वे शिव का समाजवाद, कबीर की समरसता और तुलसी का वैदुष्य का फ्यूजन हैं. यह भी संयोग ही है कि वैलेंटाइन डे से सिर्फ तीन दिन पहले ही आप अवतरित हुए. वैसे भी बसंत में चुहल है, राग है, रंग है, मस्ती है. पहले बसंत पंचमी से ही बसंत के आने की आहट होती थी. लेकिन बसंत तो बसंत है.