HYDERABAD: India , once called as the vaccine capital, is slowly losing its sheen because of various reasons, primarily the aggressive marketing strategy of China and Korea and the lacklustre policies of the government of India, say experts. Vaccine exports from the country plunged by eight per cent during 2016-17 and nearly four per cent in the previous fiscal year.India exported vaccines worth USD 653.40 million in 2017-18 while it was USD 679.28 million in 2016-17, according to data of the Pharmaceuticals Export Promotion Council, a body under the Ministry of Commerce.Over 70 per cent of vaccines were exported based on UNICEF requirement, which recently changed its procurement policy from yearly indent to quarterly, resulting in uncertainty over production schedule, said chairman and managing director of Bharat Biotech Krishna Ella.The method adopted by the international body on vaccine procurement gave an edge to Korea and China on price bargaining resulting in price erosion, Ella said.Serum Institute of India, Bharat Biotech and Biological E Limited were the leading suppliers to UNICEF.He said the government of India needs to shed bureaucracy-centric policies and develop science-oriented ones to encourage vaccine-manufacturers. "The country should have a strategy, make policies and pricing transparent. Besides, the government should sit with the industry and take on China and Korea in the next five years. If the government does not do that, we would lose our grip on the vaccine market in another two years," Ella told PTI.According to industry sources, some of the Korean companies such as LG Chem and Samsung were spending millions of dollars on expansion and modernising their facilities.Koreans and Chinese have become aggressive, both were getting into the markets of developed countries which India has been exporting to, the sources said.When contacted, Director General of Pharmexcil Uday Bhaskar said vaccine constituted 3.78 per cent of the total pharmaceutical exports last year.Though there has been a negative growth of 10.25 per cent till February last year, it recovered in March and ended up at 3.81 per cent, Bhaskar said.

August 13, 2018 10:52 UTC

The diesel vehicles plying in Delhi will have to paste orange stickers on their windshield, while petrol and CNG vehicles will have to carry blue stickers. The court also asked the ministry to consider having green number plates for electric and hybrid vehicles. The stickers will also have year of manufacturing of vehicles that will help authorities to spot vehicles that are not allowed to enter in Delhi. The stickers will help the enforcement agencies to identify whether a vehicle is running on petrol or diesel. The apex court is hearing a petition on air pollution in Delhi-NCR and had asked for suggestion to control pollution in the city.

August 13, 2018 09:49 UTC

BENGALURU: Over-the-top content platform Hotsar's owner Novi Digital media has received an infusion of Rs 516 crore from Star US, and is now valued at Rs 1,849 crore, as per financial documents sourced from business intelligence platform paper.vc.The documents also show that Hotstar has about seven lakh paid subscribers as of July. Fair value of the company as per Duff and Phelps was $265 million.The valuation report for Novi also shows that for FY18, the company's revenues were Rs 571 crore. However, in the quarter ending June alone, the company saw revenues of Rs 569 crore mainly due to advertiment and subscription revenue from the Indian Premier League Novi saw its losses increase by nearly 20% in FY17 to Rs 489 crore while it reported a 79% increase in revenues in FY17 to Rs 320 crore.Novi is a wholly-owned subsidiary of Star India Pvt Ltd. Hotstar competes with Amazon's Prime video and Netlfix

