अन्य देशों के मुकाबले भारत किसी भी वैरिएंट से निपटने के लिए कहीं अधिक सतर्क है फिर भी ओमिक्रोन से मुकाबले के लिए पूरी तैयारी आवश्यक है। कई देशों ने इससे बचाव के लिए ट्रैवल बैन लगाने का फैसला लिया है।सृजन पाल सिंह। कोरोना वायरस का नया वैरिएंट ओमिक्रोन पूरी दुनिया के लिए चिंता का सबब बन गया है। सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में पहचाने गए इस वैरिएंट में कुल 50 म्युटेशन यानी बदलाव हुए हैं। कोरोना वायरस में यह अब तक का सबसे बड़ा म्युटेशन है। इन म्युटेशन में से 30 स्पाइक प्रोटीन में हुए हैं। स्पाइक प्रोटीन असल में मानव शरीर में प्रवेश के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वायरस का हिस्सा होता है। यह चिंता की बात है, क्योंकि अधिकांश वैक्सीन वायरस पर कारगर होने के लिए स्पाइक प्रोटीन को ही लक्ष्य करती हैं। अब यह पता लगाने की दिशा में अध्ययन हो रहे हैं कि क्या ओमिक्रोन वायरस में कुछ हद तक वैक्सीन को धोखा देने की क्षमता है या नहीं? जिला स्तर के अधिकारियों को तहसील स्तर पर सप्लाई और भंडारण व्यवस्था का पता लगा लेना चाहिए। यही मेडिकल आक्सीजन सिलेंडरों और कंसंट्रेटर के लिए किया जाना चाहिए। हमें अभी ही यह मालूम होना चाहिए कि जरूरत के वक्त राहत कहां मिलेगी? तीसरा, विदेश से आने वाले यात्रियों की आवाजाही को पूरी तरह खोलने पर भी भारत को सतर्क रहना होगा। ओमिक्रोन आएगा तो दूसरे देशों से ही आएगा। ऐसे में अगर हम बाहर से आने वालों की सख्त निगरानी करते हैं तो शायद इस वैरिएंट के आने को कुछ समय तक टाल सकते हैं। जितने समय तक हम ओमिक्रोन को टाल सकेंगे, उतना ही बेहतर ढंग से हम उसके व्यवहार को समझने और उसे हराने का तरीका जान पाएंगे।चौथा, भारत को अपने बल पर देखना होगा कि ओमिक्रोन वैरिएंट के खिलाफ वैक्सीन कितनी प्रभावी है? परखना होगा कि कोविशील्ड और स्वदेशी कोवैक्सीन कोरोना के इस नए स्वरूप के खिलाफ कैसा काम करती हैं? अगर यह वैरिएंट हमारे देश में आता है तो हमें वैक्सीन की मांग में बढ़ोतरी के लिए तैयार रहना होगा। यह सुनिश्चित करना होगा कि वैक्सीन का पर्याप्त स्टाक समय से कर लिया जाए।पांचवां और अंतिम उपाय जागरूकता से जुड़ा है। यह एक जन अभियान है। अगर आप नए साल पर विदेश घूमने की योजना बना रहे हैं तो उसे टालने के बारे में सोचिए। अगर आपने अब भी वैक्सीन नहीं ली है, तो अविलंब ले लीजिए। अगर आप अब भी तय नहीं कर पा रहे तो कोविड के खिलाफ अपनी एंटीबाडी की जांच कराएं। शारीरिक दूरी, मास्क पहनने और हाथ धोने जैसे आसान कदमों को अपनाएं। हमें अर्थव्यवस्था या कामकाज को बंद करने की जरूरत नहीं, लेकिन अनावश्यक जोखिम से अवश्य ही बचना होगा। सावधानी ही कोरोना वायरस से सबसे अच्छा बचाव है।दुनिया के तमाम देशों के मुकाबले भारत किसी भी वैरिएंट से निपटने के लिए कहीं अधिक तैयार है। हमारे साथ अब वह स्थिति नहीं रही, जब डेल्टा ने हमें चौंका दिया था। फिर भी हमें लापरवाह नहीं होना है। ओमिक्रोन को पूरी गंभीरता से लेना होगा। हमें याद रखना होगा कि ओमिक्रोन फिर से म्यूटेट हो सकता है। बिल्कुल वैसे जैसा हमने मार्च में डबल म्युटेशन होते देखा था। महामारी कम हुई है, लेकिन खत्म नहीं हुई है और भारत को सतर्क रहना चाहिए। डेल्टा ने हमें जो सबक सिखाए हैं, उन्हें कभी नहीं भूलना है।(लेखक कलाम सेंटर के सीईओ हैं)
Source: Dainik Jagran December 02, 2021 15:44 UTC