जागरण संवाददाता, बरेली। किसानों का पीला सोना गेहूं पर आंधी-वर्षा आसमानी आफत जैसी रही। तेज हवा से खेतों में बिछकर भीग गई फसल को 10 से 15 प्रतिशत तक का नुकसान बताया जा रहा है। इस बार फसल अच्छी हुई है, किसान जल्दी से जल्दी कटाई और मढ़ाई कराकर उपज को घर लाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बेमौसम बरसात ने खेत-खलिहान तक चल रहे कार्यों को ठप कर दिया है।जिले में बड़े किसान कंबाइन से फसल कटवा रहे थे, जबकि छोटे और मझोले किसान हाथ से गेहूं की कटाई कर मढ़ाई कराने में जुटे हुए थे।फसल अच्छी हुई थी, इसलिए किसानों में खासा उत्साह बना हुआ था, लेकिन पिछले पाच दिनों से बिगड़े मौसम के मिजाज ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। तेज हवा के चलते पकी फसल खेत में बिछ गई है। उसमें पानी भी भर गया है। कुछ किसानों ने खेत में फसल काटकर छोड़ रखी थी, उसमें भी पानी भर गया है, जिससे अनाज खराब होने का खतरा बन गया है।अभी मौसम साफ नहीं है, आगे भी इसी तरह से आंधी-वर्षा होती रही तो ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। इधर, किसान गेहूं की तौल कराने के लिए क्रय केंद्रों पर पहुंचने लगे थे। बरसात में गेहूं में नमी आ चुकी है, इसलिए खरीद का कार्य भी ठप हो गया है।मीरगंज : आंधी-वर्षा के कारण अप्रैल में रात के समय ठंडक का एहसास हो रहा है। बुधवार तड़के से आसमान में बादल छाए रहे। एक ओर तेज हवा के साथ हुई बरसात से लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर खेती का काम ठप हो गया। कई स्थानों पर टेंट के नीचे आयोजित कार्यक्रमों को आंधी के कारण बीच में ही रोकना पड़ा।आयोजकों को कार्यक्रम स्थल और सामान को सुरक्षित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। सड़क पर चल रहे लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में इधर-उधर भागते नजर आए। दोपहिया वाहन चालक और पैदल यात्री खुद को भीगने से बचाने के लिए फ्लाइओवर, दुकानों की छतों और अन्य सुरक्षित स्थानों के नीचे शरण लेते दिखाई दिए। कई जगहों पर बरसात के कारण यातायात की रफ्तार भी धीमी पड़ गई।किसानों की गेहूं व दलहन-तिलहन की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। गेहूं व सरसों फसल इस समय पक चुकी है। कई जगह कटाई-मढ़ाई चल रही है। तेज हवाओं के साथ हुई वर्षा से फसल गिरकर खेतों में बिछ गई है। ऐसे में किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। कुदरत की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
Source: Dainik Jagran April 09, 2026 13:08 UTC