August 13, 2018 09:40 UTC

नई दिल्ली (जागरण स्पेशल)। 23 मई को कर्नाटक में जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान तमाम विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन किया था। शपथ ग्रहण समारोह में अरविंद केजरीवाल भी शामिल हुए और उन्होंने वहां मौजूद नेताओं से अलग-अलग मुलाकात भी की थी। इससे लगने लगा था कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी महागठबंध का हिस्सा बनेगी, लेकिन तीन महीने के भीतर ही अरविंद केजरीवाल का महागठबंधन से मोहभंग हो गया है।आम आदमी पार्टी मुखिया अरविंद केजरीवाल ने खुद महागठबंधन में शामिल होने से इनकार कर दिया है। इसके पीछे बड़ी वजह बताई जा रही है, आगामी तीन बड़े चुनाव। इतना ही नहीं, महागठबंधन से अलग होने का फैसला AAP के अन्य राज्यों में विस्तार की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि पिछले साढ़े तीन साल से दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी (AAP) मुखिया अरविंद केजरीवाल अब राजनीति में हर चाल और दांव काफी सोच समझकर चलते हैं। हाल ही में AAP के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का विपक्ष के महागठबंधन से किनारा करने को नई रणनीति के तहत देखा जा रहा है।2019 के लोकसभा और दो विधानसभा चुनावों पर केजरीवाल की नजरदिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने पिछले सप्ताह हरियाणा के रोहतक में कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए कहा था कि वह किसी से गठबंधन में विश्वास नहीं करते। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि इस तरह के गठबंधन देश के विकास के लिए नहीं हैं। जब वह यह बयान दे रहे थे कि तो उनके निशाने पर कांग्रेस थी।राजनीति के जानकारों की मानें तो केजरीवाल की आम आदमी पार्टी 2019 लोकसभा चुनाव के साथ इसी साल होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनाव भी लड़ेगी। इसी के साथ कुछ ही महीनों बाद होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 पर भी नजर है, जहां वह सत्ता में है। माना जा रहा है कि अगर AAP महागठबंधन का हिस्सा बनी तो उसे दिल्ली में जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।यही हाल हरियाणा विधानसभा चुनाव में होगा। जहां पर उसे भाजपा और कांग्रेस दोनों से मुकाबला करना है। बता दें कि हरियाणा में चतुष्कोणीय तो दिल्ली में त्रिकोणीय मुकाबला होना है। कहने का मतलब दिल्ली में AAP के सामने मुकाबले में भाजपा व कांग्रेस हैं तो हरियाणा विधानसभा चुनाव में उसे भाजपा, कांग्रेस, इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) से टकराना होगा।हरियाणा विधानसभा चुनाव में ताल ठोकेगी AAPपिछले साल फरवरी-मार्च में हुए पंजाब और गोवा विधानसभा में आम आदमी पार्टी को आशातीत सफलता नहीं मिली थी। पंजाब में तो 20 सीटों के साथ उसने कुछ हद तक इज्जत बचा ली थी, लेकिन गोवा विधानसभा चुनावों में एक अहम किरदार मानी जा रही AAP की हालत काफी बुरी हुई थी। AAP ने गोवा की 40 विधानसभा सीटों में से कुल 39 पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से उसके 38 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। लेकिन AAP इन दोनों चुनावों की हार से उबर चुकी है। अब उसकी नजर हरियाणा विधानसभा की 90 सीटों पर है, जहां वह मजबूती से चुनाव लड़ेगी।केजरीवाल का गृह राज्य है हरियाणा, इज्जत होगी दांव परदिल्ली और पंजाब के बाद आम आदमी पार्टी को हरियाणा में अपने लिए राजनीतिक जमीन नजर आने लगी है। इसके पीछे एक वजह यह भी है कि केजरीवाल का गृह राज्य हरियाणा है। अरविंद केजरीवाल का जन्म 1968 में हरियाणा के हिसार शहर में हुआ था। जाहिर है कि आम आदमी पार्टी हरियाणा विधानसभा चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है।25 मार्च को अरविंद केजरीवाल ने हिसार में ही हरियाणा बचाओ रैली के जरिए अगले साल नवंबर में होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल का हरियाणा में बहुत कुछ दांव पर लगा है। खासकर गृह राज्य होने की वजह से यह चुनाव दिल्ली से बड़ा और अहम चुनाव होगा। हिसार रैली में केजरीवाल ने कहा भी था कि वह अपनी जन्मभूमि पर आए हैं। इससे यह संकेत भी मिला है कि केजरीवाल हरियाणा विधानसभा चुनाव में अपना हरियाणवी कार्ड खेलने की तैयारी में हैं।सीएम उम्मीदवार घोषित कर चुनाव लड़ रही AAPहरियाणा में चुनाव के लिए हालांकि, एक साल से ज्यादा का समय बचा है, लेकिन AAP ने अभी से मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाया है। नवीन जयहिंद, दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति जयहिंद (स्वाति मालिवाल) के पति हैं। दोनों आप के पुराने सदस्य हैं और आप के सभी आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।AAP का दांव गैर जाट पर हैदिल्ली से सटे हरियाणा की राजनीति बेशक जाट और गैर जाट के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। ऐसे में हरियाणा में केजरीवाल ने गैर-जाट पर दांव लगाया है। AAP ने नवीन जयहिंद को पंडित बताकर 8 फीसदी ब्राह्मण वोटरों पर निगाह गड़ाई है। हरियाणा में ब्राह्मण और पंजाबी जिनकी तादाद आठ फीसदी है, एक साथ वोट करते हैं। इसका फायदा AAP को मिल सकता है। इसके अलावा 4 फीसदी वोट वैश्य भी है, जिस पर भी केजरीवाल की निगाह है।दिल्ली के विकास मॉडल पर हरियाणा में लड़ेंगे चुनावकेजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली में विकास के मॉडल को लेकर हरियाणा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। एसवाईएल नहर के मुद्दे पर कहा कि दोनों राज्यों के साथ न्याय होना चाहिए, जो सुप्रीम कोर्ट करेगा। भाजपा समेेेत कांग्रेस व इनेलो, एसवाईएल पर राजनीति कर रही है।दिल्ली में भी AAP-कांग्रेस का मेल मुश्किलपिछले छह महीने से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में गठबंधन को लेकर अफवाहें गर्म थीं, लेकिन इसे दोनों ही पार्टियों के बड़े नेता लगातार इनकार कर रहे थे। दिल्ली में जहां कांग्रेस वापसी करती दिखाई दे रही है वहीं, AAP का आधार कमजोर हुआ है, लेकिन खत्म नहीं। ऐसे में दोनों ही पार्टियां अपने-अपने नफे-नुकसान के मद्देनजर शायद ही एक-दूसरे से गठजोड़ करें।क्या राहुल से नाराज हैं केजरीवालपिछले दिनों दिल्ली में भी कांग्रेस व आम आदमी पार्टी (AAP)

