बेशक, गिरीश कर्नाड की एक प्रतिष्ठा हिन्दी फिल्मों के कलाकार के तौर पर भी रही. लेकिन फिर दोहराना होगा कि गिरीश कर्नाड का असली मोल रंगमंच को उनके योगदान में निहित है. गिरीश कर्नाड का इशारा संभवतः इस ओर रहा हो कि आधुनिक रंगमंच की शिल्पगत जटिलता और उसके फैलाव को देखते हुए टैगोर के नाटक कुछ पीछे छूट जाते हों. ताकत का मोल बढ़ा है, प्रतिशोध का भाव बढ़ा है और दूसरे को दुश्मन मानने की प्रवृत्ति बढ़ी है. हालांकि ख़ुद गिरीश कर्नाड की राय में धर्मवीर भारती का 'अंधा युग' आधुनिक भारतीय रंगमंच की श्रेष्ठतम रचना है, लेकिन गिरीश कर्नाड के अपने नाटक बताते हैं कि किसी रचना की तहें कितनी गहरी हो सकती हैं, उसमें संस्कृति और परम्परा की अनुगूंजें कैसे पिरोई जा सकती हैं और कैसे उनकी मार्फ़त अपने समय को समझा जा सकता है.
Source: NDTV June 10, 2019 10:41 UTC