ऑस्ट्रेलिया ने गूगल-फेसबुक पर शिकंजा कसा: भारत भी गूगल-फेसबुक को न्यूज कंटेंट का भुगतान करने के लिए झुका सकता है - News Summed Up

ऑस्ट्रेलिया ने गूगल-फेसबुक पर शिकंजा कसा: भारत भी गूगल-फेसबुक को न्यूज कंटेंट का भुगतान करने के लिए झुका सकता है


Hindi NewsBusinessAustralia Passed Law Against Google And Facebook India Too May Pass Such Law That Will Force Them To Pay For News ContentAds से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐपऑस्ट्रेलिया ने गूगल-फेसबुक पर शिकंजा कसा: भारत भी गूगल-फेसबुक को न्यूज कंटेंट का भुगतान करने के लिए झुका सकता हैनई दिल्ली 5 घंटे पहलेकॉपी लिंकदुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ऑनलाइन मार्केट होने के नाते भारत को पहले ही फेसबुक व गूगल को भारतीय न्यूज कंटेंट के उपयोग से होने वाली कमाई में से हिस्सा बांटने के लिए बाध्य करने के कदम उठाने चाहिए थेऑस्ट्र्रेलिया ने गुरुवार को वह कानून पारित कर दिया, जो गूगल व फेसबुक को न्यूज कंटेंट के लिए भुगतान करने को बाध्य करेगाफ्रांस, जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन में भी गूगल व फेसबुक से न्यूज का भुगतान कराने वाले नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई हैभारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ऑनलाइन मार्केट है। इसलिए इसे पहले ही फेसबुक और गूगल जैसी दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को भारतीय न्यूज कंटेंट के उपयोग से होने वाली कमाई में से हिस्सा बांटने के लिए बाध्य करने के कदम उठाने चाहिए थे। लेकिन यह कदम पहले ऑस्ट्रेलिया ने उठाया।ऑस्ट्र्रेलिया की संसद ने गुरुवार को वह कानून पारित कर दिया, जो गूगल व फेसबुक को न्यूज कंटेंट के लिए भुगतान करने के लिए बाध्य करेगा। कुछ अन्य देशों में भी इस दिशा में कुछ कदम उठाए गए हैं। फ्रांस की अगुआई में यूरोपीय देशों में भी इस दिशा में नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।न्यूज वेबसाइट को 80% एक्सटर्नल ट्रैफिक गूगल और फेसबुक से मिलते हैंसमाचार के इंटरनेट ट्रैफिक पर अभी सिर्फ दो कंपनियों का दबदबा है। टाइम्स ऑफ इंडिया के एक कॉलम में लेखक सौभिक चक्रवर्ती ने लिखा है कि न्यूज वेबसाइट को 80% एक्सटर्नल ट्रैफिक गूगल और फेसबुक से मिलते हैं। साथ ही इन दोनों कंपनियों को मिल रहे ट्रैफिक के लिए समाचार एक बहुत बड़ा स्रोत है। गूगल पर करीब 40% ट्रेंडिंग क्वेरीज समाचार से जुड़े हुए होते हैं।डिजिटल न्यूज की 70-80% एडवर्टाइजिंग कमाई सिर्फ गूगल और फेसबुक डकार जाती हैंइंटरनेट ट्रैफिक पर अपने दबदबे के बल पर न्यूज के डिजिटल उपयोग से होने वाली 70-80% एडवर्टाइजिंग कमाई सिर्फ गूगल और फेसबुक डकार जाती हैं। समाचार का डिजिटल उपयोग बढ़ने से अन्य स्रोतों से प्रकाशकों की कमाई घटती जा रही है। लेकिन विश्वसनीय समाचार पेश करने में प्रकाशकों का खर्च नहीं घट रहा। इसलिए गूगल और फेसबुक के कारण इन प्रकाशकों को भारी नुकसान हो रहा है।गूगल-फेसबुक का दबदबा लोकतंत्र के लिए खतराजिन प्रकाशकों ने दशकों तक कठिन मेहनत करने के बाद एक ब्रांड बनाया है, इन दो टेक्नोलॉजी मोनोपॉली कंपनियों के कारण अचानक उनका कारोबारी मॉडल डंवाडोल हो गया है। ऐसे में यदि समाचार उद्योग बर्बाद होगा, तो विश्वसनीय खबरों के प्रसारण पर भी संकट पैदा हो जाएगा। और आखिरकार लोकतंत्र पर भी संकट आ जाएगा।