7 /7 रंभा ने रावण को चौंकाया‘यह सही है कि अप्सराएं मनोरंजन का साधन हैं किंतु यह गलत है कि उन्हें किसी से प्रेम नहीं होता। मैं सचमुच किसी से प्रेम करती हूं!’ रंभा ने स्पष्ट कह दिया। ‘क्या तुम यह कहना चाहती हो कि तुम्हारे इन सुगंधित और अमृतमयी अधरों का पान कोई और करेगा? तुम्हारी कमनीय काया के भोग का सुख मेरे अलावा किसी और को मिलने वाला है? यह नहीं हो सकता!’ रावण, पूरी तरह काम के प्रभाव में था। ‘क्षमा कीजिए किंतु आप मेरे लिए पिता-तुल्य हैं!’ रावण की अनर्गल बातें सुनकर रंभा ने व्याकुल होकर कहा। ‘आपको मुझसे ऐसी बातें करना शोभा नहीं देता।’ यह कहकर रंभा मुड़कर जाने लगी। ‘ठहरो! पहले मुझे यह बताओ कि तुमने मुझे पिता-तुल्य क्यों कहा?’ ‘क्योंकि मैं आपकी पुत्रवधू के समान हूं।’ रंभा सकुचाते हुए बोली। ‘पुत्रवधू? तुम मेरी पुत्रवधू कैसे हो सकती हो?’ रावण ने आश्चर्य से पूछा। रंभा ने बताया कि वह कुबेर के पुत्र नल कुबेर की पत्नी हैं। कुबेर आपके भाई हैं इस नाते मैं आपकी पुत्रवधू हूं। लेकिन रावण ने तर्क को स्वीकार नहीं किया और रंभा के साथ बल प्रयोग कर बैठा। इसी का परिणाम हुआ कि उसे रंभा के शाप की वजह से भगवान राम के हाथों मृत्यु की प्राप्ति हुई।
Source: Navbharat Times December 27, 2020 02:26 UTC