August 13, 2018 07:22 UTC

The truckers’ strike was intense in the southern and western parts of the country, and lasted for around ten days, he said.Rubber tapping in Kerala, the largest rubber producer in the country, had remained affected in June and July. Besides, it has come on top of price rise of other raw materials like carbon black, synthetic rubber and rubber chemicals,’’ said Ashish Pandey, vice president (materials), JK Tyres. The prices are likely to remain high as crude oil, from which several raw materials are derived, continues to be costly, he said.Sluggish availability of rubber has pushed tyre makers to depend more on imports. India imported a record 4.69 lakh tonnes in 2017-18.Although tyre makers fear that their profits would be hit, they said revenue would be on target as original equipment (OE) tyres were selling well. “All these tyres are NR (natural rubber) heavy, which has pushed up the cost ,’’ he said.

August 13, 2018 07:07 UTC





As India moves closer to become the most populous country in the next 7 years, the country is facing another serious concern about ageingpopulation. According to some studies, India is ageing much faster than previously thought and may have nearly 20 per cent population of 60 years and above by 2050.The government recently stated in Parliament that India will have 34 crore people above 60 years of age by 2050 that would be more than the total population of the US. The numbers are even higher than projected by other international agencies like UN and HelpAge. The agencies had projected the 60-plus population in India to rise to nearly 32 crore by 2050.Union minister Anupriya Patel last week said in Lok Sabha that the growth rate of the 0-14 population was slowing, but rising for the older people in the country. The numbers reveal that India may lose demographic dividend and stare at a situation where a large number of population will be dependent including old age, widowed and highly dependent women.

August 13, 2018 06:56 UTC

आधार नंबर शेयर करने को लेकर जागरूक करेगा UIDAI, बताएगा क्या करें और क्या न करेंनई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। टेलिकॉम नियामक ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा की ओर से आधार नंबर को सार्वजनिक करने के बाद भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) लोगों को अपने बायोमेट्रिक्स साझा करने के संबंध में जागरूक करने की योजना बना रहा है। प्राधिकरण यूजर्स को यह बताएगा कि अपने आधार नंबर का क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए।यूआईडीएआई आधार नंबर को पैन, बैंक खाता और क्रेडिट कार्ड नंबर के समतुल्य बनाना चाहता है ताकि यूजर्स को अपनी निजी जानकारी सार्वजनिक (विशेषरूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म) करने के प्रति सावधान किया जा सके।यूआईडीएआई के सीईओ अजय भूषण पांडे ने कहा, “लोगों को यह सूचित करना बेहद जरूरी है कि वे अपना आधार स्वतंत्रता से इस्तेमाल करें, बिना किसी भय से और इस संबंध में विस्तृत FAQ जारी किये जाएंगे।”क्या है पूरा मामला-दरअसल, 28 जुलाई को ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा ने ट्विटर पर अपना आधार नंबर सार्वजनिक कर खुली चुनौती दी कि महज आधार नंबर जानने से कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। इस के बाद लोगों ने उनकी निजी जानकारी ट्वीट करनी शुरू कर दी और दावा किया कि यह उनके आधार नंबर से ही निकाली गई है। शर्मा ने इस पर कहा कि सार्वजनिक की जा रही जानकारी पहले से पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है। साथ ही कहा, “ये डिटेल्स कोई स्टेट सीक्रेट नहीं है। मैंने मोबाइल नंबर या अन्य जानकारी सार्वजनिक करने की चुनौती नहीं दी। मैंने इस आधार नंबर के जरिए मुझे नुकसान पहुंचाने की चुनौती दी थी। अब तक कोई सफल नहीं हो पाया। मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं।”TRAI प्रमुख आरएस शर्मा को मिला दो साल का सेवा विस्तारशर्मा को रिटायरमेंट से एक दिन पहले दो साल का सेवा विस्तार दे दिया गया। कार्यकाल समाप्त होने से एक दिन पहले 30 सितंबर 2020 तक दिया गया सेवा विस्तार ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने आधार से जुड़े लोगों के निजी ब्योरे की सुरक्षा मुद्दे पर आदेश दिया है। सरकार दावा कर रही है कि सुरक्षा प्रणाली फूलप्रूफ है। शीर्ष अदालत ने बैंकों और टेलीकाम कंपनियों को केवाईसी नियम के तहत आधार का विवरण मांगने की समयसीमा बढ़ाने का निर्देश दिया है।शर्मा को यह विस्तार 10 अगस्त से 30 सितंबर 2020 तक के लिए दिया गया है। यह जानकारी कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में दी गई है। जुलाई 2015 में उन्हें तीन वर्षों के लिए टाई का प्रमुख बनाया गया था। शर्मा झारखंड काडर के 1982 बैच के (रिटायर) आइएएस अधिकारी हैं।By Surbhi Jain

