डिजिटल डेस्क,जबलपुर। जबलपुर की कृषि उपज मंडी में हर रविवार सजने वाला जैविक हाट अब शहरवासियों के लिए भरोसेमंद खरीद केंद्र बनता जा रहा है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस हाट में रसायन-मुक्त फल-सब्जियां, अनाज, घी, शहद और कोल्ड-प्रेस्ड तेल जैसे उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।किसानों और उपभोक्ताओं के बीच सीधे संपर्क से जैविक खेती को भी नया प्रोत्साहन मिल रहा है। जिला प्रशासन जबलपुर एवं कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से कृषि उपज मंडी में रविवार को आयोजित जैविक हाट में जिले के विभिन्न विकासखंडों से आए 23 जैविक कृषकों ने उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया। लोगों द्वारा यहां पर फल-सब्जियां, अनाज, दलहन, देशी घी, दुग्ध उत्पाद, शहद सहित अनेक प्राकृतिक और रसायन-मुक्त उत्पाद को सराहा गया।हाट में गोकलपुर-बरगी से देशी घी, छाछ और देशी हल्दी सहित मूंगफली व ड्राई-फ्रूट फ्लेवर गुड़, कुटकी और जैविक मसाले प्रदर्शित किए गए। तिल, सरसों, मूंगफली व नारियल के कोल्ड-प्रेस्ड तेल तथा लौकी, धनिया, मटर और शहद भी आकर्षण का केंद्र रहे। मझौली विकासखंड के किसानों द्वारा लाई गई ताजी जैविक सब्जियों को उपभोक्ताओं ने खासा पसंद किया।उप संचालक कृषि डॉ. एसके निगम ने हाट का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और किसानों को जैविक उत्पादन व विपणन को बढ़ावा देने संबंधी मार्गदर्शन दिया। अनुविभागीय कृषि अधिकारी सिहोरा मनीषा पटेल सहित वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी आरएल मिश्रा, ऋचा सिंह, रूपाली पटेल, जया पालीवाल और रिचा तिवारी आदि उपस्थित थे।

March 02, 2026 13:22 UTC

रायपुर में 85 वर्ष पुरानी छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य मंडल के स्थापना समारोह में डॉ. राजाराम त्रिपाठी को “राष्ट्रीय कृषि रत्न अवार्ड” से सम्मानित किया गया. राजाराम त्रिपाठी को “राष्ट्रीय कृषि रत्न अवार्ड” से सम्मानित किया गया. लगभग बारह वर्षों से जनजातीय सरोकारों पर केंद्रित राष्ट्रीय स्तर की दिल्ली से प्रकाशित लोकप्रिय मासिक पत्रिका ककसाड़ के संपादक रहे डॉ. उनकी सात से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें हाल में प्रकाशित शोधग्रंथ “गांडा अनुसूचित जाति या जनजाति” विशेष चर्चा में है.

March 02, 2026 13:17 UTC

लेखक के बारे में रिजवान रिजवान, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में चीफ सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पत्रकारिता में उनका करीब 10 वर्षों का अनुभव है। वह इंटरेशनल अफेयर्स (वर्ल्ड सेक्शन) कवर कर रहे हैं। अमर उजाला के साथ डिजिटल पारी की शुरुआत की और फिर वन इंडिया हिंदी, राजस्थान पत्रिका से होते हुए नवभारत टाइम्स में है। उन्‍होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और भारतीय जनसंचार संस्थान से पढ़ाई की है।... और पढ़ें

