नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। संदिग्ध तत्वों को सिस्टम से बाहर निकालने की कोशिश के तहत कॉरपोरेट मामलों का मंत्रलय कंपनियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कॉस्ट अकाउंटेंट्स और कंपनी सेक्रेटरीज के भी ‘नो योर कस्टमर’ (केवाईसी) विवरण हासिल करना चाहता है। मंत्रलय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस कवायद से मंत्रलय के पास कंपनियों ओर पेशेवरों की एक भरोसेमंद सूची तैयार होगी। प्रस्तावित योजना के तहत पहले कंपनियों की केवाईसी होगी और उसके बाद पेशेवरों की केवाईसी का मुहिम चलाया जाएगा।मंत्रलय ने पिछले साल निदेशकों की केवाईसी मुहिम चलाकर उनकी पहचान सुनिश्चित की थी। अवैध लेन-देन को लेकर संदिग्ध कंपनियों पर कार्रवाई की व्यापक कोशिश के तहत इस कवायद को अंजाम दिया गया था। कॉरपोरेट सचिव इंजेती श्रीनिवास ने कहा कि निदेशकों के लिए केवाईसी की अनिवार्यता एक बड़ा कदम था।33 लाख लोगों के पास डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर्स (डीआइएन) था, लेकिन 16 लाख से कुछ अधिक ने ही केवाईसी अनिवार्यता का पालन किया। रजिस्टर्ड कंपनियों के बोर्ड में निदेशक बनने की योग्यता रखने वाले को एक विशिष्ट नंबर दिया जाता है, जिसे डीआइएन कहते हैं।श्रीनिवास ने कहा कि मंत्रलय कंपनियों के लिए केवाईसी प्रक्रिया चला सकती है। यह एक बड़ा कदम होगा। इसके बाद एमसीए21 प्रणाली ऐसी कंपनियों का पंजीकरण नहीं करेगी, जो किसी खास मानक पर खरा नहीं उतरती है।Posted By: Nitesh
Source: Dainik Jagran January 07, 2019 04:18 UTC