गुजरात / अस्पताल की गलती से दलित परिवार ने दफन किया मुस्लिम युवती का शव, फिर कब्र से निकाला गया - News Summed Up

गुजरात / अस्पताल की गलती से दलित परिवार ने दफन किया मुस्लिम युवती का शव, फिर कब्र से निकाला गया


Dainik Bhaskar May 10, 2019, 09:58 PM ISTसरकारी अस्पताल के लापरवाह कर्मचारियों ने बदल दिए थे शवअस्पताल प्रबंधन अपनी लापरवाही मानने को तैयार नहींअहमदाबाद. यहां की वाड़ी लाल साराभाई यानी वीएस हॉस्पिटल की मोरचरी से दो शवों की अदला-बदली हो गई। एक परिवार ने शव को दफना भी दिया था, फिर उसको निकालकर परिवार वालों को सौंप दिया।यह है घटनाक्रमदो दिन पहले बावड़ा में खुले आम एक युवती की उसके प्रेमी ने हत्या कर दी थी। उस युवती का नाम मितल वाघेला था, उसकी 26 मई को शादी होने वाली थी। हत्या के बाद उसका प्रेमी फरार हो गया, जिसे कुछ ही घंटों में पुलिस ने अरेस्ट कर लिया। मितल की लाश पोस्टमार्टम के लिए वी एस हॉस्पिटल लाई गई थी। जब मितल का परिवार हॉस्पिटल गया, तो उसे नसरीन बानू का शव सौंप दिया। तब मितल के परिवार वालों ने उस शव को उसके पैतृक गांव घोलेरा ले जाकर दफना दिया।नसरीन के परिवार वाले पहुंचे, तब फूटा भांडाइधर जब नसरीन के परिवार वाले नसरीन का शव लेने गए, तब पता चला कि उसके शव को तो मितल के परिवार वालों को सौंप दिया गया है। नसरीन के शव को उसके परिवार वाले कर्नाटक ले जाने वाले थे। पर जब नसरीन का शव नहीं मिला, तो अस्पताल में हंगामा मच गया।नसरीन का जबर्दस्ती पीएम कराया गयानसरीन गर्भवती थी, उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। बुधवार को उसे इंजेक्शन दिया गया, उसके बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसके परिवार वाले यह चाहते थे कि शव का पोस्टमार्टम न किया जाए, इसके बाद भी उसके शव का पीएम किया गया। पीएम के बाद उसके शव को मर्चुरी में रखा गया था, जहां शवों की अदला-बदली हो गई।अस्पताल प्रबंधन अपनी गलती नहीं मान रहावीएस अस्पताल के सुपरिटेंडेंट ने इस मर्चुरी में तैनात चपरासी की गलती बता रहा है। इसे वह अपनी गलती मानने को ही तैयार नहीं है। वे तो यह भी कह रहे हैं कि मितल के परिवार वालों ने भी लाश को क्यों नहीं पहचाना? उन्हें भी एक बार लाश को देख तो लेना था। उधर मेयर बिजल पटेल ने अस्पताल प्रबंधन की गलती मानी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि मितल के परिवार वालों ने लाश को पहचान कर ही दस्तखत किए और ले गए।नसरीन के परिवार वालों ने मचाया हंगामाकर्नाटक की जिस महिला के शव को बावड़ा की मितल का समझकर उसके परिवार वालों को सौंप दिया गया। इससे नसरीन के परिवार वालों ने अस्पताल में हंगामा मचाया। इनकी मांग थी कि जब तक नसरीन का शव नहीं मिलता, तब तक वे सभी अस्पताल में धरना देंगे।मितल का शव अभी तक वी एस में ही हैइस हंगामे के बाद भी मितल का शव अभी तक वी एस हॉस्पिटल में ही रखा गया है। जिसे पूरी खानापूर्ति के बाद उसके परिवार वालों को सौंपा जाएगा। उधर नसरीन के शव को बाहर निकालकर उसके परिवार वालों को दे दिया गया है। अब मितल के शव को दफनाने की प्रक्रिया की जाएगी।7 साल पहले भी ऐसा ही हुआ था7 साल पहले भी इसी वीएस हॉस्पिटल में मुस्लिम-दलित महिला के शवों को बदला गया था। गोमतीपुर म्युनिसिपल काउंसलर इकबाल शेख ने भास्कर को बताया कि सात साल पहले इसी हॉस्पिटल में इस तरह की घटना हो चुकी है। गोमतीपुरा में रहने वाली एक मुस्लिम महिला की हॉस्पिटल में मौत हो गई थी। उसके शव को एक दलित महिला के शव के साथ बदल दिया गया था। उस समय दोनों परिवार वालों को समझाइश दी गई थी। इस घटना की शिकायत होने के बाद भी किसी प्रकार का कोई कदम नहीं उठाया गया।


Source: Dainik Bhaskar May 10, 2019 16:07 UTC



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