डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इस्लामी देश पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की दुर्गति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गैर मुस्लिम नाबालिग लड़कियों पर होने वाले अत्याचार को तो यहां रोकनेवाला कोई नहीं है, लेकिन जिन अदालतों में पीड़ित अल्पसंख्यक न्याय मिलने की उम्मीद में जाते हैं, वहां भी उनके साथ घोर अन्याय ही होता है।इसकी ताजा मिसाल यह नाबालिग ईसाई लड़की है। पाकिस्तान की एक संघीय अदालत ने 13 वर्षीय ईसाई लड़की को उसका अपहरण करके जबरन मतांतरण करने के बाद उससे निकाह करने वाले अपहर्ता मुसलमान के ही हवाले कर दिया है। एक मुस्लिम व्यक्ति ने नाबालिग मारिया शाहबाज को जबरन इस्लाम कुबूल करवाकर उससे शादी की।न्यायाधीशों ने मारिया शाहबाज के माता-पिता द्वारा प्रस्तुत जन्म प्रमाण पत्र को स्वीकार नहीं किया, जो उसकी उम्र को साबित करता था। अधिकार समूह राह-ए-निजात मंत्रालय के अध्यक्ष सफदर चौधरी ने बताया कि न्यायाधीशों ने पहले के न्यायिक निष्कर्षों को भी खारिज कर दिया कि यह विवाह अवैध था।माता पिता फैसले से विचलित अब 13 वर्षीय लड़की के माता-पिता अदालत के फैसले से विचलित हैं। पेशे से ड्राइवर, लड़की के पिता शाहबाज मसीह ने बताया कि उनके पड़ोसी ने पिछले साल 29 जुलाई को मारिया शाहबाज का अपहरण किया जब वह पास की दुकान पर जा रही थी। तब से उनका परिवार उसे खोजने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की बार-बार मांग कर रहा है।


Source:   Dainik Jagran
February 17, 2026 02:38 UTC