March 02, 2026 13:13 UTC

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यूएस-इजरायल और ईरान में जंग के बीच ओमान के पोर्ट सुल्तान काबूस के उत्तर-पश्चिम में समुद्र में एक तेल टैंकर पर हमला सामने आई है। ओमान के समुद्री सुरक्षा केंद्र ने बताया कि मार्शल आइलैंड्स गणराज्य के ध्वज के तहत चल रहे तेल टैंकर एमकेडी व्योम पर मस्कट गवर्नरेट के तट से 52 नॉटिकल मील दूर एक बिना मानवरहित नाव द्वारा हमला किया गया।भारतीय नाविक की मौतयह टैंकर लगभग 59,463 मीट्रिक टन कार्गो ले जा रहा था।बयान में आगे कहा कि इस हमले के परिणामस्वरूप मुख्य इंजन कक्ष में आग और विस्फोट हुआ, जिसमें एक चालक दल के सदस्य, जो भारतीय नागरिक थे, की मौत हो गई।हमले के दौरान टैंकर के मुख्य इंजन रूम में आग लगने से धमाका हुआ, जिसपर कुल 21 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें 16 भारतीय, 4 बांग्लादेशी और 1 यूक्रेनी नागरिक शामिल थे।

March 02, 2026 13:09 UTC

The Indian stock market opened sharply lower on Monday as prices of crude oil, a key commodity for a host of industries, surged on the back of the conflict between Israel and Iran developing into a full-blown war across West Asia. Other key Asian markets were also in the red. The National Stock Exchange’s (NSE) benchmark Nifty 50 index had opened the session over 2% lower and currently trades 296 points or 1.2% lower at 24,970.15 points at around 10:20 AM. The BSE’s 30-stock Sensex index is also 1.2% lower. All sectoral indices of the NSE are lower, with the Nifty Oil & Gas (down 1.5%) being the worst hit.

March 02, 2026 13:03 UTC





डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल साथ मिलकर ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत भी हो चुकी है। जवाबी कार्रवाई के दौरान ईरान ने इजरायल, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कुबैत समेत कई देशों पर मिसाइलें दाग दी। जिसके चलते तनाव और अधिक बढ़ गया है।इस युद्ध से दुनियाभर के लोग दहशत में आ गए हैं। अब सवाल यह है कि आखिर मध्य-पूर्व के दो देशों के बीच की दोस्ती दुश्मनी में कैसे बदल गई? आइए समझते हैं पीछे की कहानी। इजरायल और ईरान के बीच आज की दुश्मनी की जड़ें इतिहास की गहराइयों में कहीं दफन हैं। साल 1948 में इजरायल की स्थापना के समय, तुर्की के बाद ईरान दूसरा मुस्लिम बहुल देश था जिसने इजरायल को देश के रूप में मान्यता दी थी। उस दौर में दोनों देशों के रिश्ते अच्छे थे, लेकिन समय के साथ सब कुछ उलटा होता चला गया।ईरान-इजरायल संबंधों में दरार की शुरुआत 1979 तक इजरायल और ईरान के संबंध दोस्ताना थे। ईरान तब पहलवी वंश के शाहों के अधीन एक राजतंत्र था और अमेरिका का प्रमुख सहयोगी भी था। इजरायल के संस्थापक डेविड बेन-गुरियन ने अरब पड़ोसियों की नाराजगी के बावजूद ईरान से दोस्ती की नींव रखी थी। हालांकि, ईरान ने 1948 में फिलिस्तीन विभाजन योजना का विरोध किया था। फिर भी, उसने इजरायल को मान्यता दी।लेकिन 1979 में अयातुल्लाह खुमैनी की इस्लामिक क्रांति ने सब कुछ बदल कर रख दिया। क्रांतिकारियों ने शाह की सत्ता उखाड़ फेंकी और इस्लामी गणराज्य स्थापित किया। खुमैनी ने खुद को 'पीड़ितों का रक्षक' बताया साथ ही अमेरिका और इजरायल के 'साम्राज्यवाद' को खारिज कर दिया। नई सरकार ने इजरायल से सभी संबंध तोड़ दिए, इजरायली पासपोर्ट अमान्य कर दिए और तेहरान के दूतावास को फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) को सौंप दिया, जो फिलिस्तीन राष्ट्र की मांग के लिए संघर्ष कर रहा था।फिलिस्तीन मुद्दे से गहराई दुश्मनी इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप सेंटर में ईरान प्रोग्राम के निदेशक अली वेज के मुताबिक इजरायल विरोध नई ईरानी सरकार की मूल नीतियों का हिस्सा था। उस समय ईरान के कई कई नेता फिलिस्तीनियों के साथ लेबनान में गुरिल्ला युद्ध में शामिल रहे थे, जिससे उनकी सहानुभूति गहरी थी। नया ईरान खुद को इस्लामी ताकत के रूप में पेश करना चाहता था।इसी वजह से उसने फिलिस्तीनी मुद्दे को उठाया, जिसे अधिकतर अरब मुस्लिम देशों ने उस वक्त पीछे छोड़ दिया था। खुमैनी ने फिलिस्तीनी मुद्दे पर दावा जताया, और तेहरान में बड़े प्रदर्शन आम हो गए। इजरायल में ईरान विरोध 1990 के दशक तक मजबूत नहीं हुआ, क्योंकि तब सद्दाम हुसैन का इराक बड़ा खतरा था। इजरायल ने 'ईरान-कॉन्ट्रा' डील में भी भूमिका निभाई, जहां अमेरिका ने ईरान को इराक युद्ध में हथियार दिए थे। लेकिन बाद में इजरायल ने ईरान को अस्तित्व के खतरे के रूप में देखा।शैडो वॉर से परमाणु ठिकानों तक ईरान ने सऊदी अरब जैसे विरोधियों से बचने के लिए 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' नेटवर्क बनाया, जिसमें हिजबुल्लाह जैसे संगठन शामिल हैं, जो लेबनान से यमन तक फैले हैं। इजरायल ने इन पर हमले किए, जिन्हें 'शैडो वॉर' कहा जाता है, जहां दोनों आधिकारिक पुष्टि किए बिना कार्रवाई करते हैं।

