खजाने पर दबाव के चलते सरकार घटाएगी खर्च, नई व्‍यय सीमा हुई तय - News Summed Up

खजाने पर दबाव के चलते सरकार घटाएगी खर्च, नई व्‍यय सीमा हुई तय


नई दिल्ली, नितिन प्रधान। रेवेन्यू कलेक्शन की धीमी रफ्तार के बाद खजाने पर बन रहे दबाव ने सरकार को व्यय नीति में बदलाव करने को बाध्य कर दिया है। वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों के लिए चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि में खर्च की नई सीमा तय की है। इसके तहत मंत्रालय चालू वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च, 2020) में बजट अनुमान का केवल 25 परसेंट ही खर्च कर पाएंगे। अभी तक खर्च की सीमा 33 परसेंट थी।वित्त मंत्रालय के बजट डिवीजन की तरफ से जारी एक ऑफिस मेमोरेंडम में खर्च की सीमा के दोबारा निर्धारण का पूरा खाका जारी किया गया है। इसके मुताबिक वित्त वर्ष के आखिरी महीने यानी मार्च 2020 में बजट अनुमान का केवल 10 फीसद ही खर्च किया जा सकेगा। वर्तमान में इसके लिए 15 फीसद की सीमा तय है। इसी तरह जनवरी और फरवरी, 2020 के लिए पुरानी 18 फीसद की सीमा को घटाकर 15 फीसद कर दिया है।मेमोरेंडम में चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि में खर्च बारे में अन्य दिशानिर्देश भी दिए गए हैं। मसलन, यदि खर्च की नई सीमाओं के मुताबिक बजट अनुमान के मुकाबले संशोधित अनुमान तय किया जाता है तो मंत्रालयों को वित्त वर्ष के आखिरी महीने में उस संशोधित अनुमान का ही 10 परसेंट खर्च करना होगा, न कि बजट अनुमानों का। यदि अनुदान के जरिये बचत को पुन: आवंटित किया जाता है तो उसे भी अनुदान की पूरक मांगों के जरिये संसद से पारित कराने के बाद ही खर्च किया जा सकेगा। केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों को नए दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।गौरतलब है कि व्यय संबंधी दिशानिर्देशों में बदलाव इससे पहले साल 2017 में किया गया था। उस वर्ष आखिरी तिमाही के लिए बजट अनुमान का 33 परसेंट और वित्त वर्ष के आखिरी महीने में 15 परसेंट की व्यय सीमा निर्धारित की गई थी।व्यय सीमा में यह बदलाव ऐसे वक्त में किया गया है जब राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष के पहले सात महीने (अप्रैल-अक्टूबर) में ही बजट अनुमानों से ऊपर चला गया है। कंट्रोलर जनरल ऑफ एकाउंट्स (सीजीए) के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में राजकोषीय घाटा 7.20 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह 7.03 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमानों का 102.4 परसेंट है। बजट में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.3 परसेंट पर रखने का लक्ष्य तय किया गया था।दरअसल सरकार को चालू वित्त वर्ष में टैक्स और नॉन-टैक्स, दोनों मोर्चे पर रेवेन्यू के कलेक्शन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष के शुरुआती आठ महीने (अप्रैल से नवंबर) में प्रत्यक्ष कर संग्रह महज 5.56 लाख करोड़ रुपये रहा है। हालांकि, यह पिछले साल की इसी अवधि के 5.47 लाख करोड़ रुपये से कुछ अधिक है। लेकिन 13.35 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले इसकी वृद्धि दर कम है। जहां तक जीएसटी कलेक्शन का प्रश्न है इस अवधि में सरकार को 3.98 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू प्राप्त हुआ है। जबकि पिछले वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर की अवधि में कलेक्शन 5.82 लाख करोड़ रुपये रहा था। चालू वित्त वर्ष के लिए इस मद में 6.63 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया गया है।यहां तक कि नॉन-टैक्स कलेक्शन के मद में विनिवेश के नतीजे बहुत उत्साहजनक नहीं रहे हैं। अभी तक विनिवेश से 17,364.26 करोड़ रुपये ही जुटाए जा सके हैं। चालू वित्त वर्ष के लिए विनिवेश के माध्यम से 1.05 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त वर्ष की शेष अवधि में बीपीसीएल, एयर इंडिया और दो बिजली कंपनियों को एनटीपीसी को बेचने की योजना है। लेकिन बीपीसीएल और एयर इंडिया के विनिवेश पर अभी भी कई सवाल हैं।Posted By: Manish Mishraडाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस


Source: Dainik Jagran December 31, 2019 03:33 UTC



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