Dainik Bhaskar May 06, 2019, 03:13 PM ISTखेती में कुछ नया कर जाने की चाह के चलते पति को बिना बताए ही प्राकृतिक खेती विधि को अपनायाजसविंद्र कौर को शुरुआत में प्राकृतिक खेती के लिए पति व परिवार के विरोध का करना पड़ा सामनाशिमला. रसायन के प्रयाेग से जमीनें लगातार खराब हाे रही हैं। ऐसे में अब प्राकृतिक खेती काे अपनाने वालाें की संख्या में बढ़ाेतरी हाे रही है। इसी का एक उदाहरण जिला सिरमाैर के छाेटे से गांव काशिपुर की रहने वाली जसविंद्र काैर।खेती में नए-नए प्रयोग करने वाली जसविंद्र कौर को शुरुआत में प्राकृतिक खेती काे अपनाते समय पति और परिवार के विरोध का सामना करना पड़ा लेकिन खेती में कुछ नया कर जाने की चाह के चलते जसविंद्र सिंह ने अपने पति को बिना बताए ही प्राकृतिक खेती विधि को अपनाया और इसमें सफलता पाकर वे अपने पूरे क्षेत्र के लिए एक सफल उदाहरण बनकर उभरी हैं।पति ने कर दिया था इन्कार: जसविंद्र कौर ने शुरू में प्राकृतिक खेती को शुरू किया तो सबसे अधिक पति के गुस्से का सामना करना पड़ा। जसविंद्र कौर ने बताया कि जब उन्होंने खेती में प्रयोग करने के लिए प्राकृतिक खेती विधि में प्रयोग होने वाला जीवामृत बनाया तो उनके पति ने इसे फेंक दिया। इतना ही नहीं उन्हाेंने खेती-बाड़ी में सहयोग न करने की बात भी कही। इन सबके बावजूद जसविंद्र कौर ने प्राकृतिक खेती विधि के माध्यम से खेती शुरू रखा और खेतों में सब्जियों पैदावार को देखकर पति के साथ अन्य घरवालों का मन बदला और उन्होंने जसविंद्र कौर का साथ देना शुरू कर दिया।परिवार के साथ सात बीघा जमीन पर खेती: आज जसविंद्र कौर अपने परिवारवालों के साथ मिलकर 7 बीघा जमीन में खेती कर रहे हैं। अब न केवल पारंपरिक फसलों बल्कि सैलरी और ब्रोकली जैसी नगदी सब्जियों को उगाकर लाखों रुपए कमा रही है, बल्कि जसविंद्र कौर को देखकर गांव के कई किसान भी उनसे प्राकृतिक खेती के गुरू सीख रहे हैं। जिससे अब अन्य लोग भी अपने खेतों में प्राकृतिक खेती विधि से खेती-बाड़ी कर रहे हैं।
Source: Dainik Bhaskar May 06, 2019 09:12 UTC