March 02, 2026 13:03 UTC

Protests erupted across Pakistan and India on Monday over the killing of Iran’s Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei in a coordinated US-Israeli airstrike on Tehran. 1 5 Smoke rises from the premises of the U.N. office in the city of Gilgit, after it was set ablaze by protesters. In Gilgit, protesters burned a police station and damaged a school and the offices of a local charity, officials said. Interior Minister Mohsin Naqvi urged citizens not to take the law into their hands and to “record their protest peacefully”. 5 5 People from the Muslim community take out a protest march from Gangoo against the killing of Iran's Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei in US-Israel strikes, in Pulwama.

March 02, 2026 12:59 UTC

Khomeini, 53, holds a symbolically important role in public life as custodian of his grandfather's mausoleum in southern Tehran. Some politicians inside Iran have seen him as a rival to hardliners who gained sway under Khamenei, notably his son, Mojtaba. His selection could prove awkward, as the Islamic Republic has long criticized hereditary rule and cast itself as a more just alternative. He reached the landmark nuclear agreement with the Obama administration that US President Donald Trump scrapped during his first term. Lastly, Ayatollah Ali Reza Arafi, a senior Shiite cleric handpicked by Khamenei to be a member of the Guardian Council in 2019.

March 02, 2026 12:59 UTC

बिहार सरकार राज्य में बढ़ती बेरोजगारी को देखते हुए कई योजना निकालती रहती है और अभी हाल ही में राज्य सरकार ने दुग्ध उत्पादन को बढ़ानें के लिए एक शानदार योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत अनुसूचित जनजाति के किसानों, बेरोजगारों युवक-युवतियों के लिए 2 दुधारू मवेशियों की डेयरी यूनिट लगाने पर सरकार की ओर से भारी सब्सिडी प्रदान की जाएगी. आइए इस लेख में जानें योजना के बारे में पूरी जानकारी..डेयरी फार्म योजना से क्या लाभ होगा? इसके अलावा, सरकार का इस योजना की शुरुआत करने के पीछे यह उद्देश्य है कि राज्य में दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी की जा सकें और रोजगार के भी अवसर बढ़ें. अगर आप भी इस योजना में इच्छुक है तो आपको इस योजना के तहत इस प्रकार सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलेगा-सरकार इस योजना के तहत अनुसूचित जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को 2 दुग्धारू पशु खरीदने के लिए इस योजना के तहत जो राशि तय की गई है. इसका मतलब की साफ है किसानों की लागत की बचत हो जाएगी और वह इस सरकारी मदद से अपना करोबार शुरु कर सकेंगे.

