वाशिंगटन, प्रेट्र । अमेरिका के श्रम मंत्री एलेक्जेंडर एकोस्टा ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन एच-1बी वीजा आवेदन शुल्क में बढ़ोतरी की तैयारी में है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस शुल्क वृद्धि से अमेरिकी युवकों को प्रौद्योगिकी कार्यो का प्रशिक्षण देने के लिए चल रहे कार्यक्रम को विस्तार दिया जाएगा।एच-1बी वीजा भारतीय आइटी पेशेवरों में काफी लोकप्रिय है। फीस बढ़ने से भारतीय आइटी कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। श्रम विभाग के सालाना बजट को लेकर संसदीय समिति के समक्ष पेश हुए एकोस्टा ने हालांकि यह ब्योरा नहीं दिया कि वीजा फीस में कितनी बढ़ोतरी होगी और किन श्रेणियों में होगी। लेकिन अतीत के अनुभवों से स्पष्ट है कि भारतीय आइटी कंपनियों को वित्तीय बोझ का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि इन कंपनियों की ओर से वीजा के लिए बड़ी संख्या में आवेदन किए जाते हैं।एकोस्टा ने अपनी दलील में कहा कि नौकरी पाने की प्रतिस्पर्धा में विदेशी पेशेवर अमेरिकियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसलिए ट्रंप प्रशासन एच-1बी वीजा कार्यक्रम पर नकेल कस रहा है।अभी क्या है फीसएच-1बी वीजा आवेदन फीस के तौर पर 460 डॉलर (करीब 32 हजार रुपये) लिए जाते हैं। इसके अलावा कंपनियों को धोखाधड़ी रोकथाम और जांच शुल्क के नाम पर 500 डॉलर (करीब 35 हजार रुपये) का भुगतान भी करना पड़ता है। प्रीमियम श्रेणी में 1410 डॉलर (करीब 98 हजार रुपये) का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है।हर चार में एक वीजा आवेदन खारिजअमेरिका के सिएटल टाइम्स अखबार ने अपनी एक खबर में बताया कि पिछले साल आव्रजन अधिकारियों ने कुशल विदेशी पेशेवरों के लिए नए वीजा के हर चार में से एक आवेदन को खारिज कर दिया था।क्या है एच-1बी वीजाएच-1बी वीजा के जरिये अमेरिकी कंपनियों को उन क्षेत्रों में अत्यंत कुशल विदेशी पेशेवरों को नौकरी पर रखने की अनुमति मिलती है जिनमें अमेरिकी पेशेवरों की कमी है। यह वीजा तीन साल के लिए जारी होता है और छह साल तक इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद इस पर लगाम कसी जा रही है।आम श्रेणी में 65 हजार वीजाअमेरिकी संसद से यूएससीआइएस को आम श्रेणी में 65 हजार एच-1बी वीजा जारी करने की मंजूरी मिली है। इसके अतिरिक्त 20 हजार एच-1बी वीजा उन लोगों को दिए जाते हैं जिन्होंने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनिय¨रग के क्षेत्र में अमेरिका के उच्च शिक्षण संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है।वीजा उल्लंघन पर छात्रों को प्रत्यर्पित करने के आदेश पर रोकवहीं वीजा उल्लंघन मामले में ट्रंप प्रशासन को कोर्ट से झटका लगा है। उत्तरी कैरोलिना के विंस्टन सलेम शहर की अदालत ने बीते शुक्रवार को ट्रंप प्रशासन के उस प्रावधान पर रोक लगाने का आदेश जारी किया जिसमें वीजा नियमों का पालन करने में अनजाने में गलती करने पर भी छात्रों को स्वदेश भेजने की प्रक्रिया को आसान किया गया था।इसके अलावा ऐसे छात्रों के अमेरिका वापस आने पर दस साल की रोक लगाने के लिए नियमों में बदलाव भी किया गया था। कोर्ट का यह फैसला दो चीनी छात्रों, अमेरिकी फेडरेशन ऑफ टीचर्स और कुछ कॉलेजों की ओर से दायर मुकदमे पर आया है। आव्रजन मामलों के विशेषज्ञ डांग रेंड ने कहा कि यह विदेशी छात्रों के लिए सकारात्मक फैसला है। इन छात्रों में बड़ी संख्या भारतीय की भी है।लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एपPosted By: Sanjeev Tiwari
Source: Dainik Jagran May 07, 2019 10:35 UTC