गूगल-फेसबुक कमाई साझा करेगी, तो समाचार उद्योग में हजारों नौकरियां बचेंगीअब आइए देखते हैं कि यदि गूगल और फेसबुक को अपनी कमाई प्रकाशकों के साथ भी साझा करना पड़े तब क्या होगा। लोकतंत्र के प्रहरी समाचार उद्योग को वित्तीय बल मिलेगा। समाचार उद्योग में हजारों नौकरियां खत्म होने से बच जाएंगी।सरकार की टैक्स कमाई बढ़ेगीगूगल व फेसबुक न्यूज कंटेंट से होने वाली कमाई प्रकाशकों के साथ साझा करेगी, तो सरकार की टैक्स कमाई बढ़ेगी, क्योंकि घरेलू समाचार कंपनियों से टैक्स लेना बहुराष्ट्रीय कंपनियों से टैक्स लेने के मुकाबले ज्यादा आसान है। इसी सोच के आधार पर ऑस्ट्रेलिया ने ग्लोबल टेक कंपनियों को न्यूज कंटेंट से होने वाली कमाई में से हिस्सा साझा करने के लिए बाध्य करने वाले कदम उठाए हैं।ऑस्ट्रेलिया अपने समाचार उद्योग को फाइनेंशियली बलवान बनाना चाहता हैऑस्ट्रेलिया की सरकार चाहती है कि समाचार उद्योग वित्तीय रूप से बलवान हो, क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई लोकतंत्र यह जानता है कि कारोबारी रूप से सक्षम ऑस्ट्रेलियाई समाचार उद्योग उसके लिए जरूरी है। इसी लिए फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन ने भी बड़ी टेक कंपनियों पर नियम बनाने शुरू कर दिए हैं। इसी लिए भारत सरकार को भी निश्चित रूप से कदम उठाने चाहिएं।भारत के लिए टेक कंपनियों को कंटेंट की कमाई साझा करने के लिए बाध्य करना ज्यादा आसानभारत के लिए ऐसा करना अब ज्यादा आसान हो गया है। भारत देख चुका है कि गूगल ऑफ फेसबुक ऑस्ट्रेलिया में प्रकाशकों से सौदे करने लगी हैं। भारत भी यदि इस दिशा में कदम उठाएगा, तो भारत के विशाल बाजार को देखते हुए गूगल और फेसबुक भारतीय बाजार को नजरंदाज नहीं कर पाएगा।भारत का प्रतिस्पर्धा आयोग जांच के साथ इस दिशा में शुरुआत कर सकता हैकई विकल्प हैं। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग इस दिशा में जांच शुरू कर सकता है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय इस दिशा में पहल कर सकता है। मंत्रालय सभी पक्षकारों से 45 दिनों में इस पर राय मांग सकता है। इसके बाद वह मसौदा विधेयक बनाने के लिए एक समय सीमा निश्चित कर सकता है, जैसा कि ऑस्ट्रेलिया ने किया।भारत कंटेंट पर लाइसेंस शुल्क लगा सकता हैसरकार इस दिशा में पैदा होने वाले विभिन्न मसलों को सुलझाने के लिए एक डिजिटल एजेंसी स्थापित कर सकती है। इस एजेंसी में समाचार प्रकाशकों को भी शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा कॉपीराइट एक्ट के जरिये कंटेंट पर लाइसेंस शुल्क लगाया जा सकता है। ऑस्ट्रेलिया ने भी इसी मार्ग को अपनाया है।भारत टेक कंपनियों को नोटिस जारी कर सकता हैइसलिए सरकार काफी कुछ और काफी तेजी से कर सकती है। वैश्विक स्तर पर अब इसके लिए माहौल भी बन चुका है। कई देशों में बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को विश्वसनीय स्वतंत्र पत्रकारिता को नष्ट करने को लेकर नोटिस जारी किया जा चुका है। भारत भी ऐसा नोटिस जारी कर सकता है। एक आत्मनिर्भर भारत को एक आत्मनिर्भर समाचार उद्योग की भी जरूरत है।ऑस्ट्रेलिया में कानून बना, गूगल-फेसबुक को अब समाचारों के ल


Source: Dainik Bhaskar February 25, 2021 07:52 UTC



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