पटना ब्यूरो।रंगों के पर्व होली से पहले पटना में एक ऐसा होलिका दहन होने जा रहा है, जो आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी मैसेज देगा। राजधानी के चूड़ी मार्केट में इस बार गोइठा, घी, कपूर और आम की लकड़ी से शुद्ध एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ होलिका दहन किया जाएगा। खास बात यह है कि पूरा आयोजन पूरी तरह इको-फ्रेंडली होगा और पारंपरिक सजावट के जरिए पर्यावरण संतुलन का मैसेज समाज तक पहुंचाया जाएगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी कदमकुआं स्थित शिव मंदिर परिसर में श्री श्री होलिका दहन महोत्सव समिति चूड़ी मार्केट द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। समिति के अनुसार सोमवार की मध्यरात्रि के बाद, यानी मंगलवार रात करीब एक बजे होलिका दहन होगा। देर रात होने वाले इस आयोजन को देखने के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं और इस बार भी बड़ी भीड़ जुटने की संभावना है। इसके लिए चूड़ी मार्केट स्थित शिव मंदिर परिसर में होलिका का डेकोरेशन तेजी से किया जा रहा है। समिति का कहना है कि किसी भी प्रकार की प्लास्टिक या हानिकारक मटेरियल का यूज पूरी तरह बैन रखा गया है।-अलग-अलग जिलों से मंगाया गया अमा की लकड़ीबिहार के अलग-अलग जिलों से आम की लकड़ी और गोइठा मंगाया गया है, ताकि होलिका दहन पूरी तरह पारंपरिक और शुद्ध तरीके से संपन्न हो सके। लकड़ियों को व्यवस्थित ढंग से सजाया और सेट किया जा रहा है, जिससे दहन के समय कम धुआं निकले और वातावरण स्वच्छ बना रहे। पूजा सामग्री में कपूर, लौंग, इलायची, गुग्गुल और धूना जैसे सुगंधित पदार्थ शामिल किए जाएंगे। इन सामग्रियों के उपयोग से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और धार्मिक माहौल अधिक पवित्र व आध्यात्मिक बन जाता है।-हजारों श्रद्धालुओं की होगी गैदरिंगशध,प्रॉपर विधि-विधान के साथ होगा कार्यक्रमहोलिका दहन से पहले पूरे विधि-विधान से पूजा की जाएगी। पुरोहित मंत्रोच्चार के साथ पूजा प्रोसेस पूरा कराएंगे और उसके बाद निर्धारित शुभ मुहूर्त में होलिका को अग्नि दी जाएगी। आयोजन समिति का कहना है कि वर्षों से यह ट्रेडिशन इसी तरह फॉलो किया जा रहा है और इस बार भी उसी पैटर्न में कार्यक्रम आयोजित होगा।स्थानीय लोगों के लिए यह केवल धार्मिक इवेंट नहीं, बल्कि सामाजिक यूनिटी और सांस्कृतिक कनेक्शन का प्रतीक भी है। आसपास के इलाकों से परिवारों की अच्छी-खासी गैदरिंग होती है और लोग एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं देते हैं।-पौराणिक स्टोरी से जुड़ा है मैसेजहोलिका दहन के पीछे गहरी पौराणिक स्टोरी जुड़ी है। कथा के अनुसार प्राचीन काल में राजा हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था और चाहता था कि सभी उसकी ही पूजा करें। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और अपने पिता के आदेश के बावजूद भक्ति में लीन रहता था।-हिरण्यकश्यप ने कई बार प्रह्लाद को मारने की कोशिश की, लेकिन हर बार वह सुरक्षित बच गया। अंततः उसने अपनी बहन होलिका की हेल्प ली, जिसे अग्नि में न जलने का वरदान मिला था। प्लान के तहत होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जलकर भस्म हो गई।यह घटना इस बात का सिंबल है कि अहंकार, अन्याय और बुराई कितनी भी पावरफुल क्यों न हो, अंत में ट्रुथ और भक्ति की ही विक्ट्री होती है। होलिका दहन उसी मैसेज को समाज तक पहुंचाता है।-पर्यावरण प्रोटेक्शन का भी दिया जाएगा मैसेजआयोजन समिति का कहना है कि बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए धार्मिक कार्यक्रमों को भी जिम्मेदारी के साथ ऑर्गनाइज करना जरूरी है। ईको-फ्रेंडली होलिका दहन इसी दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण स्टेप है। इससे यह मैसेज जाएगा कि परंपराओं को फॉलो करते हुए भी नेचर की प्रोटेक्शन की जा सकती है।राजधानी पटना में होने वाला यह कार्यक्रम हर साल की तरह इस बार भी आकर्षण का केंद्र रहेगा। होली से पहले की इस रात में आस्था की ज्वाला प्रज्वलित होगी, जो बुराई के अंत के साथ-साथ पर्यावरण जागरूकता और सामाजिक एकता का भी मजबूत मैसेज देगी।