अरावली पहाड़ियां केवल पत्थरों का ढेर नहीं, ऐसे प्राकृतिक ढांचों को नष्ट किया गया तो खामियाजा आने वाली पीढ़ियां भुगतेंगी: मोहन भागवत - News Summed Up

अरावली पहाड़ियां केवल पत्थरों का ढेर नहीं, ऐसे प्राकृतिक ढांचों को नष्ट किया गया तो खामियाजा आने वाली पीढ़ियां भुगतेंगी: मोहन भागवत


नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS)के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि सभी अपने मन से अलगाव और भेदभाव हटाएं। जो भी हिंदू है वो एक है। सभी मंदिर, जलस्त्रोत और श्मशान गृह सभी के लिए खुले रहें। किसी का मूल्यांकन उसकी जाति, संपत्ति या भाषा से न करें।सामाजिक समरसता हमारी मजबूती बने। हमें एक दूसरों के घर आना-जाना चाहिए। हमें संकटों पर चर्चा को विस्तार देने की बजाए उनके उपायों पर काम करना चाहिए। सक्षम होकर केवल विचारों को आगे बढ़ाने की जगह कुछ करते हुए राह बनानी चाहिए। भागवत ने अरावली पर्वतमाला का उदाहरण देते हुए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की जरूरत पर जोर दिया।सोनपैरी गांव में हिंदू सम्मेलन को किया संबोधित भागवत रायपुर से 20 किलोमीटर दूर सोनपैरी गांव में बुधवार को आयोजित हिंदू सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश का मौजूदा विषय हो या परिवार की नई पीढ़ी से जुड़ी समस्या, सभी तरह के संकट केवल चर्चा से नहीं हल होंगे। उनके उपायों पर सामूहिक कार्य जरूरी है। भागवत ने कहा कि अभी केवल हिंदू धर्म में ही ऐसे संत हैं, जिन्होंने ईश्वर को प्रत्यक्ष रूप से देखा है। उनके बताए मार्ग पर चलने से पाप धुल जाते हैं। लगभग आधे घंटे तक चले उद्बोधन में सरसंघचालक भागवत ने पांच ऐसे कार्य बताए जिनके सहारे परिवार, समाज, देश और विश्व के कल्याण का रास्ता खुल सकता है।


Source: Dainik Jagran January 01, 2026 13:51 UTC



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