March 02, 2026 12:59 UTC

Nearly 20% of global oil flows through this chokepoint — and over 40% of India’s crude imports transit this route. This makes higher crude prices not just an inflationary concern but a balance-of-payments risk. Higher crude increases inflation risk. In contrast, upstream oil producers such as ONGC and Oil India may benefit from stronger realizations, while defence names like HAL and BEL could see sentiment support. And that is precisely why India may be more impacted than most global peers in the event of a sustained US–Iran war.

March 02, 2026 12:54 UTC

लेखक के बारे में धर्मेंद्र कुमार धर्मेंद्र कुमार, नवभारत टाइम्स डिजिटल में सीनियर जर्नलिस्ट (असिस्टेंट एडिटर) हैं। वह पिछले दो साल से NBT (Digital) में कार्यरत हैं और भारत की राजनीति में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले उत्तर प्रदेश और आस्था का केंद्र कहे जाने वाले उत्तराखंड के स्टेट एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली में पिछले 15 सालों से रिपोर्टिंग और डेस्क पर रहते हुए करियर, क्राइम, गुड न्यूज, जंगल न्यूज, हाइपरलोकल, राजनीति और करंट अफेयर्स से जुड़ी खबरों पर काम किया है। उनकी पत्रकारिता का सफर अमर उजाला डिजिटल के साथ शुरू हुआ और वहां एक लंबी पारी के बाद हिंदी वन इंडिया में न्यूज डेस्क हेड की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी साउथ कैंपस से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा हासिल किया है। वह टाइम्स इंटरनेट के महत्वपूर्ण 'NextGen Leadership Program' में हिस्सा लेने वालों में प्रमुख रूप से शामिल थे।... और पढ़ें

