जानें क्‍यों श‍िवलिंग पर क्‍यों लगाते हैं हॉर‍िजेंटल त्रिपुंड जबकि त‍िलक हमेशा होता है वर्टिकल - News Summed Up

जानें क्‍यों श‍िवलिंग पर क्‍यों लगाते हैं हॉर‍िजेंटल त्रिपुंड जबकि त‍िलक हमेशा होता है वर्टिकल


5 /5 जानें क्‍या है इसका वैज्ञान‍िक महत्‍वश‍िवल‍िंग या श‍िवजी को लगाया जाने वाला त्रिपुंड हमेशा भस्‍म या फ‍िर चंदन का ही होता है। इसमें इनके अलावा क‍िसी और प्रकार के पदार्थ या रंग का प्रयोग करना धार्मिक तौर पर वर्जित माना गया है। मान्‍यता है क‍ि चंदन मनुष्य के मस्तिष्क को शीतलता प्रदान करता है। उग्र स्वभाव वाला व्यक्ति यदि माथे पर चंदन लगाए तो उसका व्यवहार सौम्य में हो जाता है। वहीं त्रिपुंड के लिए भस्म का मतलब किसी भी लकड़ी की राख नहीं होता बल्कि शैव परंपरा में भस्म को विशेष प्रकार से तैयार किया जाता है। इसके कारण मच्छर से लेकर जहरीले शाम तक कोई भी उस शरीर के पास नहीं आता, जिस पर बस भस्म लगी होती है। वैज्ञान‍िकों मतों के अनुसार माथे पर जहां तिलक लगाया जाता है पिनियल ग्रन्थि का स्थान है, और यहां उद्दीपन होने से आज्ञाचक्र का उद्दीपन होता है। इससे हमारे शरीर मे स्थूल सूक्ष्म अवयव जागृत हो जाते हैं।


Source: Navbharat Times December 27, 2020 11:37 UTC



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