अंबिया प्रकृति की गोद में बसा एक शांत, सरल और सुरम्य गांव था।- तरूषी श्रीवास्तवआम, जामुन और महुए के पेड़ों से घिरा यह छोटा-सा गांव अपनी हरियाली, सादगी और आत्मीयता के लिए जाना जाता था। चारों ओर फैले खेतों में जब गेहूं की बालियां लहलहातीं, तो लगता मानो धरती मां ने अपने आंचल में सुनहरी धूप समेट ली हो। हवा में मिट्टी की सौंधी ख़ुशबू और पक्षियों की चहचहाहट गांव के जीवन को हर सुबह नया अर्थ दे देती थी।यहां के लोग भी इसी मिट्टी की तरह सच्चे और निश्छल थे। सुख हो या दुख, पूरा गांव एक परिवार की तरह साथ खड़ा हो जाता। सुबह मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि, गोशालाओं में बजतीं गायों की घंटियां और चौपाल से उठती हंसी, इन सबने गांव को जीवंत बनाए रखा था। गलियां कच्ची थीं, पर रिश्तों की डोर पक्की और भरोसे से बुनी हुई।
Source: Dainik Bhaskar April 01, 2026 05:36 UTC