August 13, 2018 06:18 UTC

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को यूएस की प्रमुख मोटरसाइकिल मैन्युफैक्चरर हार्ले डेविडसन के बहिष्कार का समर्थन किया है। यह मामला स्टील पर अधिक टैरिफ को लेकर कंपनी और राष्ट्रपति ट्रंप को लेकर जारी ताजा विवाद के रुप में सामने आया है।विस्कॉन्सिन स्थित मोटरसाइकिल निर्माता ने इस साल की शुरुआत में ही अपनी विदेशी सुविधाओं के लिए मोटरसाइकिलों के उत्पादन को संयुक्त राज्य अमेरिका से यूरोपीय संघ में स्थानांतरित करने के लिए एक घोषणा की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने हार्ले डेविडसन की आलोचना करते हुए ज्यादा टैक्स लगाने की चेतावनी दी थी और कहा था कि विदेशी निर्माताओं को अमेरिका में आकर्षित करने से प्रतिस्पर्धा में इजाफा होगा।ट्रंप ने ट्विटर पर लिखा, “हार्ले डेविडसन रखने वाले कई लोगों ने योजना बनाई है कि अगर यह कंपनी उत्पादन के लिए विदेश जाती है तो वह उसका बहिष्कार करेंगे। साथ ही ट्रंप ने कहा कि कई अन्य कंपनियां हमारी तरफ आ रही हैं, इसमें हार्ले के प्रतिद्वंद्वी भी शामिल हैं। यह कंपनी का बेहद खराब कदम है। अमेरिका जल्द ही एक स्तरीय खेल का मैदान होगा या बेहतर।”ट्रंप के इस बयान का जवाब देने की दिशा में हार्ले डेविडसन लगातार इनकार करती आई है। रविवार को भीहार्ले डेविडसन ट्रंप के इस बयान पर अपनी त्वरित टिप्पणी नहीं दे सकी। हार्ले डेविडसन ने अनुमान लगाया है कि ईयू टैरिफ से कंपनी पर साल 2018 के बाकी बचे हुए महीनों में 30 से 45 मिलियन डॉलर का और 90 से 100 मिलियन डॉलर का सालाना खर्चा बढ़ेगा।By Praveen Dwivedi

