डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान की राजनीति में भूचाल आ गया है। रविवार को इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। वे ईरान के सबसे ताकतवर नेता थे। 1979 में आयतुल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में ईरानी क्रांति के बाद संविधान में सर्वोच्च नेता का पद अस्तित्व में आया। खुमैनी ने 3 दिसंबर 1979 से साढ़े नौ साल तक इस पद को संभाला। 1989 में उनके निधन के बाद खामेनेई को चुना गया। खामेनेई ने 28 फरवरी 2026 तक साढ़े 36 वर्षों तक ईरान के सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी निभाई।किसे बनाया गया अंतरिम सुप्रीम लीडर?
ईरानी संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार, सर्वोच्च नेता की मौत पर नए चुनाव तक एक अस्थायी परिषद देश का नेतृत्व संभालती है। इसमें राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और संरक्षक परिषद का एक न्यायविद शामिल होता है। वर्तमान में अलीरेजा अराफी को इस परिषद में न्यायविद के रूप में चुना गया। इस परिषद के पास पूरा अधिकार नहीं हैं। इसमें पांच प्रमुख मामलों में फैसले तीन-चौथाई बहुमत से ही लागू होते हैं।ये मामले हैं सिस्टम की सामान्य नीतियां निर्धारित करनाजनमत संग्रह जारी करनायुद्ध या शांति की घोषणाराष्ट्रपति पर महाभियोगशीर्ष सैन्य कमांडरों की नियुक्ति या बर्खास्तगी अलीरेजा अराफी अब परिषद के न्यायविद सदस्य हैं, और वे राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और मुख्य न्यायाधीश गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई के साथ मिलकर अंतरिम नेतृत्व संभालेंगे। हालांकि सोमवार को कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में अराफी की मौत का दावा किया जा रहा है। हालांकि इस खबर की पुष्टि नहीं हुई है।कैसे चुने जाते हैं सुप्रीम लीडर?
ईरानी संविधान के अनुसार केवल आयतुल्लाह स्तर के धार्मिक नेता को ही सर्वोच्च पद सौंपा जाता है। हालांकि, खामेनेई के चुनाव के समय कानूनों में संशोधन कर उन्हें यह पद दिया गया था। चुनाव 88 सदस्यीय सर्वोच्च नेता परिषद करती है, जिसके सदस्य हर आठ साल में चुने जाते है।पिछला चुनाव 2016 में हुआ था। उम्मीदवारों को संरक्षक परिषद की मंजूरी जरूरी है, जिसके सदस्य सर्वोच्च नेता द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं। परिषद के वर्तमान अध्यक्ष मोहम्मद अली मोहिदी करमानी हैं, जबकि हाशिम हुसैनी बुशेहरी और अली रजा उर्फी उपाध्यक्ष हैं।बैठक के लिए दो-तिहाई सदस्य (59) जरूरी हैं, और चुनाव में उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई वोट चाहिए। एक विशेष आयोग उम्मीदवारों की योग्यता जांच करता है, जिसमें अहमद हुसैनी खोरासानी, अली रजा उर्फी, मोहम्मद रजा मद्रासी यजदी जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। चुनाव की कोई निश्चित समयसीमा नहीं है, लेकिन इतिहास से पता चलता है कि खुमैनी की मौत के बाद मात्र घंटों में फैसला हो गया था।सर्वोच्च नेता की शक्तियां ईरानी संविधान के अनुच्छेद 57 के तहत विधायिका, न्यायपालिका और प्रशासन सर्वोच्च नेता के अधीन काम करते हैं। वे संरक्षक परिषद के छह सदस्य मनोनीत करते हैं, मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करते हैं, सामान्य रणनीति बनाते हैं, जनमत संग्रह कराते हैं, सशस्त्र बलों के कमांडर नियुक्त करते हैं, युद्ध घोषित करते हैं, और राष्ट्रपति को बर्खास्त कर सकते हैं। वे क्षमादान भी दे सकते हैं और शक्तियां सौंप सकते हैं।सेना का सर्वोच्च कमांडर ईरान की सेना में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स, थलसेना, नौसेना, वायुसेना और कुद्स फोर्स शामिल हैं। सर्वोच्च नेता इनके सर्वोच्च कमांडर हैं। इसके अलावा, एक करोड़ से अधिक बसीज स्वयंसेवक हैं, जिनकी स्थापना खुमैनी ने की। बसीज अब रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का हिस्सा है, और इसके प्रमुख की नियुक्ति भी सर्वोच्च नेता करते हैं।कौन बनेगा उत्तराधिकारी?
सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल ये है कि उनका उत्तराधिकारी किसे बनाया जाए?अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई का नाम इस रेस में सबसे आगे था। मुजतबा खामेनेई पर अमेरिका ने बैन लगाया हैं। मुजतबा पर आरोप है कि उन्होंने 'अपने पिता की क्षेत्रीय स्तर पर अस्थिरता पैदा करने वाली महत्वाकांक्षाओं और दमनकारी घरेलू उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई थी।'मुजतबा को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है। पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौत के बाद, मुजबता की उम्मीदवार और मजबूत हो गई है। इससे पहले तह रईसी को प्रमुख दावेदार माना जाता था। उनकी एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी। मुजतबा के अलावा भी कई उम्मीदवार हैं।