Hindi NewsNationalVande Mataram Controversy; Jamiat Ulama i Hind Muslim | Freedom Of Religionमदनी बोले-वंदे मातरम पर सरकार का आदेश आजादी पर हमला: ये मनमाना और एकतरफा; वंदे मातरम के सभी छंद गाने के विरोध में संगठननई दिल्ली 15 घंटे पहलेकॉपी लिंकजमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के X पर एक पोस्ट में वंदे मातरम के सभी छंद गाए जाने का विरोध किया।मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वंदे मातरम के सभी छंद गाने का विरोध किया है। संगठन ने कहा कि सरकार का ये आदेश हमारी धार्मिक आजादी पर हमला है।संगठन ने सरकार के आदेश को एकतरफा और मनमाना बताया। जमीयत के प्रेसिडेंट मौलाना अरशद मदनी ने X पर एक पोस्ट में कहा कि मुसलमान किसी को भी वंदे मातरम गाने या बजाने से नहीं रोकते, लेकिन गाने के कुछ छंद मातृभूमि को एक देवता के रूप में दिखाते हैं। ये हमारी मान्यताओं के खिलाफ हैं।केंद्र सरकार ने गुरुवार को एक आदेश जारी कर राष्ट्रगीत वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन की तरह ही सम्मान देना अनिवार्य कर दिया है। आदेश के मुताबिक राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड है। अब तक मूल गीत के पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे।मदनी ने और क्या कहा…एक मुसलमान सिर्फ एक अल्लाह की पूजा करता है, इसलिए उसे यह गाना गाने के लिए मजबूर करना संविधान के आर्टिकल 25 और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का साफ उल्लंघन है।इस गाने को जरूरी बनाना और इसे नागरिकों पर थोपने की कोशिश देशभक्ति का इजहार नहीं है, बल्कि यह चुनावी राजनीति, एक सांप्रदायिक एजेंडा और बुनियादी मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश है।देश के लिए प्यार का असली पैमाना नारों में नहीं, बल्कि किरदार और कुर्बानी में है। इसकी शानदार मिसालें मुसलमानों और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के ऐतिहासिक संघर्ष में खास तौर पर देखी जा सकती हैं।ऐसे फैसले देश की शांति, एकता और डेमोक्रेटिक मूल्यों को कमजोर करते हैं और संविधान की भावना को कमजोर करते हैं। वंदे मातरम को जरूरी बनाना संविधान, धार्मिक आजादी और डेमोक्रेटिक उसूलों पर साफ हमला है।AIMPLB बोला- सरकार का फैसला गैर कानूनीवंदे मातरम अनिवार्य किए जाने पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने कहा कि सरकार का यह फैसला गैर कानूनी है। धार्मिक आजादी, सेक्युलर मूल्यों के खिलाफ है।AIMPLB ने मांग कि है कि सरकार इस नोटिफिकेशन को वापस ले। वापस नहीं लिया तो पर्सनल लॉ बोर्ड इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देगा।पंजाब में भी विरोध, दल खालसा ने सिख पहचान के खिलाफ बतायासिख संगठन दल खालसा ने वंदे मातरम अनिवार्य किए जाने के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इसे सिख पहचान व धार्मिक भावनाओं के खिलाफ बताया है।दल खालसा के नेता कंवरपाल सिंह बिट्टू ने बयान जारी करते हुए कहा- यह फैसला भारतीयता के नाम पर हिंदुत्व विचारधारा को सिख समुदाय पर थोपने का प्रयास है। सिख होने के नाते हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। यह निर्णय सिख समुदाय की भावनाओं और उनकी धार्मिक पहचान के विपरीत है। पूरी खबर पढ़ें…वंदे मातरम् बजने पर हर व्यक्ति को खड़ा होना होगाकेंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ, लेकिन मीडिया में इसकी जानकारी 11 फरवरी को आई।न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, आदेश में साफ लिखा है कि अगर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ साथ में गाए या बजाए जाएं, तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। इस दौरान गाने या सुनने वालों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा।हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया है किन-किन मौकों पर राष्ट्रगीत गाया जा सकता है, इसकी पूरी लिस्ट देना संभव नहीं है। यह पहली बार है जब राष्ट्रगीत के गायन को लेकर डिटेल में प्रोटोकॉल जारी किए गए हैं। केंद्र इस समय वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम मना रहा है।राष्ट्रपति के आगमन और झंडारोहण जैसे कार्यक्रमों में गाया जाएगानई गाइडलाइन के अनुसार, तिरंगा फहराने, किसी कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्र के नाम उनके भाषणों और संबोधनों से पहले और बाद में, और राज्यपालों के आगमन और भाषणों से पहले और बाद में सहित कई आधिकारिक अवसरों पर वंदे मातरम बजाना अनिवार्य होगा।मंत्रियों या अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की मौजूदगी वाले गैर-औपचारिक लेकिन जरूरी कार्यक्रमों में भी राष्ट्रगीत सामूहिक रूप से गाया जा सकता है, बशर्ते इसे पूरा सम्मान और शिष्टाचार के साथ पेश किया जाए।10 पेजों के आदेश में, सिविलियन पुरस्कार समारोहों, जैसे कि पद्म पुरस्कार समारोह या ऐसे किसी भी कार्यक्रम में जहां राष्ट्रपति उपस्थित हों, वहां भी वन्दे मातरम बजाया जाएगा।सिनेमा हॉल में लागू नहीं होंगे नए नियमहालांकि, सिनेमा हॉल को नए नियमों से दूर रखा गया है। यानी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले ‘वंदे मातरम’ बजाना और खड़ा रहना अनिवार्य नहीं होगा।वहीं अगर किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री फिल्म के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजाया जाता है, तो दर्शकों के लिए खड़ा होना जरूरी नहीं होगा। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी स्थिति में खड़े होने से प्रदर्शन में व्यवधान और अव्यवस्था हो सकती है।मंत्रालय ने कहा है कि अब से राष्ट्रगीत का आधिकारिक संस्करण ही गाया या बजाया जाएगा और इसे सामूहिक गायन के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा थाभारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था।1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच