पिछले दिनों हुई बेमौसमी बारिश के कारण मंडियों में आ रही गेहूं की फसल में 13-14 प्रतिशत नमी की मात्रा मिल रही है। जबकि भारतीय खाद्य निगम ने 12 प्रतिशत नमी की मात्रा तय की है। यह जानकारी डाक्टर अमरीक सिंह कृषि अधिकारी पठानकोट ने दी।जागरण संवाददाता, पठानकोट : पिछले दिनों हुई बेमौसमी बारिश के कारण मंडियों में आ रही गेहूं की फसल में 13-14 प्रतिशत नमी की मात्रा मिल रही है। जबकि, भारतीय खाद्य निगम ने 12 प्रतिशत नमी की मात्रा तय की है। यह जानकारी डाक्टर अमरीक सिंह कृषि अधिकारी पठानकोट ने दी। कृषि अधिकारी ने सोमवार को जिला की विभिन्न मंडियों का दौरा किया। डाक्टर अमरीक सिंह ने बताया कि मंडियों में उच्च नमी वाले गेहूं को सुखाने के लिए बेहद मुश्किल आती है। इसलिए, गेहूं की फसल तभी काटी जानी चाहिए, जब वह पूरी तरह से सूख जाए। खरीद एजेंसियों, आढ़तियों और किसानों को उच्च नमी वाले उत्पादों को बाजार में लाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए परेशानी से बचने के लिए उपज को पूरी तरह से सुखाकर बाजार में ले जाना चाहिए। बताया कि किसानों को मंडियों में खर्चों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।किसान को बोली प्रक्रिया के दौरान हमेशा मंडी में पड़े गेहूं के पास होना चाहिए ताकि गेहूं की कीमत का पता चल सके। अगर किसान को लगता है कि कीमत कम हो गई है तो वह बेचने से इनकार कर सकता है। डाक्टर अमरीक ने कहाकि गेहूं की कटाई सुबह 10 बजे के बाद और शाम 7 बजे से पहले करें। फसल की बिक्री के बाद, एक निश्चित पर्ची यानी जे फॉर्म प्राप्त किया जाना चाहिए। यह पता चला है कि कई आढ़तियां ने नकली जे फार्म छपवाए है, जिनसे बचा जाना चाहिए। अगर किसान को लगता है कि वजन बढ़ रहा है, तो वह बिना किसी शुल्क के अपनी गेहूं की 10 प्रतिशत वजन भराई फिर से जांच के लिए करवा सकता है।शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप
Source: Dainik Jagran April 26, 2021 18:11 UTC