आसपास के बांधों में सूख चुका है पानी, लेकिन बह रही है नदीदैनिक भास्कर Jun 22, 2020, 10:08 AM ISTजालोर. डार्क जोन में शामिल जालोर जिले में तीन फीट चाैड़ाई वाली एक अनूठी नदी बहती है, जो महज 2 किमी ही लंबी है, लेकिन इसमें पूरे साल पानी का बहाव रहता है। महज तीन फीट की चाैड़ाई हाेने से इसका रूप नदी जैसा ताे नहीं है, लेकिन ग्रामीण इसे त्रिवेणी नदी ही कहते हैं। रानीवाड़ा उपखंड क्षेत्र के सूरजवाड़ा ग्राम पंचायत के धुलियां गांव में बारिश के दौरान सुंधामाता की पहाड़ी से पानी नदी के रूप में पानी बहता है और धुलियां में एक ही स्थान पर तीन नदियां एकत्रित होती हैं, उसे स्थानीय लोग त्रिवेणी नदी कहते हैं। हालांकि त्रिवेणी नदी में पानी ज्यादातर बारिश होने पर ही आता हैं, लेकिन धुलियां गांव में इसी नदी के बहाव क्षेत्र में जमीन से पानी निकलकर 2 किमी तक पूरे साल बहता है। आसपास के ग्रामीण इस पानी को काफी पवित्र भी मानते हैं और श्रावण मास में यहां स्नान करने भी आते हैं। हालांकि इस नदी पर आसपास के कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है और सब्जियाें की पैदावार ले रहे हैं। लगातार हो रहे अतिक्रमण की वजह से ही धीरे-धीरे यह नदी संकरी हो गई।धुलियां ग्राम में त्रिवेणी के बहाव क्षेत्र में 2 किमी तक यह पानी बारहमास तक चलता रहता हैं। पानी का कोई उद्गम स्थल ताे नहीं है, लेकिन जमीन से ही पानी निकलकर दो किमी तक चलता है। पूर्व में यह पानी काफी चौड़ाई पर चलता था, लेकिन आसपास के लोगों ने सब्जी की फसल बुवाई के लिए अतिक्रमण कर लिया है। इन लोगों ने जेसीबी से इसके किनारे पाल भी बना दी है, ऐसे में अब यह पानी 2 से 3 फीट की चौड़ाई पर ही बहता है।यह है मान्यतानदी के बारह माह बहने को लेकर स्थानीय ग्रामीणों की बड़ी मान्यता भी है। नदी के किनारे पर एक त्रिणेश्वर महादेव मंदिर स्थिति है। ग्रामीणाें की आस्था है कि महादेव की कृपा से ही जमीन से 2 किमी तक पानी बाहर मास बहता है। इसी मान्यता के चलते कई लोग इस नदी को पवित्र मानते हैं और श्रावण मास में यहां स्नान करने आते हैं।5 बांधों में आया पानी सूखा, लेकिन त्रिवेणी बहती रहीजिले में पिछले साल हुई बारिश से पांच बांधों में पानी आया था, जिसमें से एक बांध में कुछ मात्रा में पानी बचा हैं, जबकि बाकी सूख चुके हैं। लेकिन इस धुलियां में यह पानी सदाबहार बह रहा। जिले में बाकली बांध में 5.67 मीटर, वणधर बांध में 0.60, खेड़ा सुमेरगढ़ बांध में 1.50 व मेली बांध में 1.76 मीटर पानी आया था, जो वर्तमान में सूख चुके है। हालांकि बिठन बांध में 3.53 मीटर पानी आया, जिसमें से 0.90 मीटर पानी बचा है। धुलिया निवासी जुजारदान चारण का कहना है कि इस नदी को हम काफी पवित्र मानते हैं, प्रशासन को इसके संरक्षण के लेकर आगे आना चाहिए।
Source: Dainik Bhaskar June 22, 2020 04:30 UTC