रायपुर में आयोजित नेशनल ट्राइबल फेस्ट में आए कश्मीरी कलाकारों और स्टूडेंट्स ने साझा किए अपने अनुभवकलाकारों ने मंच पर दिखाई जम्मू काश्मीर की जनजातियों की संस्कृति, डांस के जरिए बयां कियाDainik Bhaskar Dec 29, 2019, 07:28 PM ISTरायपुर (सुमन पांडेय). छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चल रहे नेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल में कश्मीर से भी कलकारों और स्टूडेंट्स का ग्रुप पहुंचा। इन कलाकारों ने छत्तीसगढ़ को लेकर उनकी धारणा और जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात पर अपनी राय साझा की। समूह की वाहिदा अख्तर ने बताया कि जब हम इस फेस्टिवल में शामिल होने के लिए रवाना हो रहे थे तब हमें छत्तीसगढ़ के बारे में बहुत सी बातें सुनने को मिली। हमसे कहा गया कि छत्तीसगढ़ में नक्सली हैं, वो लोगों को मार देते हैं। हमें भी यह सब सुनकर डर लगा। मगर जब हमने यहां आकर देखा तो ऐसा कुछ भी नही है, यहां हमें लोगों का बहुत प्यार मिला। हम चाहते हैं कि कश्मीर में भी ऐसे प्रोग्राम हों, हम छत्तीसगढ़ में मिला प्यार, कर्ज के तौर पर लेकर लौट रहे हैं।इंटरनेट सेवा बंद होने से स्टूडेंट्स हैं परेशानवाहिदा ने बताया कि कश्मीर में इंटरनेट सेवा पिछले कई महीनों से बंद है। इससे हमें देश और दुनिया के बारे में कुछ पता नहीं चलता। टेलीविजन भी देखना मुमकिन नहीं हो पा रहा। अगले महीने से एग्जाम होंगे, ऐसे में बहुत से विषयों की जानकारी हमें नेट से मिल जाया करती थी, वह भी न होने से स्टूडेंट्स को दिक्कत होती है। सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द यहां के हालात ठीक करे।बॉर्डर एरिया में रहने वालों को नहीं मिलता उनका हकवाहिदा ने बताया कि मोदी जी कहते हैं कि कश्मीर के घर-घर में सुविधाएं पहुंच रही हैं, शौचालय बन रहे हैं। मगर ऐसा कुछ भी नहीं है। हमने गांवों के हालात देखे हैं, आज भी लोग फैसेलिटीज को तरस रहे हैं। वहां ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन्हें पता तक नहीं कि उनके लिए सरकार की क्या योजनाएं हैं, कैसे वो उनका फायदा ले सकते हैं। बॉर्डर एरिया में रहने वाले बहुत से लोगों के मवेशी मर जाते हैं, फायरिंग ज्यादा होने की वजह से आम लोगों की जानें जा चुके हैं। किसी की टांग नहीं है, तो किसी का हाथ नहीं है, इतना सब सहने वाले गरीबों को आज भी उनका सही हक नहीं मिल पाया है।आतंकी डरते हैं इस समुदाय सेकार्यक्रम में प्रस्तुति देने आए सभी कलाकार गुज्जर समुदाय से थे, सभी ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को यहां नृत्य के जरिए पेश किया। वाहिहा की टीम में कार्यक्रम में बकरवाली डांस पेश किया। इसमें पूंछ के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले इन समुदायों के त्योहार और शादी ब्याह की झलक देखने को मिली। घूम-घूम कर भेड़ों, बकरियों, घोडों का कारोबार करने वाले इस समुदाय से आतंकी भी डरते हैं। वजह ये है कि कश्मीर के युद्ध मोर्चों पर कई बार घुसपैठ की जानकारी गुज्जर और बकरवाल समुदाय के लोगों ने ही सेना को दी थी, इसके कई ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं। करगिल युद्ध के समय भी सीमापार से हुई घुसपैठ की जानकारी देने वाले इसी समुदाय के लोग थे।
Source: Dainik Bhaskar December 29, 2019 12:45 UTC