Dainik Bhaskar May 16, 2019, 01:22 PM ISTसस्ते के नाम पर थके, टूटे और हारे विदेशियों की भीड़ अमेरिका में जमा नहीं करना चाहते ट्रम्पराष्ट्रपति ने कहा- अमेरिका आने वाला अप्रवासी अंग्रेजी बोलने में दक्ष और अपने विषय में माहिर होवॉशिंगटन. राष्ट्रपति बनने के बाद से ही डोनाल्ड ट्रम्प अपनी इमीग्रेशन पॉलिसी को लेकर सुर्खियों में हैं। उनकी पिछली नीतियों से लगता है कि वे अप्रवासियों को अमेरिका से बाहर निकालना चाहते हैं, लेकिन ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका में आने का मौका सिर्फ उन लोगों को मिलना चाहिए जो अंग्रेजी बोलने में दक्ष होने के साथ-साथ अपने विषय के माहिर हों। उनके पास एक अच्छी नौकरी का ऑफर होना भी जरूरी है। ट्रम्प सस्ती दर पर काम करने वालों के नाम पर बेकार विदेशियों की भीड़ अमेरिका में नहीं जमा करना चाहते। सूत्रों का कहना है कि नई नीति से हजारों की तादाद में ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय पेशेवरों की मुश्किलें खत्म हो सकती हैं।ट्रम्प प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि कुल मिलाकर राष्ट्रपति चाहते हैं कि अमेरिका में आने वाले अप्रवासी में नेल्सन मंडेला जैसी अद्भुत क्षमताएं होनी चाहिए। डॉक्टर ऐसा हो, जिसके पास कैंसर का उपचार हो तो वैज्ञानिक में मंगल ग्रह पर सबडिवीजन बनाने की क्षमता होनी चाहिए।नई इमीग्रेशन नीति में योग्यता को ही तरजीहहालिया घटनाक्रम को देखकर साफ है कि ट्रम्प देश की आव्रजन नीति में आमूलचूल बदलाव के लिए तैयार हैं। इसमें अमेरिका आने के इच्छुक विदेशियों को योग्यता के आधार पर तरजीह मिलेगी। मौजूदा व्यवस्था में पारिवारिक संबंधों को तरजीह दी जाती है।नई योजना मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और ग्रीन कार्ड और वैध स्थायी निवास प्रणाली को दुरुस्त करने पर केंद्रित है। इससे योग्यता, उच्च डिग्री धारक और पेशेवेर योग्यता रखने वाले लोगों के लिए आव्रजन प्रणाली को सुगम बनाया जा सकेगा। मौजूदा व्यवस्था के तहत करीब 66 फीसदी ग्रीन कार्ड उन अप्रवासियों को दिए जाते हैं, जिनका पारिवारिक संबंध अमेरिका में हो। सिर्फ 12 फीसदी ही योग्यता पर आधारित हैं।योजना लागू करने में आ सकती है मुश्किलनई योजना का एक-दो दिन में ऐलान हो सकता है। हालांकि, इस योजना को लागू करना मुश्किल भरा साबित हो सकता है, क्योंकि आव्रजन सुधार के मुद्दे पर अमेरिकी संसद बंटी हुई है। सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति अपने रिपल्बिकन सांसदों को इस मुद्दे पर समझाने में सफल हो जाएं तो भी डेमोक्रेट और दूसरे नेता इसके विरोध में खड़े हैं। ट्रम्प के लिए उन्हें मनाना मुश्किल भरा साबित हो सकता है।अमेरिका ने 2020 के लिए भारतीयों, पेशेवरों समेत विदेशी नागरिकों को लोकप्रिय एच-1बी वीजा दिए जाने की संख्या 65 हजार तक सीमित कर दी है। तकनीकी कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से हर साल हजारों कर्मचारियों की भर्ती करने के लिए इस वीजा पर निर्भर रहती हैं।
Source: Dainik Bhaskar May 16, 2019 07:09 UTC