एकलव्य की इस बात को जान लेंगे तो कभी नहीं होगा कोविड-19 का संक्रमण, बचने का उपाय - News Summed Up

एकलव्य की इस बात को जान लेंगे तो कभी नहीं होगा कोविड-19 का संक्रमण, बचने का उपाय


महेश भारद्वाजजीवन में किसी न किसी प्रकार के मार्गदर्शन की आवश्यकता लगभग हर किसी को रहती है। सैद्धांतिक तौर पर जीवन की इस हकीकत से कोई इनकार नहीं कर सकता, पर किसे कितने मार्गदर्शन की जरूरत है यह व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करता है। मसलन किसी को जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में हर समय ही मार्गदर्शन की जरूरत पड़ती है जबकि किसी के जीवन की गाड़ी मार्गदर्शन के इशारे भर से दौड़ पड़ती है। किसी को हाथ पकड़कर सिखाने की जरूरत होती है तो कोई देखकर ही सीख लेता है।पांडवों ने वन-वन भटकते हुए स्थापित किए ये शिवलिंग, दर्शन से मिलता है महापुण्यमहाभारत के एकलव्य प्रसंग को सभी जानते ही हैं। इसे आज के समय में फैल रही महामारी की परिस्थितियों से जोड़कर देख सकते हैं। कुछ लोगों को कानून का डर दिखाकर पुलिस की मदद से संक्रमण से बचाने के प्रयासों की दरकार है, तो बहुत सारे ऐसे भी लोग हैं जो दूर से ही यह सब होता देखकर सीख ले रहे हैं। कोई पुलिस और जुर्माने से डरकर मास्क पहन रहा है, तो कोई मास्क न पहनने के कारण संक्रमित हुए लोगों को देखकर मास्क पहन रहा है। लॉकडाउन में भी यही हुआ। किसी ने पुलिस की सख्ती देखकर घर से बाहर निकलना बंद किया, तो किसी ने सोशल मीडिया पर पुलिस के एक्शन को देखकर समझ लिया। जिन लोगों को कानून की सख्ती की जरूरत ही नहीं पड़ी और जिन्होंने इसकी गंभीरता को भांपकर लॉकडाउन का सम्मान किया, उनकी तादाद ज्यादा बड़ी है।घर, समाज और कारोबार में ऐसे बहुत लोग मिल जाएंगे, जिन्हें कदम-कदम पर सहायता या मार्गदर्शन चाहिए होता है। ये छोटी सी भी परेशानी या रुकावट की स्थिति में सहारे के लिए इधर-उधर देखने लगते हैं। सीखने के लिए सलाह या मार्गदर्शन लेना कोई खराब बात नहीं, लेकिन यहां समझने वाली बात यह है कि सीखने के बाद सीखे हुए के बारे में सलाह मांगने से बचना चाहिए। मार्गदर्शन के मामले में आत्मनिर्भर बनने के लिए यह जरूरी है और इसके फायदे ही फायदे हैं। इसके लिए व्यक्ति को स्वयं आगे बढ़कर नई-नई चीजें सीखने की कोशिश करनी होती है, न कि अटकते ही गुहार लगाने की। उचित तो यही है कि असफलता या बीमारी के शुरू होते ही व्यक्ति स्वयं उसके कारणों और उपायों की खोजबीन की कोशिश करे। सोचिए, किसी कार्य की असफलता या किसी बीमारी के कारणों को आपसे बेहतर कौन जान सकता है, बशर्ते कि आपने ठीक से ध्यान लगाकर उन्हें जानने की कोशिश की हो। बीमारी की स्थिति में डॉक्टर भी तो ज्यादातर जानकारी आपसे पूछ-पूछकर ही जुटाते हैं। कोविड-19 के ज्यादतर लक्षणों और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की जानकारी भी तो आप से ही निकाली जा रही हैं।गणेशजी की पूजा में दूर्वा का महत्व, इनके बिना पूजा नहीं होती पूरीपढ़ाई में असफल रहने के कारणों और बहुत हद तक, उसके उपायों के बारे में उस विद्यार्थी से अच्छा भला कौन जानता है! इस सबका मतलब यह कदापि नहीं निकालना चाहिए कि बीमारी में डॉक्टर, पढ़ाई में शिक्षक और आध्यात्मिकता में गुरु के मार्गदर्शन की आवश्यकता ही नहीं है। इनकी पूरी-पूरी आवश्यकता है, कारण जानने में भी और समाधान में भी। बस जरूरत है मार्गदर्शन पाने भर की। मार्गदर्शन को बैसाखी न बनाएं। आपके अपने पैरों पर बिना किसी सहारे के खड़े होने को ही आत्मनिर्भरता कहते हैं। आत्मनिर्भरता के मापदंड मार्गदर्शक के लिए भी उतने ही प्रासंगिक हैं।


Source: Navbharat Times August 20, 2020 03:22 UTC



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