिलचस्पी लेने वाली ग्रामीण महिलाओं को ड्राइविंग की ट्रेनिंग दिया जा रहा है। जिसका एक मात्र उद्देश्य है उन्हे आत्मनिर्भर बनाया जा सके। जिससे वह समाज में व्यवसायिक ड्राइविंग के रूप में जुड़कर स्वयं व परिवार की जिम्मेदारी उठा सके। - डॉ. गौरव सिंह, सीईओ, रायपुर जिला पंचायत
Source: Dainik Jagran June 03, 2019 09:45 UTC