एफएटीएफ की काली सूची में पाक को शामिल करने की तैयारी, पेरिस में आज से होगी 5 दिवसीय बैठक - News Summed Up

एफएटीएफ की काली सूची में पाक को शामिल करने की तैयारी, पेरिस में आज से होगी 5 दिवसीय बैठक


एफएटीएफ की काली सूची में पाक को शामिल करने की तैयारी, पेरिस में आज से होगी 5 दिवसीय बैठकनीलू रंजन, नई दिल्ली। आर्थिक मुश्किलों से निकलने की कोशिश में जुटे पाकिस्तान के लिए पुलवामा में आतंकी हमला भारी पड़ सकता है। भारत पुलवामा हमले में पाकिस्तान के हाथ होने के सबूत एफएटीएफ के सामने रखने की तैयारी में जुटा है। सभी एजेंसियों को पाकिस्तान के खिलाफ सबूतों के डोसियर बनाकर विदेश मंत्रालय को देने को कह दिया गया है। रविवार से पांच दिन के लिए पेरिस में एफएटीएफ के सदस्य देशों की बैठक शुरू हो रही है। एमएफएन का दर्जा वापस लेने के बाद अब पाकिस्तान से भारत भेजे जाने वाले सामान पर सीमा शुल्क की 200 फीसद की दर से लगेगा।आतंकी फंडिंग को लेकर पिछले साल एफएटीएफ ने पाकिस्तान को निगरानी सूची में डाला थागौरतलब है कि एफएटीएफ ने पिछले साल पाकिस्तान को निगरानी सूची में शामिल कर दिया था। पाकिस्तान पर भारत समेत तमाम देशों ने आतंकी फंडिंग का आरोप लगाया और इसके सबूत भी पेश किये गए थे कि किस तरह लश्करे तैयबा और जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन वहां खुलेआम चंदा बसूल रहे हैं और बैंकिंग सिस्टम का भी उपयोग कर रहे हैं। जबकि संयुक्त राष्ट्र संघ ने इन आतंकी संगठनों को प्रतिबंधित कर रखा है।पाकिस्तान निगरानी सूची से निकलने के पूरी कोशिश कर रहा है। लेकिन अब पुलवामा हमले और जैश ए मोहम्मद की इसकी जिम्मेदारी लेने के बाद पाकिस्तान के लिए बचना आसान नहीं होगा। भारत एफएटीएफ के सदस्य देशों से सबूतों के साथ पाकिस्तान को काली सूची में डालने के लिए जोर लगाएगा।अंतरराष्ट्रीय जगत की प्रतिष्ठित थिंक टैंक ब्रूकिंग्स के फेलो ध्रुव जयशंकर के अनुसार निगरानी सूची में आने से पाकिस्तान को बड़ा झटका लग चुका है। उसकी मुद्रा में भारी अवमूल्यन हो चुका है, उसकी क्रेडिट रेटिंग घट गई है, शेयर बाजार धराशाई है।अनिश्चितता के माहौल में विदेशी निवेशक आना तो दूर वापस भाग रहे हैं। वर्ष 2014 के बाद से अमेरिका की तरफ से पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद में भारी गिरावट के पीछे भी यही वजह है कि पाकिस्तान की आतंकी भूमिका को लेकर सारे देश सतर्क हुए हैं।हालात यह है कि वर्ष 2014 के बाद भारत की प्रति व्यक्ति आय जहां दोगुनी हो चुकी है वही पाकिस्तान की आय में महज 50 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। भले ही आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के रवैये पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा है लेकिन भारत की तरफ से लगातार दबाव का असर उसके आर्थिक हालात पर जरूर दिखाई देता है।इसके अलावा जब अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा खत्म होगा तो इससे चीन की तरफ से पाकिस्तान में होने वाले निवेश पर भी असर पड़ेगा। निवेश प्रभावित होने की वजह से चीन पाकिस्तान पर अपनी शर्तो के हिसाब से निवेश के लिए दबाव बढ़ा सकता है।एमएफएन दर्जा हटने से भारत को पाकिस्तानी निर्यात पर लगेगा 200 फीसदी का सीमा शुल्कपाकिस्तान पहले ही चीन के कर्ज के जाल में फंसा हुआ है। यहां तक कि उसके पास कर्ज का ब्याज लौटाने के लिए भी विदेशी मुद्रा नहीं है। आइएमएफ आर्थिक संकट से निकालने के लिए कड़ी शर्त लगा रहा है। भारत भी एमएफएन का दर्जा वापस ले चुका है और इससे पाकिस्तान से भारत को होने वाले निर्यात पर 200 फीसदी का सीमा शुल्क बढ़ जाएगा। जाहिर है पाकिस्तान का निर्यात और भी सिकुड़ जाएगा, जो उसके विदेशी मुद्रा भंडार के लिए और मारक साबित होगा।Posted By: Bhupendra Singh


Source: Dainik Jagran February 16, 2019 16:07 UTC



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