March 02, 2026 12:48 UTC

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर है। अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए हमले के बाद अब यह पूरे खाड़ी देशों में फेल गया है। शनिवार को इजरायल-अमेरिका द्वारा की गई सैन्य अभियान में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दुबई, अबू धाबी, दोहा और मनामा समेत कई जगहों पर भी मिसाइल दागनी शुरू कर दी।ईरान द्वारा किए गए पलटवार का आलम यह है कि कतर और बहरीन की राजधानियों के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में भी विस्फोटों की आवाजें गूंज रही हैं। सोमवार को इजरायली सेना ने नए मिसाइलों के आने की पुष्टि की।जिसके बाद न केवल तेल अवीव में हवाई हमले के सायरन बजे, बल्कि खाड़ी देशों के नागरिक बुनियादी ढांचों, हवाई अड्डों और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी भारी गोलाबारी और ड्रोन हमले देखे गए। कहां कहां ईरान ने किया अटैक? ईरान की राजधानी तेहरान पर हुए हमले के तीसरे दिन, तेल अवीव और यरुशलम के ऊपर कई मिसाइलों को रोका गया। वहीं, इराक में एरबिल हवाई अड्डा जहां अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन के सैनिक तैनात हैं और एक बड़ा अमेरिकी वाणिज्य दूतावास परिसर भी स्थित है। वहां, बार-बार ड्रोन आ रहा जिसे रोका जा रहा है। कुवैत में भी अमेरिकी दुतावास के पास धुएं के गुबार उठते देखा गया।ईराक में जहां अमेरिका के कई सैन्य अड्डे स्थित हैं, नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। रविवार को बहरीन की राजधानी मनामा में हवाई अड्डे पर ड्रोन से हमला हुआ, जिससे मामूली नुकसान हुआ। ईरान के हमले में जो सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, वह संयुक्त अरब अमीरात (UAE) है। जहां ड्रोन द्वारा गिराए गए मलबे से दुबई के रिहायशी इलाकों में दो लोग घायल हो गए। शनिवार को ईरानी हमलों के कारण पाम सीफ्रंट डेवलपमेंट और बुर्ज अल अरब होटल जैसी इमारतों में आग लग गई।वहीं, अबू धाबी के हवाई अड्डे पर के पास हुए हमले में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और सात लोग घायल हो गए, जबकि एक अन्य व्यक्ति की दिन में पहले मलबे गिरने से मौत हो गई।ये हवाई अड्डे हुए प्रभावित ईरान द्वारा किए गए पलटवार में अंतर्राष्ट्रीय यातायात के लिहाज से दुनिया का सबसे व्यस्त दुबई हवाई अड्डा और कुवैत का हवाई अड्डा भी प्रभावित हुए। सऊदी अरब में, रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और प्रिंस सुल्तान एयरबेस (जहां अमेरिकी सैन्यकर्मी तैनात हैं) को निशाना बनाकर दागी गई ईरानी मिसाइलों को रोक दिया गया।कतर में जहां इस क्षेत्र का सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा स्थित है, वहां ईरान ने 65 मिसाइलें और 12 ड्रोन दागे, जिनमें से अधिकांश को रोक दिया गया, लेकिन आठ लोग घायल हो गए, जिनमें से एक की हालत गंभीर है। ईरान द्वारा ओमान के भी दुक्म बंदरगाह को दो ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया।अमेरिका और उसके अरब सहयोगियों ने की निंदा अमेरिकी विदेश विभाग ने बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ एक संयुक्त बयान में कहा, "नागरिकों और शत्रुता में शामिल न होने वाले देशों को निशाना बनाना लापरवाह और अस्थिर करने वाला व्यवहार है।"रविवार को खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी), जिसमें संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सऊदी अरब, ओमान, कतर और कुवैत शामिल हैं, ने ईरानी हमलों के खिलाफ एक बैठख की। इस बैठख में परिषद ने इन हमलों को तत्काल रोकने का आह्वान किया करते हुए कहा, "खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता केवल एक क्षेत्रीय चिंता नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता का एक मूलभूत स्तंभ है"।

March 02, 2026 12:42 UTC

The US military said on Monday that Kuwait "mistakenly shot down" three American F-15E Strike Eagles during a combat mission as Iran attacked the country. The US military's Central Command said the combat included attacks from Iranian aircraft, ballistic missiles and drones, the first time Iran's ageing combat fleet has been engaged in the war. "The US Air Force fighter jets were mistakenly shot down by Kuwaiti air defences," it said. "All six aircrew ejected safely, have been safely recovered, and are in stable condition. Kuwait has acknowledged this incident, and we are grateful for the efforts of the Kuwaiti defence forces and their support in this ongoing operation."

March 02, 2026 12:39 UTC

लेखक के बारे में दिल प्रकाश दिल प्रकाश, नवभारत टाइम्स डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर है। वह 20 साल से भी अधिक समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने खेल, राजनीति, संसद, रक्षा और बिजनस जैसे कई विषयों पर रिपोर्टिंग की है। दिल प्रकाश पांच साल से भी अधिक समय से एनबीटी डिजिटल के साथ जुड़े हैं। इससे पहले वह यूनीवार्ता और बिजनस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने बीबीसी में भी आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के रूप में काम किया है। दिल प्रकाश ने नई दिल्ली के भारतीय विद्या भवन संस्थान से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है।... और पढ़ें

March 02, 2026 12:29 UTC

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March 02, 2026 12:25 UTC