आपका प्लस कोड सही से काम करे इसके लिए जरूरी है कि आपने सही लोकेशन का प्लस कोड कॉपी किया हो। इसके लिए लोकेशन पर कुछ देर टच करने के बाद लोकेशन के बारे में आने वाली डिटेल्स को अच्छे से चेक कर लें। इसके अलावा अगर लोकेशन का स्ट्रीट व्यू उपलब्ध हो, तो चेक कर लें कि आप सही जगह का प्लस कोड कॉपी कर रहे हैं या नहीं।ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स पर अगर अपने एड्रेस में गूगल मैप्स के प्लस कोड को जोड़ दिया जाए, तो कभी भी आप तक सामान पहुंचाने में डिलीवरी करने वाले को समस्या नहीं होगी। अपनी लोकेशन के लिए गूगल मैप्स ऐप में दिए गए कोड को कॉपी करके अपने एड्रेस में पिन कोड के बाद जोड़ा जा सकता है। इससे आपका एड्रेस गूगल मैप्स पर बिलकुल सटीक लोकेशन दिखाने लगेगा। चलिए इसे पता लगाने का तरीका समझ लेते हैं।गूगल मैप्स के प्लस कोड को आप एक खास तरह का डिजिटल पता मान सकते हैं। यह पता उन जगहों की सटीक लोकेशन बताता है, जहां पोस्टल एड्रेस नहीं पहुंचा पाता। यह कोड अक्षरों और अंकों का छोटा सा कॉम्बिनेशन होता है, जैसे कि 7JWVF23+4X और गूगल मैप्स ऐप में ही मिल जाता है। इस कोड को उन गांव, जंगल, पहाड़ी इलाकों या नई कॉलोनियों में पहुंचने के लिए बनाया गया है जहां घर नंबर या सड़क का नाम नहीं होता। आप इस कोड को भी किसी को भेजकर गूगल मैप्स पर खुद तक पहुंचने की सटीक लोकेशन उपलब्ध करा सकते हैं। इसके अलावा अगर कोड को अपने पते में भी शामिल कर सकते हैं।
Source: Navbharat Times January 04, 2026 14:44 UTC