August 13, 2018 06:08 UTC

शिवानंद द्विवेदी। पिछले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव साहित कई अन्य राज्यों में मिली प्रचंड जीत के बाद अप्रैल 2017 में ओडिशा में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में अमित शाह ने एक बयान दिया था, जो उस समय सुर्खियों में छाया रहा। भाजपा कार्यकर्ताओं से उस समय अमित शाह ने कहा था कि यह जीत बड़ी है, लेकिन यह भाजपा का स्वर्णकाल नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा का स्वर्णकाल तब आयेगा जब वह पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में सत्ता में आएगी। इस तथ्य से ज्यादातर लोग सहमत होंगे कि अमित शाह अगर कुछ बोलते हैं तो उसके पीछे उनकी ठोस रणनीति होती है। भाजपा अध्यक्ष के उस बयान को पश्चिम बंगाल की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के केंद्र में रखकर समझने की जरूरत है।पश्चिम बंगाल की राजनीतिपश्चिम बंगाल की राजनीति में गत एक डेढ़ वर्ष में सबसे बड़ा परिवर्तन यह आया है कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के सामने सर्वाधिक मुखर विपक्ष की भूमिका में भाजपा खुद को स्थापित करने में सफल होती दिख रही है। परिवर्तन की यह आहट पश्चिम बंगाल की राजनीति में किस तरह का बदलाव लाने जा रही है इसका सटीक आकलन करना अभी थोड़ा कठिन अवश्य है, किंतु इसमें कोई दो राय नहीं कि भाजपा वहां सर्वाधिक मुखर विपक्ष बनती जा रही है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाजपा की भूमिका प्रभावी दल के रूप में 2014 के आम चुनाव से पहले नहीं मानी जाती थी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को बंगाल से न केवल दो लोकसभा सीटों पर जीत मिली बल्कि 17 फीसद से ज्यादा वोट हासिल हुए। इसके बावजूद भाजपा को चौथे पायदान की पार्टी ही माना गया।ममता बनर्जी का बंगाल की सत्ता पर कब्जादशकों के कम्युनिस्ट शासन को उखाड़कर ममता बनर्जी ने बंगाल की सत्ता पर कब्जा किया, लिहाजा उनके प्रथम राजनीतिक विरोधी कम्युनिस्ट बने रहे। बंगाल की राजनीति में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर थी और तृणमूल कांग्रेस के उभार के बाद तो तीसरे पायदान पर खिसक गयी थी। इसके पीछे मूल वजह कांग्रेस की अवसरवादी और अस्थिर राजनीति रही। अगर देखा जाए तो गठबंधन की सियासत में कांग्रेस कभी तृणमूल तो कभी वाम दलों के साथ खड़ी नजर आई। साल 2011 के बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस यूपीए का हिस्सा थी, लिहाजा वह चुनाव कांग्रेस के साथ गठबंधन में लड़ी। 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद जब यूपीए की सरकार केंद्र में नहीं रही और 2016 में बंगाल विधानसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस कम्युनिस्ट पार्टी के साथ खड़ी नजर आई। हालांकि इन चुनावों में कम्युनिस्ट-कांग्रेस गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा।सांगठनिक क्षमता को मजबूत करने में लगी भाजपाकांग्रेस की कभी वाम तो कभी तृणमूल की इस नीति ने बंगाल में उसकी विश्वसनीयता और जनाधार को और कम कर दिया। इस बीच भाजपा अपनी सांगठनिक क्षमता को मजबूत करने में लगी थी। 2014 के आम चुनावों में भाजपा को लगभग 87 लाख मतदाताओं ने वोट दिया था। अमित शाह को यह समझने में देर नहीं लगी कि बंगाल की सियासी जमीन के भीतर वहां के सत्ताधारी दल के खिलाफ कुछ उथल-पुथल चल रही है, जिसे भाजपा के पक्ष में मोड़ने की जरूरत है। बंगाल में चौथे पायदान की पार्टी मानी जाने वाली भाजपा के लिए पहला महत्वपूर्ण कार्य था संघर्ष और राजनीतिक आंदोलन के माध्यम से बंगाल की राजनीति में विपक्ष की जगह पर कब्जा करना। इसकी शुरुआत अमित शाह ने 25 अप्रैल 2017 को नक्सलबाड़ी से कर दी थी। अपने बूथ प्रवास के दौरान शाह तीन दिनों तक बंगाल में रहे और नक्सलबाड़ी से उन्होंने बूथ संपर्क शुरू किया। इस प्रवास में उन्होंने संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, बूथ विस्तारक, बंगाल के पत्रकार, प्रबुद्ध वर्ग साहित अनेक लोगों से संपर्क किया।चुनाव को प्रभावित करने की कोशिशराज्य में हाल ही में हुए पंचायत चुनावों में जिस ढंग से पश्चिम बंगाल की सरकार ने चुनाव को प्रभावित करने और हिंसा को बढ़ावा देने का अपनी ओर से भरपूर प्रयास किया, उससे इस धारणा को और बल मिला कि बंगाल में भाजपा के बढ़ते प्रसार और प्रभाव ने ममता की चिंता बढ़ा दी है। बंगाल में हुए हाल के इन चुनावों में जिस ढंग से सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस ने धन-बल और हिंसा के सहारे विरोधी दलों को चुनाव में हिस्सा लेने से रोकने की कोशिश की, उससे यह पता चलता है कि ममता बनर्जी भी यह स्वीकार कर चुकी हैं कि अब उनकी लड़ाई भाजपा से है। इस चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी आश्चर्य व्यक्त किया था। इन सबके बावजूद जब चुनाव परिणाम आये तो भारतीय जनता पार्टी बंगाल में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। भाजपा ने कम्युनिस्ट पार्टी को तीसरे पायदान पर धकेल दिया। इसी साल फरवरी में नोयापाड़ा विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा दूसरे नंबर की पार्टी रही, जबकि कांग्रेस चौथे पायदान पर खिसक गई।लोकसभा चुनाव में बचे कुछ महीनेअब लोकसभा चुनाव में कुछ महीने ही बचे हैं। इन सबके बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह लगातार यह बोलते नजर आ रहे हैं कि 2019 में बंगाल से भाजपा को 22 से ज्यादा सीटों पर जीत मिलने जा रही है। शाह के दावे में कितनी सच्चाई है यह तो परिणामों से ही पता चलेगा लेकिन उनकी कार्यशैली पर संदेह नहीं किया जा सकता है। अगर शाह ने 22 सीटों का लक्ष्य रखा है तो इसकी रणनीति भी उन्होंने पुख्ता तरीके से तैयार की होगी। गत डेढ़ महीने में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दो बार बंगाल का दौरा कर चुके हैं। एक इंटरव्यू में तो वे यहां तक कह चुके हैं कि वे महीने के तीन दिन पश्चिम बंगाल में रहने का मन बना रहे हैं। इसलिए लक्ष्यभेदी रणनीतिकार अमित शाह की नजरें यदि बंगाल में ममता के दुर्ग पर हैं तो यह राजनीतिक लड़ाई और रोचक होने वाली है। मुद्दों की समझ रखने वाले जनता की नब्ज को टटोलने और बिना देर किए सटीक निर्णय करने वाले अमित शाह का बंगाल पर फोकस और ममता बनर्जी की बौखलाहट इस बात का संकेत है कि बंगाल में तृणमूल की सियासी दीवार की नींव दरकने लगी है।(फेलो डॉ. श्यामा प्रसाद मळ्खर्जी रि

