नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर गुरुवार को रेसीडेंसी कोठी में हुई बैठक में अधिकारियों के रवैये को लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव का गुस्सा जमकर फूटा। उन्होंने एसीएस (अपर मुख्य सचिव) संजय दुबे से यहां तक कह दिया कि अधिकारी सुनते नहीं हैं। मैं ऐसे सिस्टम में काम नहीं कर सकता। आप चाहो तो यह संदेश मुख्यमंत्री तक पहुंचा दो। एसओआर आया नहीं, इसके पहले अधिकारियों ने फाइल स्वीकारना बंद कर दी। अधिकारी संवाद तक नहीं करते।कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल महापौर ने कलेक्टर शिवम वर्मा पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कलेक्टर साहब, मैंने आपको दो दिन पहले मैसेज किया था कि भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के मरीज मिले हैं, आप जाकर देखो, लेकिन आपने कुछ नहीं किया। सोमवार को जब हम अस्पताल पहुंचे जिसके बाद आप सक्रिय हुए। अगर समय रहते संज्ञान ले लिया जाता तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती।कार्यविभाजन और अधिकारियों की कार्यक्षमता पर तंज बैठक के दौरान एक अपर आयुक्त के पास पांच-पांच विभागों का प्रभार होने की बात भी उठी। महापौर ने कहा कि अधिकारियों की वजह से काम प्रभावित हो रहा है। उन्होंने असहजता जताते हुए हाथ खड़े कर दिए और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में काम करना कठिन है। मैं इसके लिए राजनीति में नहीं आया था। यह संदेश मुख्यमंत्री तक पहुंचा दें। एसीएस दुबे ने कहा कि हम इंदौर नगर निगम को कुछ और अधिकारी दे देते हैं, इस पर महापौर ने कहा कि अधिकारियों की कमी नहीं है। जो अधिकारी हैं वे ईमानदारी से काम कर लें तो स्थिति सुधर जाएगी, लेकिन निगमायुक्त ने एक अपर आयुक्त को पांच-पांच विभाग दे रखे हैं जबकि दूसरे अपर आयुक्त फ्री हैं। "बता दें, एक काम के लिए कितनी बार फोन करना पड़ेगा" महापौर ने बार-बार कहा कि ऐसी स्थिति में काम करना मुश्किल है। अधिकारी काम ही नहीं करना चाहते हैं। वे मुझे बता दें कि एक काम के लिए कितनी बार फोन करना पड़ेगा। अगर वे कहेंगे कि सौ बार, तो मैं सौ बार फोन लगाऊंगा, लेकिन 101वीं बार मैं फोन एसीएस दुबे को करूंगा।
Source: Dainik Jagran January 01, 2026 16:54 UTC