Dainik Bhaskar Jun 11, 2019, 01:06 PM IST2011 के वर्ल्ड कप के बाद युवी को कैंसर का पता चला था, उनका इलाज कुछ दिन भारत और कुछ दिन अमेरिका में हुआ थायुवराज का इलाज करने वाले डॉ. नितेश रोहतगी ने बताया- वे तकलीफ में थे लेकिन कभी रोए नहींनई दिल्ली. क्रिकेट वर्ल्ड कप 2011 की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले युवराज सिंह ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। इस वर्ल्ड कप में युवी ने 362 रन बनाए और 15 विकेट लिए। इसके लिए उन्हें मैन ऑफ द सीरीज भी चुना गया था। इसी वर्ल्ड कप के बाद युवराज को कैंसर के बारे में पता चला। उन्हें 'मीडियास्टिनल सेमिनोमा' नाम का दुर्लभ कैंसर हुआ था। दिल्ली के मैक्स केयर सेंटर के डॉक्टर नितेश रोहतगी ने युवराज को कैंसर से लड़ने में मदद की। दैनिक भास्कर प्लस ऐप ने डॉ. नितेश से बात की और जाना कि किस तरह युवराज ने कैंसर से लड़ाई लड़ी।‘उनका टारगेट था- कैंसर को हराकर वापसी करना’डॉ. रोहतगी बताते हैं कि जब मुझे पता चला कि युवराज को इस तरह का कैंसर है, तो मुझे नहीं लगा था कि वे इसके बाद क्रिकेट में वापसी कर पाएंगे। लेकिन उनसे पहली मुलाकात ने ही मेरी आशंका को खत्म कर दिया। पहली मुलाकात में वे बेहद सामान्य होकर अपने कैंसर के बारे में चीजें पूछ रहे थे। उनके चेहरे पर न कोई शिकन थी, न कोई घबराहट और न ही किसी तरह की चिंता। हमारी पहली मीटिंग 2 से 3 घंटे चली थी। इस मीटिंग में वे इस डिटरमिनेशन (दृढ़ संकल्प) के साथ बैठे थे कि उन्हें जल्द से जल्द क्रिकेट के मैदान में वापसी करना है। यही देखकर मुझे लग गया था कि वे बहुत जल्द क्रिकेट में वापसी करेंगे। जैसे अर्जुन का निशाना मछली की आंख था, ठीक वैसे ही उनका टारगेट कैंसर को हराकर क्रिकेट में वापसी करना था।‘दोस्ताना स्वभाव ने कैंसर से लड़ने में मदद की’डॉ.
Source: Dainik Bhaskar June 11, 2019 02:15 UTC