August 13, 2018 05:30 UTC

पीठ दर्द से जूझ रहे कोहली ने खत्म किया सस्पेंस, बताया तीसरे टेस्ट में खेलेंगे या नहींलंदन, जेएनएन। लॉर्ड्स टेस्ट में भारत की पारी और 159 रन की करारी हार के साथ ही इंग्लैंड ने पांच मैचों की मौजूदा टेस्ट सीरीज़ में 2-0 की बढ़त बना ली है। लॉर्ड्स में भी कोहली एंड कंपनी ने निराश किया, हालांकि इस टेस्ट मैच में विराट कोहली की फिटनेस ने भारतीय टीम की चिंता बढ़ा दी थी, लेकिन जैसे ही टेस्ट मैच खत्म हुआ उसके कुछ ही देर बाद ही कोहली ने तीसरे टेस्ट मैच में अपने खेलने न खेलने के सस्पेंस को खत्नम कर दिया।पीठ में दर्द से परेशान रहे कोहलीलॉर्ड्स टेस्ट मैच के तीसरे दिन विराट कोहली लगभग 37 मिनट तक पीठ में दर्द की वजह से मैदान से बाहर रहे थे। वो मैदान से बाहर इलाज करा रहे थे, हालांकि चौथे दिन की सुबह जब भारतीय टीम फील्डिंग के लिए उतरी तब भी कोहली की जगह रवींद्र जडेजा ही मैदान पर उनकी जगह क्षेत्ररक्षण कर रहे थे। पीठ की इसी तकलीफ की वजह से दूसरी पारी में कोहली चौथे स्थान पर बल्लेबाज़ी के लिए भी नहीं आए थे और रहाणे को नंबर चार पर आना पड़ा था।विराट ने खत्म किया सस्पेंसविराट कोहली की पीठ की तकलीफ को देखते हुए उनके तीसरे टेस्ट मैच में न खेलने को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब कोहली ने साफ कर दिया है कि वो नॉटिंघम में 18 अगस्त से शुरू होने वाले टेस्ट मैच में खेलेंगे। लॉर्ड्स में मिली हार के बाद विराट ने कहा, ‘अभी तीसरे टेस्ट में पांच दिन बाकी है और मुझे विश्वास है कि मैं फिट हो जाऊंगा। पीठ दर्द की समस्या फिर उभरी है, लेकिन यह वर्कलोड के कारण है।‘'हो जाऊंगा फिट'विराट कोहली ने बताया कि पीठ की तकलीफ के कारण उन्हें रन दौड़ने में भी परेशानी हो रही थी। इसके साथ ही साथ कोहली ने इससे निपटने का उपाय भी बताया। उन्होंने कहा कि वे फील्ड पर अब ज्यादा आक्रामकता नहीं दिखाएंगे। यह समस्या दक्षिण अफ्रीकी दौरे के टाइम उभरी थी, वैसे मुझे विश्वास है कि मैं समय रहते तीसरे टेस्ट मैच के लिए फिट हो जाऊंगा। अभी मेरी पीठ में अकड़न है लेकिन रिहैबिलिटेशन के जरिए मैं इससे निजात पा लूंगा।कोहली पर भारत की उम्मीदें किस हद ‍तक निर्भर है, इसका पता इसी बात से चलता है कि उन्होंने बर्मिंघम टेस्ट मैच में जब 149 और 51 रन बनाए थे तब भारत ने मैच में संघर्ष किया था। वे दूसरे टेस्ट में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए तो टीम इंडिया को पारी के अंतर से हार झेलनी पड़ी। भारत को अब तीसरे टेस्ट मैच में बेहतर टीम कॉम्बिनेशन के साथ मैदान में उतरना होगा।क्रिकेट की खबरों के लिए यहां क्लिक करेंअन्य खेलों की खबरों के लिए यहां क्लिक करेंBy Pradeep Sehgal

August 13, 2018 05:26 UTC

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पश्चिम बंगाल से 10 बार सांसद व १४वीं लोकसभा के अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का सोमवार सुबह सवा आठ बजे के करीब कोलकाता के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया है। वे 89 साल के थे। वह काफी दिनों से बीमार चल रहे थे और उनका डायलिसिस भी हुआ था। रविवार को दिल का हल्का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उनकी स्थिति और बिगड़ गई थी। उनका उपचार करने वाली मेडिकल टीम के चिकित्सक ने रविवार को ही बताया था कि गुर्दे संबंधी समस्या से जूझ रहे चटर्जी को मंगलवार को गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले महीने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष को मस्तिष्काघात के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। पिछले 40 दिनों से चटर्जी का उपचार चल रहा था। स्वास्थ्य में सुधार के संकेत मिलने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी, लेकिन मंगलवार को हालत बिगड़ने के बाद उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था और सोमवार को सुबह उन्होंने दुनिया छोड़ दी। अस्पताल से उनका शव दक्षिण कोलकाता स्थित आवास पर ले जाया जाएगा। इसके बाद उनकी अंत्येष्टि की जाएगी।सोमनाथ चटर्जी का जन्म 25 जुलाई 1929 को असम के तेजपुर में हुआ था। उनके पिता का निर्मल चंद्र चटर्जी विख्याक अधिवक्ता थे और मां का नाम वीणापाणि देवी था। सोमनाथ चटर्जी के पिता अखिल भारतीय हिंदू महासभा के संस्थाकों में से थे एक थे। सोमनाथ चटर्जी ने कोलकाता और ब्रिटेन में पढ़ाई की। ब्रिटेन के मिडिल टैंपल से लॉ की पढ़ाई करने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट वकील हो गये। लेकिन इसके बाद उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया। वह एक प्रखर वक्ता के तौर पर लोगों की नजरों में आ चुके थे। सोमनाथ चटर्जी का राजनीतिक जीवन विरोधाभाषों के साथ शुरू हुआ। उनके पिता जहां दक्षिणपंथी राजनीति से थे तो सोमनाथ ने करियर की शुरुआत वामपंथी माकपा के साथ 1968 में की।1971 में पहली बार वह सांसद चुने गये और फिर 10 बार लोकसभा के सांसद निर्वाचित होते रहे। राजनीति में सोमनाथ चटर्जी एक बहुत ही सम्मानित नेता के तौर पर देखा जाता है। सोमनाथ चटर्जी की पत्नी रेणु चटर्जी का कुछ दिन पहले ही निधन हो गया था। उनके परिवार में एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। 1971 से सांसद चुने जाने के बाद वह हर लोकसभा के लिये चुने गये। साल 2004 में वह 10वीं बार लोकसभा के लिये चुने गये। उन्होंने 35 सालों तक सांसद के तौर पर देश की सेवा की और 1996 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साल 2004 में 14वीं लोकसभा के लिये उन्हें सभी दलों की सहमति से लोकसभा का अध्यक्ष बने थे।माकपा ने दिया था पार्टी से निकालवर्ष 2008 में भारत-अमेरिका परमाणु समझौता विधेयक के विरोध में माकपा ने तत्कालीन मनमोहन सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। तब सोमनाथ चटर्जी लोकसभा अध्यक्ष थे। पार्टी ने उन्हें स्पीकर पद छोड़ देने के लिए कहा लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद मार्टी ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था।ममता बनर्जी से हार गए थे लोकसभा चुनावराजनीतिक करियर में एक के बाद एक जीत हासिल करनेवाले सोमनाथ चटर्जी जीवन का एक चुनाव पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने हार गए थे। 1984 में जादवपुर सीट पर हुए लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने तब सीपीएम के इस कद्दावर नेता को हराया था। इसके बाद ही उन्होंने अपना लोकसभा क्षेत्र बदल कर बोलवुर चले गए जहां से वह २००९ लोकसभा चुनाव के पहले तक सांसद रहे।By Tilak Raj

