डिफ्रेंट एंगल • एआई की सूचनाएं कितनी प्रामाणिक ? - मार्क फडौल एआई फोरेंसिक्स के डायरेक्टर और एल्गोरिदम्स के एक्सपर्टएल्गोरिदम कभी तटस्थ नहीं होते। इसके बावजूद विगत एक दशक से अधिक समय से हमने बिग-टेक को इन्हें हमारे सूचना इको-सिस्टम के द्वारपाल के रूप में तैनात करने की अनुमति दे दी है और वह भी बिना पारदर्शिता या जवाबदेही की मांग किए।इसके परिणाम ध्रुवीकरण और सनसनीखेज कंटेंट के प्रसार से लेकर पर्सनलाइल्ड-विज्ञापनों में, एकाधिकारवादी व्यवहार को बढ़ावा देने और सार्वजनिक विमर्श पर ऐसे प्रभावों तक रहे हैं, जो लोकतांत्रिक विचार-विमर्श के प्रतिकूल हैं।अतीत में हम यह सबक सीख चुके हैं कि जब सूचना के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को बिना किसी निगरानी के कॉर्पोरेट हितों के हवाले कर दिया जाता है तो क्या होता है। फिर भी हम एआई चैटबॉट्स के साथ वही गलती दोहरा रहे हैं। ये चैटबॉट्स केवल मौजूदा इंफॉर्मेशन का संकलन ही नहीं करते; वे उन्हें जनरेट भी करते हैं और उनका स्वरूप भी तय करते हैं। फेसबुक और गूगल यह निर्णय लेते थे कि आपको कौन-सी खबरें और कौन-से लेख दिखाए जाएं, जबकि चैटजीपीटी, क्लॉड और जेमिनाई जैसे एआई-टूल्स उसी इंफॉर्मेशन का सार आपके सामने इस तरह से प्रस्तुत करते हों, मानो वह कोई अधिकृत-सूचना हो !
Source: Dainik Bhaskar April 04, 2026 05:26 UTC