लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। चाहे ब्रेकफास्ट हो, लंच, स्नैक्स या फिर कोई डेजर्ट, केले का इस्तेमाल हर जगह होता है। यह विटामिन बी6, विटामिन-सी, मैग्नीशियम और फाइबर का बेहतरीन सोर्स है। इसमें मौजूद पोटैशियम हमारे ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने के साथ हार्ट को हेल्दी रखता है, जबकि फाइबर पाचन को सुधारता है। यहां तक कि केले में 'ट्रिप्टोफैन' नामक एक खास तत्व भी पाया जाता है जो मूड को अच्छा करने और गहरी नींद लाने में मदद करता है।लेकिन, क्या बाजार से लाया गया हर चमकदार पीला केला वाकई फायदेमंद है? जी नहीं, आर्टिफिशियल रूप से फल पकाने के इस दौर में हमारा यह पसंदीदा फल भी केमिकल्स का शिकार हो रहा है। आइए जानते हैं कि आप असली और मिलावटी केले में कैसे अंतर कर सकते हैं।(Image Source: Freepik) कैसे करें केमिकल वाले केले की पहचान? अगर आप बाजार में ऐसा केला देखते हैं जिसका बीच का हिस्सा तो बिल्कुल पीला है, लेकिन उसका ऊपरी सिरा और निचला हिस्सा अभी भी हरा है, तो उसे खरीदने से बचें। यह इस बात का पक्का सबूत है कि उसे केमिकल में डुबोकर पकाया गया है। फलों को रातों-रात पीला करने के लिए व्यापारी अक्सर 'कैल्शियम कार्बाइड' के घोल का इस्तेमाल करते हैं। इसके संपर्क में आते ही केला बीच से तो पीला हो जाता है, लेकिन दोनों सिरे हरे ही रह जाते हैं।कुदरती तौर पर पके केले की निशानी प्राकृतिक रूप से पके हुए केले को पहचानना बेहद आसान है। अगर केले का ऊपरी हिस्सा और उसकी नेक काले रंग की हो गई है, तो इसका मतलब है कि केला बिना किसी छेड़छाड़ के अपने प्राकृतिक समय पर पका है।(Image Source: Freepik) सेहत के लिए क्यों खतरनाक है केमिकल? कैल्शियम कार्बाइड हमारे शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक है। इसके अंश पेट में जाकर जलन, सूजन, पेट दर्द और डायरिया जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। कुछ लोगों को इसे खाने के बाद सिरदर्द, चक्कर या अजीब-सी घबराहट महसूस हो सकती है। इतना ही नहीं, आर्टिफिशियल रूप से फल पकाने की प्रक्रिया के दौरान जो गैसें निकलती हैं, वे गले में खराश और सांस लेने में हल्की तकलीफ का कारण भी बन सकती हैं।FSSAI की सख्ती और 'मसाले' पर बैन भारत के खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खतरनाक 'कैल्शियम कार्बाइड' पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है। इसमें आर्सेनिक और फास्फोरस के जहरीले अंश होते हैं जो इंसानों में कमजोरी और चक्कर जैसी दिक्कतें पैदा करते हैं।
Source: Dainik Jagran April 12, 2026 05:03 UTC