लेकिन दोनों दलों के नेता मानते हैं कि सब कुछ सामान्य नहीं है जिसके कारण कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति है. लेकिन दोनों दलों में कुछ बातों को लेकर अब किसी को संशय नहीं है लेकिन इस विवाद के जड़ में क्या हैं उसको लेकर अभी माथापच्ची हो रही है. हालांकि ये प्रशांत किशोर के लिए उपलब्धि की बात हो सकती हैं कि बंगाल में कुछ महीने के काम के बाद बीजेपी को उसका असर दिखने लगा है. इसके अलावा बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व को झारखंड में नीतीश कुमार की अगुवाई में वहां के मुख्यमंत्री रघुबर दास के ख़िलाफ़ भाषणबाज़ी भी पसंद नहीं आयी. ऐसे में बीजेपी हर छोटे मुद्दों को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर सरकार में रहने के बावजूद मुख्यमंत्री को घेरने की कोशिश करेगी.
Source: NDTV October 10, 2019 08:36 UTC