छठे चरण में बंगाल की 8 सीटों पर चुनाव, मिदनापुर छोड़कर 7 पर तृणमूल सब पर भारी - Dainik Bhaskar - News Summed Up

छठे चरण में बंगाल की 8 सीटों पर चुनाव, मिदनापुर छोड़कर 7 पर तृणमूल सब पर भारी - Dainik Bhaskar


घाटाल, मिदनापुर, झारग्राम, पुरुलिया, कांठी, तामलुक, बांकुरा, विष्णुपुर में वोटिंग 12 मई को2014 में सभी सीटें तृणमूल कांग्रेस ने जीती थींलोकसभा चुनाव के छठे चरण में 12 मई को पश्चिम बंगाल की आठ सीटों घाटाल, मिदनापुर, झारग्राम, पुरुलिया, कांठी, तामलुक, बांकुरा और विष्णुपुर में वोटिंग होगी। ये जंगल महल का वह इलाका है जो कभी माओवादियों का गढ़ था। स्थानीय मुद्दों की बजाय यहां चुनाव मोदी, दीदी और संत्रास (आतंक) पर केंद्रित है। मिदनापुर में कड़ी टक्कर को छोड़ दें तो तृणमूल को कहीं परेशानी नहीं है।पूर्व आईपीएस अफसर 56 साल की भारती घोष कभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विश्वासपात्र अधिकारी थीं, लेकिन अब राजनीतिक दुश्मन। दुश्मनी इस हद तक कि घाटाल से भाजपा से लड़ रही भारती को हराने में ममता कोई कसर नहीं छोड़ रहीं। तृणमूल उम्मीदवार व बांग्ला फिल्मों के सुपर स्टार दीपक अधिकारी (देव) के लिए ममता ने पूरी ताकत लगा दी है। भारती अपने ऊपर दर्ज 11 मुकदमों का बदला लेना चाहती हैं। 36 वर्षीय देव को भारती टक्कर जरूर दे रही हैं लेकिन तृणमूल के मजबूत और भाजपा के कमजोर नेटवर्क के कारण देव का पलड़ा भारी है।कोलकाता से करीब 125 किलोमीटर दूर घाटाल के इरपाला में भारती के रोड शो में भरी दोपहरी में भी भीड़ है। वे तृणमूल सरकार पर हमला बोलती हैं और जय श्री राम के नारे से खत्म करती हैं। पश्चिम मिदनापुर की एसपी रहते उनकी छवि सख्त अफसर की थी। घाटाल इसी जिले में है, इसलिए भारती जाना-पहचाना चेहरा है। उनके स्वागत के लिए खड़ी काजोल अधिकारी कहती हैं- ‘मैं इन्हें तब से जानती हूं जब बाढ़ में ये सामान लेकर हमारी मदद करने आई थीं। भारती की यह दूसरी तस्वीर है। उन्हें मिदनापुर से हटाकर जब लूप लाइन में भेजा तो उन्होंने नौकरी छोड़ दी। इसके बाद वे सरकार के निशाने पर आ गई। उन पर 11 केस दर्ज हो चुके हैं। इनमें अवैध वसूली समेत कई गंभीर आरोप हैं।देव के चुनाव संयोजक विधायक शंकर दलोई कहते हैं- ‘जो केस दर्ज हैं उन्हीं से बचने के लिए वे भाजपा में गई। जब एसपी थीं तब आतंक से हर कोई त्रस्त था’। फिल्मों में व्यस्तता के कारण देव न तो क्षेत्र में सक्रिय रहे न संसद में। बावजूद इसके उन्हें देखने भीड़ उमड़ रही है। उनके साथ तृणमूल की मजबूत टीम भी है। मिदनापुर में कांटे की टक्कर है। यहां भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का मुकाबला तृणमूल के मानस रंजन भूनिया से है। भूनिया कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। वह अभी राज्यसभा सदस्य हैं। भाजपा के दिलीप घोष खड़कपुर से विधायक हैं। क्षेत्र मेंें भाजपा का प्रभाव बढ़ा है। इसी को देखते हुए ममता ने मौजूदा सांसद अभिनेत्री संध्या रॉय की जगह भूनिया को टिकट दिया है। बांकुरा में भी यही फॉर्मूला अपनाया। वहां अभिनेत्री मुनमुन सेन की जगह राज्य के मंत्री सुब्रत मुखर्जी को उतारा है। लेफ्ट के गढ़ में मुकाबला भाजपा के सुभाष सरकार से है जो पिछली बार तीसरे नंबर पर थे। मुखर्जी की छवि की वजह से तृणमूल को दिक्कत नहीं है।