एजुकेशन / 4 साल में गांधी विषय से स्नातक करने वाले 32% बढ़े, एमफिल में 19% घटे - News Summed Up

एजुकेशन / 4 साल में गांधी विषय से स्नातक करने वाले 32% बढ़े, एमफिल में 19% घटे


भास्कर ने जाना कि गांधीजी के विचारों और इससे संबंधित विषयों को पढ़ने के ट्रेंड में क्या बदलाव आयाकिसी भी विश्वविद्यालय में महात्मा गांधी के नाम से विशेष पद नहीं, पढ़िए भास्कर की रिपोर्टDainik Bhaskar Sep 29, 2019, 11:54 AM ISTनई दिल्ली (अमित कुमार निरंजन). 2 अक्टूबर को गांधीजी की 150वीं जयंती मनाई जाएगी। ऐसे में भास्कर ने जाना कि गांधीजी के विचारों और इससे संबंधित विषयों को पढ़ने के ट्रेंड में पिछले कुछ सालों मेंं क्या बदलाव आया है। यूजीसी के दस्तावेजों के अनुसार पिछले चार साल में अंडर ग्रेजुएट कोर्स में तो गांधी विषयों में स्नातक करने वाले 32% बढ़े हैं, लेकिन एमफिल करने वाले 19% घटे हैं।पोस्ट ग्रेजुएशन करने वालों की संख्या में भी करीब 6.5% की गिरावट आई है। दूसरी तरफ अभी देश के किसी भी विश्वविद्यालय में गांधीजी के नाम की चेयर (प्रोफेसर के बराबर का पद) नहीं है। पत्रकार कृतिका शर्मा की आरटीआई के मुताबिक यूजीसी ने गांधीजी के नाम की चेयर बनाने के लिए विश्ववि‌‌द्यालयों को कहा था लेकिन किसी भी विवि ने यह चेयर स्थापित नहीं की है।भास्कर से इस बात की पुष्टि स्वयं यूजीसी सेक्रेट्ररी रजनीश जैन ने भी की है। जबकि राजीव गांधी, अबुल कलाम आजाद, स्वामी विवेकानंद जैसे छह हस्तियों के नाम से चेयर स्थापित हुई हैं। गांधी रिसर्च का बड़ा रिफ्रेंस सेंटर माना जाने वाले दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान के चेयरमैन कुमार प्रशांत ने बताया कि गांधी आधारित िलखने-पढ़ने के ट्रेंड में बदलाव आया है। इसे तीन तरीके से बांट सकते हैं।21वीं सदी के पहले 60 साल की उम्र के लोग गांधी पर शोध, किताब लिखने के लिए आते थे जो बेहद गंभीर विषयाें पर ही लिखते थे। इसके बाद 21 वीं सदी से लेकर 2014 तक लोग संस्थागत रिसर्च पर ज्यादा जोर देने लगे। अब 30 साल की उम्र तक के लोग गांधी पर लिखते-पढ़ते हैं। जो प्रैक्टिकल विषयों का चुनाव करते हैं। हमारे यहां से गांधी मार्ग पत्रिका हर दो माह में निकलती है। इसके सबसे ज्यादा सब्सक्रिप्शन अब हुए हैं।वर्धा में महात्मा गांधी अंतराष्ट्रीय हिन्दी विवि के प्रोफेसर कृपा शंकर ने बताया कि पहले तक लोग गांधी के लिखे पर शोध करते थे लेकिन अब गांधी के कहे पर शोध कर रहे हैं। पहले लोग गांधी के समाज और राजनीति के विचारों पर रिसर्च करते थे अब लोग प्रैक्टिल विषयों पर रिसर्च करते हैं। मॉबलििचंग, जनसंपर्क, रोजगार, परिवार जैसे आयामों पर गांधी पर रिसर्च कर रहे हैं।विभिन्न डिग्रियों में गांधी आधारित प्रोग्राम के लिए जिन्होंने रजिस्ट्रेशन करवाया


Source: Dainik Bhaskar September 28, 2019 18:53 UTC



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