August 13, 2018 04:52 UTC

Raja Man Singh was the second of four brothers of Maharaja Brajendra Singh, an honorary Colonel, who had succeeded his father, Maharaja Kishen Singh to the gaddi in 1929. I met him once but it was his brother, Maharaja Brajendra Singh with whom I had at least three meetings during Army events. Raja Man Singh was a lieutenant when he left service because of State pressures. Housed in the same building as the journalists, he returned around midnight, calling out, “Press, Press, where are you?” Rahman Khan replied, “The Press is resting now”. But later Colonel Brajendra Singh bid goodbye to hunting and converted the lake and its environs into the Keoladeo National Park with the help of Raja Man Singh.

August 13, 2018 04:52 UTC

more-inFormer Lok Sabha Speaker Somnath Chatterjee (89) passed away on Monday morning after suffering a mild heart attack. — Narendra Modi (@narendramodi) August 13, 2018Former Prime Minister Manmohan Singh, sends a condolence letter to Renu Chatterjee, wife of Somnath Chatterjee. BJP president Amit Shah says: "Saddened to learn about the demise of Somnath Chatterjee, former Speaker of Lok Sabha. Union Petroleum Minister Dharmendra Pradhan says: "Deeply saddened by the demise of veteran politician and former Lok Sabha speaker Shri Somnath Chatterjee. Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal called pays tribute to Chatterjee, saying: "Extremely sad news about Somnath Chatterjee ji.

August 13, 2018 04:49 UTC

नई दिल्ली/नोएडा (जेएनएन)। दिल्ली से सटे यूपी के गौतमबुद्धनगर में जेवर एयरपोर्ट को लेकर राजनीति गर्माहट बढ़ने लगी है। प्रदेश सरकार ने किसानों की सहमति बगैर एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का फैसला किया है। जल्द ही शासन इस बारे में प्रशासन को दिशा निर्देश भेजेगा। जमीन का अवार्ड घोषित होने के साथ ही अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, लेकिन राजनीति दलों ने इसका विरोध करने की तैयारी कर ली है।दल के नेताओं का कहना है कि अगर प्रदेश सरकार ने किसानों की जमीन अधिग्रहण में कानून का पालन नहीं किया और उत्पीड़न किया तो आंदोलन होगा। प्रदेश सरकार के रुख से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसान शासन प्रशासन की कार्रवाई पर निगाह लगाए हुए है। किसानों का कहना है कि वह विकास विरोधी नहीं है, लेकिन अपने हक की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण के लिए 1441 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है। प्रशासन ने किसानों की सहमति के लिए 16 से 26 जुलाई तक गांवों में शिविर भी लगाया था। लेकिन चार किसानों को छोड़कर किसी ने जमीन अधिग्रहण पर सहमति नहीं दी।किसान जमीन अधिग्रहण के एवज में सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मांग रहे हैं। किसानों को मनाने के लिए जीबीयू आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके साथ बंद कमरे में बैठक की थी। इसके बावजूद पेंच नहीं सुलझा है। अब प्रदेश सरकार ने किसानों की सहमति लिए बगैर जमीन अधिग्रहण का फैसला किया है। इसका विरोध भी शुरू हो गया है।प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी ट्वीट किया है। उन्होंने कहा है कि सरकार किसान एवं ग्रामीणों को कानूनी कागजी बातों का झांसा देकर उनकी जमीन बिना उनकी मर्जी के औने पौने दामों पर हड़पना चाहती है। किसान गरीब का इतना विरोध बढ़ेगा कि अगले चुनाव में सरकार खुद अपनी जमीन खो बैठेगी।वहीं, पिछले दिनों रालोद नेता जयंत चौधरी भी किसानों से मुलाकात के दौरान साफ कर चुके हैं कि जेवर एयरपोर्ट के मुद्दे पर उनकी पार्टी किसानों के हित की लड़ाई लड़ेगी और आंदोलन में पीछे नहीं रहेगी।उधर, सुरेंद्र नागर (राज्यसभा सदस्य,सपा) का कहना है कि सपा जेवर में एयरपोर्ट के समर्थन में है, लेकिन जमीन अधिग्रहण के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। किसानों की सहमति व चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों का उत्पीड़न किया गया तो पार्टी आंदोलन करेगी।नवी मुंबई में भी नहीं ली गई है सहमतिदेश में नवी मुंबई व अमरावती में भी एयरपोर्ट का निर्माण हो रहा है। नवी मुंबई में जमीन अधिग्रहण के लिए वहां के किसानों की सहमति नहीं ली गई। प्रदेश सरकार ने सीधे जमीन का अधिग्रहण किया। अमरावती ने किसानों ने आगे बढ़कर एयरपोर्ट व प्रदेश की राजधानी बनाने के लिए जमीन दी है। इसलिए दोनों ही जगह पर एयरपोर्ट की जमीन को लेकर कोई अड़चन नहीं हुई।By JP Yadav

