इंदिरा गांधी की हत्या की खबर जैसे ही बाहर आई एम्स के बाहर भीड़ जुटनी शुरू हो गई. लोग गुस्से में थे और "खून का बदला खून से लेंगे" जैसे नारे लगा रहे थे.दिल्ली में दंगा भड़क उठा. सिखों के घर जलाए जा रहे थे और उनके सामान लूटे जा रहे रहे थे. जब दंगा शुरू हुआ तो इंदिरा गांधी की हत्या के तुरंत बाद प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) के करीबी मित्रों और विपक्षी दलों के नेताओं ने उनसे हस्तक्षेप की मांग की, लेकिन कुछ खास हासिल नहीं हुआ. उन्होंने गृह मंत्री से मांग की कि दंगा रोकने और लोगों की सुरक्षा के लिए सेना बुलाई जाए, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया'.
Source: NDTV December 18, 2018 10:52 UTC