घरेलू उद्यमियों के लिए बदली गई शर्तें केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा वर्ष 2020 की उपलब्धियां दिखाने के लिए तैयार एक डॉक्यूमेंट के अनुसार घरेलू उद्यमी, खास कर छोटे, लघु और मंझोले उद्यमों (MSME) को बढ़ावा देने के लिए सरकारी खरीद के टेंडर की शर्तों में बड़े पैमाने पर बदलाव किया गया। ऐसा इसलिए, ताकि मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिल सके। सरकारी खरीद में विदेशी कंपनियों के बजाय देशी कंपनियों को तरजीह मिले। मंत्रालय के मुताबिक सरकारी खरीद वाले टेंडर में जिनकी शर्तों में बदलाव संभव था, उसे रद्द ही कर दिया गया।40,000 करोड़ रुपये का आर्डर देशी कंपनियों को वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक ‘मेक इन इंडिया’(Make in India) को बढ़ावा देने के लिए रद्द किए गए या शर्त बदले गए ऐसे टेंडरों को जोड़ा जाए तो सिर्फ इस साल यह 40,000 करोड़ रुपये का बैठता है। इनमें प्रावधान किया गया कि सरकारी खरीद में देशी सप्लायरों को प्राथमिकता दी ही जाएगी। यदि किसी सामान की आपूर्ति में देशी कंपनियां सक्षम नहीं हैं तो ही उसमें विदेशी कंपनियों को अनुमति मिलेगी। लेकिन, तब भी उस सप्लाई में लोकल कंटेंट 50 फीसदी से ज्यादा होगा। जिन सामानों में देशी कंपनियां आपूर्ति में सक्षम थीं, उनमें तो ग्लोबल टेंडर ही रद्द कर दिया गया।जेम पर अधिक से अधिक सामान लघु उद्यमियों के सरकारी खरीद की पहले कोई एकल खिड़की की पुख्ता व्यवस्था नहीं थी। इसलिए इसके लिए केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस या जेम (GeM) को मजबूत किया है। इस प्लेटफार्म पर देशी उद्यम, खास कर एमएसएमई को बढ़ावा मिले, इसके लिए विशेष उपाय किए गए। इसमें एमएसएसई लिस्टिंग के लिए न सिर्फ विशेष व्यवस्था की गई बल्कि जो लघु उद्यमी अपने सामानों के ई कैटलॉग आदि नहीं बना सकते थे, उन्हें भी अधिकारियों ने मदद पहुंचाई और उन्हें इस प्लेटफार्म पर लिस्टिंग में मदद किया। तेजी से पब्लिक प्रोक्युरमेंट हो सके, इसके लिए सरकार ने प्रक्रिया में भी बदलाव किया।
Source: Navbharat Times December 26, 2020 03:00 UTC