August 13, 2018 04:07 UTC

नई दिल्‍ली, जेएनएन। लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का निधन हो गया है। वह 89 साल के थे। चटर्जी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। दिल का हल्का दौरा पड़ने के बाद उनकी स्थिति और बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्‍हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने सोमनाथ चटर्जी के निधन पर शोक जताया है। सोमनाथ चटर्जी सन 1968 में सीपीएम के सदस्य बने. ज्योति बसु का सोमनाथ चटर्जी पर स्नेह बना रहा।सोमनाथ चटर्जी के लिए राष्‍ट्रहित सर्वोपरि रहा। उन्‍होंने दलगत राजनीति का हिस्‍सा होते हुए भी इसे अपने ऊपर कभी हावी नहीं होने दिया। वह जब तक लोकसभा के स्‍पीकर रहे, सदैव संसद की गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रयासरत रहे।सोमनाथ चटर्जी को किडनी की बीमारी के चलते दस अगस्त को दोबारा अस्पताल में भर्ती हुए थे। इससे पहले गत 28 जून को मस्तिष्क रक्स्राव के बाद सोमनाथ चटर्जी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके इलाज के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया था, जो उनकी हालत पर कड़ी निगरानी रख रही थी।कोलकाता और कैम्ब्रिज में की पढ़ाईसोमनाथ चटर्जी का जन्म असम के तेजपुर में 25 जुलाई, 1929 को हुआ था। वह मशहूर वकील और हिंदू महासभा के संस्थापक अध्यक्ष निर्मलचंद्र चटर्जी के पुत्र थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई कोलकाता और उच्‍च शिक्षा ब्रिटेन के मिडिल टैंपल से लॉ में हुई। श्रमिक नेता और वकील सोमनाथ जी प्रभावशाली वक्ता हैं। वह 1989 से 2004 तक लोकसभा में सीपीएम संसदीय दल के नेता रहे। 2004 में वह सर्वसम्मति से लोकसभा के स्पीकर चुने गए थे।सर्वश्रेष्ठ सांसद सोमनाथ चटर्जीसोमनाथ चटर्जी 1971 में पहली बार सांसद चुने गए और इसके बाद उन्‍होंने राजनीति के क्षेत्र में कई मुकाम हासिल किए। चटर्जी दस बार लोकसभा सदस्य के रूप में चुने गए। उन्होंने 35 सालों तक सांसद के तौर पर देश की सेवा की और 1996 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ‘सर्वश्रेष्ठ सांसद’ रहे सोमनाथ चटर्जी पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष भी थे। उस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल में उद्योग लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किए। लेकिन चटर्जी जीवन का एक चुनाव पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हार गए थे। 1984 में जादवपुर सीट पर हुए लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने तब सीपीएम के इस कद्दावर नेता को हराया था।अपनी जेब से विदेश दौरे पर परिवार का उठाते थे खर्चसोमनाथ चटजी उसूलों के पक्‍के और बेहद ईमानदार शख्‍स थे। जब उनका सरकारी कामों के लिए विदेश जाना होता था, तो वह अपने परिजन का पूरा खर्च अपनी जेब से देते थे। इतना ही नहीं स्पीकर की जिम्मेदारी संभालते समय भी उन्होंने अपने सरकारी आवास पर पहले से हो रहे कुछ गैर जरूरी सरकारी खर्चों में कटौती कर दी थी। देशहित में सोचने वाले ऐसे नेता बेहद कम हैं।By Tilak Raj

August 13, 2018 04:01 UTC