नई दिल्ली, प्रेट्र। सीमा पार बढ़ रहे चीन के सैन्य जमावड़े के जवाब में भारत ने भी अपनी तैयारी पुख्ता कर ली है। इसी क्रम में भारत ने सोमवार को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) की सामरिक कमान का संचालन जम्मू-कश्मीर के लेह-लद्दाख जिले से शुरू कर दिया। पहले यह कमान चंडीगढ़ में थी। आइटीबीपी के उत्तर पश्चिम फ्रंटियर के पास शांतिकाल में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा की निगरानी की जिम्मेदारी है।महानिरीक्षक (आइजी) स्तर के अधिकारी इसके प्रमुख होते हैं, जो सेना के मेजर जनरल के समतुल्य हैं। लेह से आइटीबीपी के महानिरीक्षक अरविंद कुमार ने बताया, 'एक अप्रैल से हम लद्दाख क्षेत्र में सक्रिय हैं और इस बारे में दिल्ली स्थित मुख्यालय को जानकारी दे दी गई है।' एक अन्य अधिकारी ने कहा कि यहां भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और बल का झंडा फहरा दिया गया है। फ्रंटियर का कामकाज आइटीबीपी के सेक्टर मुख्यालय के मौजूदा परिसर से संचालित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि नई कमान और इमारतों के निर्माण तथा दूसरे साजो-सामान के लिए अनुमति प्राप्त हो गई है। उम्मीद है कि बल के महानिदेशक (डीजी) एसएस देसवाल जल्द ही यहां का दौरा करेंगे। आधिकारिक आपरेशनल ब्लूप्रिंट में कहा गया है, जम्मू-कश्मीर के लेह जिले में सेना की 14वीं वाहिनी का बेस है, जिसके प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारी हैं। आइटीबीपी के फ्रंटियर के यहां आने से दोनों फोर्स के बीच 'रणनीतिक और रक्षा योजना' संबंधी तालमेल और बेहतर होगा।1999 में कारगिल घुसपैठ के बाद जम्मू और श्रीनगर के अलावा लेह में सेना की अलग वाहिनी स्थापित की गई थी। सेना लेह में आइटीबीपी के परिचालन संबंधी नियंत्रण की अनुमति मांग रही थी, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया था। आइटीबीपी के फ्रंटियर के लेह में आने के बाद यह मुद्दा ही खत्म हो जाएगा। महानिदेशक देसवाल कह चुके हैं, 'हमें सीमा पर होना होगा, इसलिए फ्रंटियर को वहां भेजा जा रहा रहा है।'Posted By: Sanjeev Tiwari
Source: Dainik Jagran April 01, 2019 11:45 UTC