संवाद सहयोगी, कटड़ा। रोपवे परियोजना को लेकर एक बार फिर कटड़ा में माहौल गरमा गया है। स्थानीय संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन तेज करने से पीछे नहीं हटेंगे। बुधवार को पिट्ठू, घोड़ा, पालकी यूनियन के अध्यक्ष, माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के सदस्य तथा विभिन्न सामाजिक व व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने रोपवे परियोजना को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों से मुलाकात की। संगठनों ने प्रस्तावित रोपवे परियोजना का विरोध दर्ज कराया और इसे धार्मिक आस्था, परंपराओं तथा स्थानीय रोजगार के लिए घातक बताया।विभिन्न संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि माता वैष्णो देवी की यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा से जुड़ा विषय है। पैदल यात्रा, पिट्ठू, घोड़ा और पालकी के माध्यम से श्रद्धालुओं की सेवा वर्षों से चली आ रही है, जिसे रोपवे लगने से गहरा आघात पहुंचेगा। संगठनों ने कहा कि रोपवे से यात्रा की मूल भावना समाप्त हो जाएगी और श्रद्धालुओं का पारंपरिक मार्गों से जुड़ाव खत्म हो जाएगा।हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर खतरा इससे आस्था को ठेस पहुंचेगी। माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के सदस्यों ने कमेटी से स्पष्ट कहा कि रोपवे परियोजना से कटड़ा और आसपास के क्षेत्रों में हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा। पिट्ठू, घोड़ा और पालकी सेवाएं केवल रोजगार का साधन नहीं हैं, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक कार्य हैं, जिनसे स्थानीय लोग अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।यदि रोपवे लगाया गया तो इन सेवाओं की मांग कम हो जाएगी और सैकड़ों मजदूर बेरोजगार हो जाएंगे। वहीं घोड़ा, पिट्ठू और पालकी यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह जमवाल ने अपनी पीड़ा रखते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से उन्हें लगातार बेकूफ बनाया जा रहा है और आश्वासनों के अलावा कुछ भी नहीं मिला। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन वास्तव में रोपवे लगाकर इन सेवाओं को समाप्त करना चाहता है, तो प्रभावित मजदूरों को सम्मानजनक मुआवजा दिया जाना चाहिए। यूनियन अध्यक्ष ने मांग रखी कि प्रत्येक मजदूर को कम से कम 20-20 लाख रुपये दिए जाएं, ताकि वे अपने परिवार का गुजर-बसर कर सकें।प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि रोपवे परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों की भावनाओं और आजीविका की अनदेखी की जा रही है। विकास के नाम पर केवल बड़े कारपोरेट और ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया जा रहा है, जबकि जमीन से जुड़े मेहनतकश लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। संगठनों ने समिति से अपील की कि किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय जनता, धार्मिक संगठनों और सेवा प्रदाताओं की राय को गंभीरता से सुना जाए।वहीं उच्च स्तरीय समिति ने आश्वासन दिया कि रोपवे परियोजना को लेकर अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। समिति के सदस्यों ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था, स्थानीय रोजगार और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए ही कोई फैसला लिया जाएगा।इस मौके पर माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के अध्यक्ष बलिराम राणा, भाजपा के पूर्व राज्य मंत्री अजय नंदा, कांग्रेस के पूर्व मंत्री जुगल किशोर, कांग्रेस नेता राजेश सदोत्रा, वरुण मगोत्रा, भाजपा के प्रभात सिंह मंगली, रमन सिंह, सोनू ठाकुर, कारण दीप सिंह, सोहन चंद, जगदीश कुमार, सहित भाजपा का कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों से बड़ी संख्या में नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे।