5 /5 तब भगवान वामन ने दिया था ऐसा आर्शीवादकथा मिलती है कि जब भगवान वामन ने बलि से दो पग में संपूर्ण लोक नाप दिया तो तीसरे पग के लिए बालि ने अपना मस्तक आगे कर दिया। उस समय भगवान ने प्रसन्न होकर कहा था कि ‘हे दानवीर! भविष्य में इसी प्रतिपदा को तेरा पूजन होगा और उत्सव मनाया जाएगा। कहते हैं कि तबसे ही राजा बलि की पूजा की प्रथा शुरू हुई। कहते हैं कि मार्गपाली और बलि की पूजा करने से और मार्गपाली की वंदनवार के नीचे से होकर निकलने से जीवन में वर्ष भर सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
Source: Navbharat Times November 14, 2020 23:01 UTC