आस्ट्रेलियाई भेड़ों से देश में होगा उम्दा ऊन का उत्पादन, भारत अपनी जरुरतें इसी ऊन से पूरी करता हैजागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश के टेक्सटाइल उद्योग की उम्दा किस्म के ऊन की ज्यादातर जरूरतों को आयात से पूरा किया जाता है, लेकिन अब जल्दी ही फाइन ऊन का उत्पादन देश में होने लगेगा। आस्ट्रेलिया और भारत के बीच हुए एक समझौते के बाद अब उत्तराखंड में एक प्रायोगिक परियोजना शुरु की जा रही है। इसके तहत उत्तराखंड में आस्ट्रेलिया की उन्नत प्रजाति की भेड़ पाली जाएंगी।समझौते के मुताबिक सितंबर के आखिर अथवा अक्तूबर के पहले सप्ताह में इन भेड़ों की पहली खेप उत्तराखंड पहुंच जाएंगी। आस्ट्रेलिया और भारतीय कृषि व पशुपालन विभाग के बीच पशु चिकित्सा को लेकर कई समझौते किये गये हैं। इन्हीं समझौतों में भारत में आस्ट्रेलिया की उन्नत प्रजाति की भेड़ों को पालन करना भी शामिल है। भारत में आस्ट्रेलिया भेड़ों का प्रजनन किया जाएगा।पशुधन व डेयरी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत में नेशनल लाइव स्टॉक मिशन के तहत ऊन विकास कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसमें आस्ट्रेलिया भेड़ों से अत्यधिक प्रजनन कराने की योजना है। इसकी पहली खेप सितंबर-अक्तूबर 2019 में भारत पहुंच जाएगी। यह पायलट प्रोजेक्ट उत्तराखंड स्टेट वूल डवलपमेंट बोर्ड में चलाया जाएगा। राज्य भेड़ नस्ल सुधार की दिशा में उल्लेखनीय कार्य पहले से ही कर रहा है।भारत में आस्ट्रेलिया के उच्चायोग में आयोजित एक समारोह में उच्चायुक्त सुश्री हरिंदर सिद्धू ने भारत के पशुधन व डेयरी विभाग के आला अफसरों के साथ इस आशय का समझौता किया गया।सिद्धू ने कहा कि भारत और आस्ट्रेलिया दोनों देशों की अर्थव्यवस्था में पशुधन व कृषि की भूमिका अहम होती है। उन्होंने कहा कि भारत और आस्ट्रेलिया के बीच कई मसलों पर मतभेद हैं, लेकिन ज्यादातर मोर्चो पर समानता है। इनमें हमे द्विपक्षीय समझौते कर आगे बढ़ने की जरूरत है।दोनों देशों के बीच के पुराने संबंधों का याद करते हुए सिद्धू ने कहा कि ऊन और गेहूं जैसी जिंसों पर व्यापार पांच दशक पहले से चल रहा है, जिसे और आगे बढ़ाने की जरूरत है। भारत के टेक्सटाइल उद्योग के लिए फाइन ऊन की बहुत जरूरत है।भारत अपनी जरुरतें आस्ट्रेलियाई ऊन से पूरी करता है। हालांकि भारत में ऊन का उत्पादन बढ़ रहा है, लेकिन उसे गति देने के लिए उन्नति प्रजाति की भेड़ की जरूरत है। इस दिशा में आस्ट्रेलिया बड़ा मददगार साबित हो सकता है।Posted By: Bhupendra Singh
Source: Dainik Jagran July 17, 2019 18:00 UTC