नंदीग्राम आंदोलन की वजह से तामलुक तृणमूल का मजबूत गढ़ है। क्षेत्र में अधिकारी परिवार का दबदबा है। 2014 में शिवेंदु अधिकारी जीते थे। 2016 में शिवेंदु को ममता ने मंत्री बनाया तो उपचुनाव में उनके भाई दिव्येंदु जीते। सीपीएम से इब्राहिम अली और भाजपा के सिद्धार्थ शंकर नास्कर से मुकाबला है। इस बार भी दिव्येंदु को दिक्कत नहीं है। कांठी से शिवेंदु व दिव्येंदु के पिता शिशिर कुमार अधिकारी जीत की हैट्रिक की तैयारी में हैं। क्षेत्र में उनके प्रभाव और तृणमूल की मजबूत स्थिति को देखते राह भी आसान है। उनका मुकाबला भाजपा के देवाशीष सामंता से है।पुरुलिया में त्रिकोणीय टक्कर है। तृणमूल सांसद डॉ. मृगांको महतो का मुकाबला कांग्रेस के नेपाल महतो व भाजपा के ज्योतिर्मय महतो से है। नेपाल इसी संसदीय क्षेत्र के बागमुंदी से 2001 से विधायक हैं। पुरुलिया में भी कांग्रेस विधायक है लेकिन संगठन की कमजोर स्थिति उनके आड़े आएगी। भाजपा प्रत्याशी के सामने पहचान का संकट है। विष्णुपुर लोकसभा में मुकाबला अलग तरह का है। 2014 का चुनाव तृणमूल के टिकट से जीते सौमित्र खान अब भाजपा उम्मीदवार हैं। हाई कोर्ट ने उनके क्षेत्र में आने पर रोक लगा रखी है। ऐसे में प्रचार की कमान पत्नी संभाल रही हैं। सौमित्र इसी साल भाजपा में आए हैं। उनके सामने राज्य के मंत्री श्यामल सांत्रा है। सौमित्र के प्रचार में नहीं होने का फायदा तृणमूल को मिल रहा है।संथाली जनजाति बहुल झारग्राम में बिरबाहा नाम की दो उम्मीदवारों के कारण मुकाबला रोचक है। एक हैं तृणमूल की बिरबाहा सोरेन और दूसरी झारखंड पार्टी (नरेन) की बिरबाहा हांसदा। हांसदा संथाली फिल्मों की स्टार हैं और सोरेन स्थानीय नेता रॉबिन टुडू की पत्नी। हांसदा ने सोरेन के खिलाफ ताल ठाेंक रखी है।आखिर संत्रास क्यों है चर्चा में? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ यहां कोई तीसरा शब्द चर्चा में है तो वह है संत्रास यानी आतंक। भाजपा, कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट नेता के भाषण में यह शब्द बार-बार आता है। भाजपा इसे बड़ा मुद्दा मान रही है। पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय इसे यूं समझाते हैं- ‘जिस प्रकार कम्युनिस्ट विरोधियों को कुचलते थे, वे सारे हथकंडे अब तृणमूल अपना रही है। मेरे प्रभारी बनने के बाद बंगाल में अब तक हमारे 96 कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है।


Source: Dainik Bhaskar May 06, 2019 19:33 UTC



Loading...
Loading...
  

Loading...

                           
/* -------------------------- overlay advertisemnt -------------------------- */